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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

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लोकपाल पर सोनिया ने दिलाया अन्ना को भरोसा


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लोकपाल को अपने पक्ष में करने को लेकर कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने अन्‍ना हजारे को एक चिट्ठी लिखकर बताया कि हमारी सरकार संसद के अगले सत्र में लोकपाल बिल लाएगी.

सोनिया ने लिखा कि हमारी सरकार पूरी कोशिश करेगी कि हम इस बिल को कानून का रूप दे पाएं. सरकार ने लोकपाल बिल को किसी तरीके से तो लोकसभा में पास करा लिया है लेकिन राज्‍यसभा में इसे पास कराने को लेकर दिक्‍कत आ रही है. हालांकि सरकार ने जिस स्‍वरूप में लोकपाल बिल को रखा है वह अन्‍ना हजारे को पसंद नहीं है.

श्रीमती सोनिया गांधीजी को जनलोकपाल के बारे में पत्र...

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सेवा में,
आदरणीय श्रीमती सोनिया गांधीजी,
अध्यक्ष, राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी,
10 जनपथ, नई दिल्ली.

महोदया,
दो दिन पहले आपने वक्तव्य किया है कि, "हमने जन लोकपाल बिल पास किया है।" मेरे साथ देश की जनता यह जानना चाहती है कि अगर जनलोकपाल बिल पास किया है, तो क्या उसमें सी.बी.आई और सी.वी.सी को स्वायत्तता दी गई है ? अगर नहीं दी हो तो देना जरुरी है। जब तक सी.बी.आय. और सी.वी.सी. को स्वायत्तता नहीं मिलेगी तब तक भ्रष्टाचार को रोक नहीं लगेगी। सरकारी दफ्तर के क्लास एक से लेकर चार तक अ, ब, क, ड सभी वर्ग के अधिकारी, कर्मचारी क्या जनलोकपाल के दायरे में आये हैं ? सरकारी दफ्तर के सभी अधिकारी कर्मचारी जब तक सिर्फ सरकार के अधीन हैं, तब तक भ्रष्टाचार नहीं मिट सकता ऐसी देशवासियों की धारणा हैं। क्यों कि नीचे से ले कर ऊपर तक कई जनप्रतिनिधी और अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार की चैन (Chain) बन गई हैं। बिना रिश्वत दिये जनता का कोई काम नहीं होता।
      आपने यूं भी कहा है कि भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए कडे कानून बनाना जरुरी है। जनता भी यही चाहती है कि जब तक देश में कडे कानून नही बनेंगे जिनमें कि भ्रष्टाचारियों को मृत्युदण्ड, उम्रकैद, आजीवन सश्रम कारावास जैसी सजा का प्रावधान नहीं है, जब तक भ्रष्ट लोगों को कानून का डर नही लगेगा, तब तक भ्रष्टाचार की गुनहगारी कम नहीं होगी। जनतंत्र में ऐसे कडे कानून लोकसभा और विधानसभा में बनते हैं। लेकिन जनतंत्र में जरुरी है कि कानून का मसौदा बनाते समय जनता में से सुयोग्य अनुभवी लोग और सरकार के लोग मिल कर मसौदा बनाएं।
      आज जब कानून का मसौदा सरकार के लोग बनाते हैँ, तब सम्भवतः जनता के अनुभवी लोगों का सहभाग न होने के कारण कडे कानून नहीं बन पाते। जनतंत्र में जन सहभागिता को ले कर कानून का मसौदा बनाना जरुरी है। जनलोकपाल का सशक्त कानून बनाने के लिये सरकार और सिवील सोसायटी मिल कर मसौदा बनावे इस लिये 5 एप्रिल 2011 में दिल्ली के जंतर मंतर पर जन आंदोलन हुआ था, जिसमें करोडो लोग शामिल हुये थे। जनता के दबाव के कारण आपकी पार्टी की सरकारने सरकार के पांच मंत्री और सिविल सोसायटी के पांच लोगों की मिल कर एक मसौदा समिती भी बनाई थी।
      सरकार ने एक राजपत्र भी निकाला था। इस मसौदा समिती की तीन महिनों तक मीटिंगे भी चली। लेकिन उस मसौदा समिति का क्या निर्णय हुआ यह अभी तक जनता को पता नहीं चला। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार विकेंद्रीकरण के पक्ष में नहीं है। जब तक सत्ता का विकेंद्रीकरण नहीं होगा तब तक भ्रष्टाचार नहीं रुकेगा।
      आपने यह भी कहा है कि सत्ता एक जहर है। अगर सत्ता जहर है तो हर पक्ष और पार्टी में सत्ता के लिये इतनी जबरदस्त होड क्यूं लगी है ? क्यों कि सत्ता जहर नहीं, बल्कि जैसे कई प्रकार की नशा होती है, वैसे ही एक नशा है, ऐसा हमें और जनता को लगता है।
        इसका एक उदाहरण यह है कि जनलोकपाल का आंदोलन रामलिला मैदान में तेरह दिन तक चला था। देश की जनता आंदोलन में करोडों की संख्या में रास्ते पर उतर आई थी। आजादी के 65 साल में पहली बार इतनी तादाद में जनता रास्ते पर उतर आई थी। खास कर करोडों युवक रास्ते पर उतर गये थे। लेकिन किसीने एक पत्थर तक नहीं उठाया था। अगर सत्ता जहर होता तो सरकार की तरफ से जनता की मांगे मानी जातीं। लेकिन 13 दिन तक देश में आंदोलन चले थे फिर भी सरकार ने जनता को प्रतिसाद नहीं दिया। कारण वह जहर के नहीं बल्कि सत्ता की नशा में थी ऐसा अगर कहें तो गलत नहीं होगा।
                दिल्ली में एक छात्रा पर सामूहिक बलात्कार हुआ और देश भर में करोडों युवक आंदोलन के लिये रास्ते पर उतर गये थे। इस संबंध में महिलाओं पर बलात्कार करनेवालों को फांशी या उम्रकैद जैसी कडी सजा देने वाला कानून यदि सरकार पहले से ही बनाती तो गुनाह करने वालों को कुछ तो डर होता था। ऐसी घटना नहीं हो पाती। लेकिन सरकार न तो कडे कानून बनाती हैं और जो पहले से बने हुए हैं उन कानूनों का सख्ती से अमल नहीं करती, यह भी तो सरकार ही का दोष है। इस दोष को हटाना भी तो सरकार का कर्तव्य है। हर समय जनता आंदोलन करे और फिर सरकार कानून बनाए यह कोई तरिका नहीं है।
     सम्रति में सत्ता मंत्रालय में केंद्रित हुई है। जब तक सत्ता केंद्रित है, तब तक भ्रष्टाचार को रोकने में सही सफलता नही मिलेगी। इस लिये स्व. राजीव गांधीजी ने 73 वें और 74 वें संविधान संशोधन की बात की थी। गांव में ग्रामसभा, शहर में नगर परिषद, नगर पालिका, महापालिका में वार्ड सभा को और मोहल्ला सभा को पुरे अधिकार देना जरुरी है। विकास कार्य के लिये जो पैसा गांव और शहरो में जाता है उसे खर्च करते समय ग्रामसभा, वार्ड सभा, मोहल्ला सभा की अनुमति ले कर ही खर्च होना जरुरी है। 26 जनवरी 1950 में जनता देश की मालिक बन गई है, सरकारी तिजोरी में जमा होनेवाला पैसा जनता का है, इस लिये जरुरी है कि जनता का पैसा कहाँ खर्च हो रहा है इसकी जानकारी जनता को मिलनी चाहिए। जनतंत्र में ग्रामसभा, वार्ड सभा और मौहल्ला सभा की अनुमति से पैसा खर्च होना जरुरी है। उनकी अनुमति के बगैर अपनी मनमर्जी से अगर पैसा खर्च होता हो तो जनता उन ग्रामपंचायत सदस्यों को, महापालिका कार्पोरेटर को बरखास्त कर सकेगी, ऐसे कडे प्रावधान कानून में होंगे तो ही जनता के पैसे खर्च करने में पारदर्शिता आयेगी और योजनाओं में पनपे भ्रष्टाचार को रोक थाम लगेगी। आज मंत्रालय में मंत्री, जनप्रतिनिधी, अधिकारियों ने सत्ता को अपने ही हाथ में केंद्रित रखने के कारण योजनाओं में भ्रष्टाचार बढता ही गया है। सत्ता का विकेंद्रिकरण होना बहुत जरुरी है।
        जनता कई सालों से सत्ता में विकेंद्रिकरण की माँग कर रही है, लेकिन अगर आपकी पार्टी की सरकार सत्ता विकेंद्रित करने के लिये तैयार नहीं है, तो कैसे भ्रष्टाचार को रोकथाम लगेगी?  आपने भ्रष्टाचार से लडने की बात की है। भ्रष्टाचार के विरोध में वह लडाई सत्ता को विकेंद्रित किये बिना कैसे लडेंगे ?
        आपकी सरकार को अगर भ्रष्टाचार को मिटाने की मन से इच्छा है तो सशक्त जनलोकपाल के साथ साथ राईट टू रिजेक्ट, ग्रामसभा, वार्डसभा, मोहल्ला सभा को पुरे अधिकार देने वाला सशक्त कानून बनाना होगा। दफ्तर दिरंगाई को हटाना हो तो एक टेबल का पेपर सात दिन के अंदर अगले टेबल पर जाना चाहिये। यदि ऐसा हो तो रिश्वत देने की नौबत ही नहीं आयेगी। जनता की सनद बनाई जाये। ऐसे कडे कानून अगर बन जाएं और उन कानूनों पर सही अमल हो, कानून का पालन ना करने वालों को कडी सजा का प्रावधान हो तो ""भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना साकार होगा ''। कडे कानून बनाये जाएं इसलिए हम देढ साल तक देश के हर राज्य में जा कर जनता को जगाने का प्रयास करेंगे। जनता संगठित हो कर अहिंसा के मार्ग से देश भर यदि आंदोलन करती है तो यह भी जनतंत्र, लोकशाही को मजबूत करने का ही मार्ग है। देश में लोकशिक्षा, लोकजागृति के लिये हम बिहार के महात्मा गांधी मैदान, पटना से, जहां से महात्मा गांधीजी ने, जयप्रकाश नारायण जी ने आंदोलन की शुरुआत की थी, वहीं से शुरुआत कर रहे हैं। हमारा आंदोलन किसी पक्ष-पार्टी के विरोध में नहीं है। जनतंत्र की मजबूती के लिये संविधान ने जनता को जो अधिकार दिये है उनमें आंदोलन करने का भी अधिकार है। यह आंदोलन उसीका एक हिस्सा है। आप पार्टी के माध्यम से और हम लोग आंदोलन के माध्यमसे जनतंत्र को मजबूत करेंगे, आम आदमी को आधार देंगे ता कि जीना आसान हो। साथ ही साथ अमीर गरीब में फासला कम हो, आर्थिक विषमता कम हो और जनता को प्रजातंत्र का अनुभव हो।
धन्यवाद।

भवदीय,
               
कि. बा. उपनाम अण्णा हजारे.
रालेगणसिद्धी.
22 जनवरी 2013.

रामदेव के निशाने पर सोनिया और मनमोहन

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दिल्ली :  बाबा रामदेव ने दिल्ली गैंगरेप मामले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि ये देश इन दोनों के इस मुद्दे पर मौन टूटने का इन्तजार कर रहा है।

दिव्य योग मंदिर में संवाददाता सम्मेलन में रामदेव ने आरोप लगाया कि विपक्ष अपना पक्ष स्पष्ट कर चुका है, लेकिन सत्ता पक्ष की चुप्पी सोचने पर मजबूर करती है कि देश के 260 विधायकों और सांसदों पर रेप के मामले दर्ज हैं। कहीं उन्हें बचाने का प्रयास तो सरकार की चुप्पी में नहीं छुपा है।

रामदेव ने दावा किया कि आजादी के बाद से अब तक किसी बड़े आदमी के परिवार में इस तरह की घटना नहीं हुई है और यदि होती तो शायद तुरंत कानून बन जाता। उन्होंने अपने ऊपर लग रहे आरोपों का स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि मैं दिल्ली में आन्दोलन हाईजैक करने नहीं गया था, क्योंकि छात्रों के साथ कोई राजनैतिक पार्टी नहीं थी, तो मैं अपने साथ 100 बसें और सैकड़ों अन्य वाहन से आन्दोलनकारियों को समर्थन देने गया था।

रामदेव ने आन्दोलनकारियों से पुलिस के व्यवहार की निंदा की तथा बलात्कारियों के लिये फांसी की सजा की मांग और फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई की मांग की। उन्होंने फिल्मों और टीवी सीरियल पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की, जिसमें बलात्कार की घटना को सस्ते मनोरंजन के लिए परोसा जाता है।

11 हजार करोड़ रुपए के सोनिया के दामाद

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नई दिल्ली। अरबों की अकूत संपत्ति के मालिक काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने कब और कहां से यह सब हासिल किया इसको लेकर उनपर सवाल उठाए जा रहे हैं। सेलिब्रेटी नेटवर्थ नाम की वेबसाइट के मुताबिक रॉबर्ट के पास 2.1 अरब डॉलर (11 हजार करोड़ रुपए) की अकूत संपत्ति है। यह अकूत संपत्ति उन्होंने प्रियंका गांधी से शादी के बाद हासिल की है। 

इसका अर्थ यह माना जा सकता है कि उन्होंने इस संपत्ति को हासिल करने में कहीं न कहीं देश की शीर्ष राजनीतिज्ञ सोनिया गांधी के रुतबे का इस्तेमाल किया होगा। वर्ष 1991 में रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गाधी की मुलाकात दिल्ली में एक कॉमन फ्रेंड के घर पर हुई थी। बाद में दोनों की नजदीकियां बढ़ीं और आखिरकार दोनों ने 18 फरवरी, 1997 को शादी कर ली। इसके बाद उनकी संपत्ति में लगातार बढ़ोतरी होती आ रही है।

हालांकि उन्होंने कई बार इस बात को कहा है कि वह कभी प्रियंका गांधी या सोनिया गांधी के कामों में कोई हस्तक्षेप नहीं करते हैं। उनका ध्यान केवल अपने बिजनेस पर है। उनकी आर्टेक्स के नाम से एक कंपनी है जो ज्वैलरी एक्सपोर्ट में जाना माना नाम है, वह इसको ही आगे बढ़ाने की चाह रखते हैं।

रॉबर्ट और प्रियंका के दो बच्चे हैं जिनका नाम रेहान और मिराया है। रॉबर्ट पर हाल ही में अरविंद केजरीवाल ने राजस्थान और हरियाणा में काफी जमीन खरीदने का खुलासा किया था, जो उनकी विभिन्न कंपनियों के नामों पर दर्ज है। इसके अलावा दिल्ली स्थित एक होटल में उनकी साझेदारी, एक एयरलाइंस कंपनी में उनकी साझेदारी भी सामने आई है। इन सभी के अलावा केजरीवाल ने देश की प्रतिष्ठित रियल स्टेट की कंपनी डीएलएफ द्वारा रॉबर्ट को ब्याज मुक्त कर्ज देने का भी आरोप लगाया है।

इस सभी के अलावा स्काईलाइट हास्पिटेलिटी प्रा. लिमिटेड कंपनी में वह अपनी मां के साझेदार हैं। इनके यूनिटेक कंपनी में भी बीस प्रतिशत शेयर हैं जिसका नाम टूजी मामले में सामने आया था। बाइक्स और कारों के शौकीन रॉबर्ट कई विदेशी कार और बाइक्स के मालिक हैं। वहीं फिटनेस और फैशन की दुनिया में भी उनका काफी बोलबाला है। दिसंबर 2011 में एक अंग्रेजी अखबार ने बेस्ट ड्रेस्ड मैन का खिताब से नवाजा था।

रॉबर्ट का परिवार विवादों के घेरे से अछूता नहीं रहा है। रॉबर्ट के पिता राजेंद्र की रॉबर्ट और प्रियंका की शादी से नाराजगी जगजाहिर रही है। वहीं उनकी मौत भी एक रहस्य बन कर रह गई। हालाकि परिवारवालों ने इसको हार्ट अटैक से हुई मौत बताया लेकिन खबरें यह भी आई कि उन्होंने 2009 में आत्महत्या की थी। रॉबर्ट के भाई रिचर्ड ने 2003 में आत्महत्या की थी। वहीं बहन मिशेल एक कार दुर्घटना का शिकार हुई।

इस वर्ष उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में रॉबर्ट ने काग्रेस का चुनाव प्रचार भी किया था। इस दौरान वह अपनी बाइक रैली को लेकर चर्चा में आए थे जब एक आईएएस अधिकारी का उनकी रैली रुकवाने की सजा के तौर पर तबादला कर दिया गया था। इससे पहले वह अपने पिता के साथ हुए विवाद के चलते चर्चा में आए थे। वर्ष 2001 में उन्होंने पिता और भाई के खिलाफ एक नोटिस जारी किया था। तब पिता ने उन पर मानहानि का केस दर्ज कराया था।

कुछ और कंपनिया भी रॉबर्ट के नाम दर्ज हैं, इनमें ब्लू ब्लीज ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, नार्थ इंडिया आईटी पार्क प्राइवेट लिमिटेड, रियल अर्थ स्टेट प्राइवेट लिमिटेड और स्काई लाइट रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल हैं। इंडिया टूडे ने भी उनके साथ पार्टनरशिप और कारोबार में लेनदेन का खुलासा किया था।

सोनिया गांधी ने दिए समय पूर्व चुनाव के संकेत


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नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को अपने नेतृत्व की जबर्दस्त बानगी पेश करके जहां विपक्ष को हैरत में डाल दिया, वहीं पार्टी कार्यकर्ताओंं में नई जान फूंक दी। 
जहां पार्टी की संसदीय दल की बैठक में सोनिया ने बीजेपी पर अपने आक्रामक तेवर दिखाए, वहीं लोकसभा में सहयोगी दल एसपी के नेता मुलायम सिंह की बेंच पर जाकर उनसे गुफ्तगू करके बीजेपी के खिलाफ नए समीकरण बनाने के संकेत दिए। 

समय पूर्व चुनाव : सोनिया ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी को तैयार रहने की ताकीद करते हुए संकेत दिए कि चुनाव समय पूर्व भी हो सकते हैं। 

राहुल नहीं, सोनिया : यूपीए-2 की सरकार बनने के साथ ही कांग्रेस की मुसीबतें भी बढ़ने लगी थीं। कई मंत्रियों पर आरोप लगने के बाद जब बीजेपी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी इस्तीफा मांगना शुरू कर दिया तो ऐसे में सोनिया ने ही मोर्चा संभाला। कांग्रेस में बहुत सारे लोगों को लगता था कि ऐसे मुश्किल वक्त में राहुल गांधी को अपनी नेतृत्व क्षमता दिखाने की जरूरत है, मगर उनके बदले सोनिया ने कमान संभाल कर दिखा दिया कि अभी पार्टी को उनकी बहुत जरूरत है। 

मंगलवार को संसद में सोनिया के तीखे तेवरों के बाद उनकी पुरानी निकट सहयोगी रहीं अंबिका सोनी ने बीजेपी पर हमला बोला। इससे पहले सोनिया, आडवाणी को सदन में अपने शब्द वापस लेने पर मजबूर कर चुकी हैं। 

मुलायम से गुफ्तगू : सुबह सदन शुरू होने से पहले सोनिया अचानक मुलायम सिंह की सीट पर जा पहुंचीं। 'नमस्ते' करके सोनिया ने उनसे कुछ देर बातें कीं। फिर 'शुक्रिया' कहके वापस अपने स्थान पर आ गईं। बाद में जब संवाददाताओं ने मुलायम से इस बारे में पूछा तो वह जवाब देने से बचते रहे। 


नया विवाद : लेकिन उनकी पार्टी के प्रवक्ता मोहन सिंह ने यह कहकर एक नया विवाद छेड़ दिया कि कांग्रेसी ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को हटाने की कोशिशें कर रहे हैं। कांग्रेसी मनमोहन सिंह के बचाव में आगे नहीं आ रहे हैं। लेकिन कांग्रेस की तरफ से इस बयान को कल्पना की उपज बताया गया। 



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