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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

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केजरीवाल चाहते थे अन्ना का बलिदान : अग्निवेश

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नई दिल्ली - टीम अन्ना के पूर्व सहयोगी स्वामी अग्निवेश के एक सनसनीखेज बयान ने खलबली मचा दी है। उन्होंने इंडिया न्यूज़ चैनल पर एक इंटरव्यू में कहा कि अरविंद केजरीवाल चाहते थे कि अनशन के दौरान अन्ना हजारे की मौत हो जाए और इसका फायदा आंदोलन को पहुंचे। अग्निवेश ने कहा कि अरविंद ने उनसे कहा था कि अन्ना का बलिदान आंदोलन के लिए अच्छा रहेगा।

अग्निवेश के इस दावे पर सवाल उठाने वालों की भी कमी नहीं है। यह जगजाहिर है कि केजरीवाल और अग्निवेश में मतभेद आंदोलन के शुरुआती दिनों से ही हैं।

केजरीवाल का जवाबः उधर, अरविंद केजरीवाल ने स्वामी अग्निवेश के आरोपों को हास्यास्पद करार दिया है। केजरीवाल ने ट्विटर कर कहा, 'कुछ मीडिया वाले स्वामी अग्निवेश के हवाले से कह रहे हैं कि मैं अन्ना को 'मारना' चाहता था। क्या इससे हास्यास्पद चीज कुछ और हो सकती है। क्या स्वामी अग्निवेश ने कुछ सबूत दिए हैं?, नहीं। तो फिर क्या उनसे यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि वे इस बारे में कुछ सबूत दें? अन्ना पर एक नहीं 100 जिंदगी कुर्बान।'

क्या-क्या कहा अग्निवेश नेः अग्निवेश के मुताबिक अप्रैल 2011 में जब जंतर-मंतर पर जन लोकपाल आंदोलन शुरू हुआ तो वह अन्ना को आमरण अनशन पर बैठाने के खिलाफ थे। अग्निवेश ने कहा, 'जब मुझे पता चला कि अन्ना आमरण अनशन करने वाले हैं, तो मैंने अरविंद से सवाल किया था कि वह अन्ना जैसे बुजुर्ग को आमरण अनशन पर क्यों बैठा रहे हैं? इस पर अरविंद ने कहा कि उनका बलिदान हो जाता है तो इससे क्रांति होगी। वह मर जाएंगे तो कोई बात नहीं, यह आंदोलन के लिए अच्छा रहेगा।'

अग्निवेश के मुताबिक जंतर-मंतर पर अनशन के दौरान सरकार द्वारा सारी मांगें मंजूर करने के बाद भी अरविंद केजरीवाल अन्ना को पांच-सात दिन और अनशन करने के लिए उकसाते रहे। उन्होंने कहा, 'आंदोलन की शुरुआत से ही केजरीवाल बहुत बड़ी महत्वकांक्षा लेकर चल रहे थे। उन्हें लग रहा था कि अन्ना के कंधे पर रखकर ही वह अपनी बंदूक चला सकते हैं। केजरीवाल को लगता था कि अन्ना की छवि का फायदा उठाकर वह लोगों के बीच अपनी बड़ी इमेज बना सकते हैं। इसी के चलते उन्होंने अन्ना को पुणे से लाकर जंतर-मंतर पर बिठाया।'

अग्निवेश के मुताबिक अरविंद केजरीवाल चाहते थे कि अन्ना अपना आंदोलन जारी रखें। आंदोलन के दौरान सरकार द्वारा सारी मांगें मान लेने के बावजूद अन्ना अरविंद के उकसावे पर अनशन पर डटे रहे। उन्होंने जब अरविंद ने बात की तो उन्होंने कहा कि अन्ना अनशन नहीं तोड़ेंगे अभी पांच-सात दिन अनशन और जारी रखेंगे। इस बात का तब उन्हें बहुत बुरा लगा था। उन्हें तब लगा कि यह अनशन किसी और मकसद से करवाया जा रहा है। अग्निवेश के मुताबिक किरण बेदी को भी यह बात बुरी लगी थी।

स्वामी अग्निवेश ने कहा कि उन्होंने इसके बाद टीम अन्ना के सदस्य शांति भूषण और प्रशांत भूषण से बात की। वह भी इस बात पर राजी थे कि अब अन्ना को अनशन तोड़ देना चाहिए। उन्होंने अन्ना को जब इस बारे में समझाया तो वह नहीं माने। इस पर शांति भूषण अन्ना पर बरस पड़े। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पोल-पट्टी खोलने की धमकी के बाद ही अन्ना अनशन तोड़ने पर राजी हुए थे।

आंदोलन से शुरुआत से जुड़े अरविंद गौड़ ने अग्निवेश के आरोप को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा सोचना भी पाप है कि कोई अन्ना को नुकसान पहुंचाना चाहता था। अगर कोई ऐसा कह रहा है तो यह गलतबयानी है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान जो भी हुआ वह स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। सरकार के रवैये के हिसाब से ही फैसले लिए गए और इस बात पर विचार किया गया कि अनशन कब और कितने दिनों का हो। उनका कहना एकदम गलत है कि कोई अन्ना जी को मारना चाहता था। अग्निवेश का बयान पूरी तरह से बेबुनियाद है।

इस प्रकरण पर अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन कोई भी जवाब नहीं मिला। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस तरह की बातों से अरविंद केजरीवाल के साथ ही अन्ना से जुड़े कई लोगों को असहजता का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे सवालों का जवाब देते भी नहीं बन रहा है।केजरीवाल के करीबी सूत्रों का कहना है कि यह अग्निवेश की कुंठा है, जो इस तरह से निकल रही है।

अन्ना हमें हमेशा से प्रेरणा देते रहे हैं, यह सोचना भी गुनाह है। वैसे अगर अग्निवेश की बात करें तो आंदोलन के शुरुआती दिनों में ही उन्हें आंदोलन के लिए नुकसानदायक बता कर टीम अन्ना से बाहर कर दिया गया था। उन पर अन्ना की टीम में जासूसी कर खबरें सरकार तक पहुंचाने का इल्जाम लगा। उनकी एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई, जिसमें उन्हें किसी संदिग्ध से बात करते दिखाया गया। तब भी अग्निवेश ने केजरीवाल पर तानाशाही के इल्जाम लगाए थे और उन्हें अन्ना हजारे के लिए नुकसानदायक बताया था।


दो फरवरी को दिल्ली की सीएम के खिलाफ होगा खुलासा : केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे बिजली की दरों में बढोत्तरी के मामले में दिल्ली सरकार और एक निजी कंपनी के बीच हुए घपले के बारे में एक बड़ा खुलासा 2 फरवरी को करेगें।

केजरीवाल ने राजस्थान के कोटा में पत्रकार वार्ता में कहा कि यह एक बड़ा घपला है और सफाई आम जनता के सामने आनी ही चाहिए ताकि राजनीति में स्वच्छ छवि का दावा करने वाले राजनेताओं का असली चेहरा उजागर हो सके।

केजरीवाल मांगरोल मे नगरपालिका अध्यक्ष अशोक जैन के बुलावे पर यहां आए हैं। जैन को नगरपालिका चुनाव मे नई व्यवस्था राइट टू रिकॉल के कारण दुबारा जनादेश का सामना करना पड़ा था। जिसमें वह विजयी रहे थे।

नितिन गडकरी के इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, जांच भी हो:केजरीवाल

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नई दिल्ली - आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल का भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ पोल खोलने का अभियान इन दिनों नरन पड़ गया हो पर नितिन गडकरी के इस्तीफे के रूप में केजरीवाल को पहली सफलता हासिल हो गई है। केजरीवाल के बड़े खुलासों का ही असर है कि  गडकरी को न केवल दोबारा भाजपा अध्यक्ष बनने की दौड़ से बाहर हुए बल्कि लोगों की आलोचनों का शिकार भी बनना पड़ा।

केजरीवाल ने ही सबसे पहले  नितिन गडकरी के स्वामित्व में रही पूर्ति समूह का कच्चा-चिट्ठा लोगों को सामने खोला था। केजरीवाल ने गडकरी और महाराष्ट्र सरकार में मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया था। गडकरी पर लग रहे आरोपों और उनके खिलाफ आयकर विभाग की सक्रियता के बावजूद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अध्यक्ष पद पर उनकी दावेदारी को समर्थन देता रहा, जबकि भाजपा के कई नेता उनके खिलाफ खुलकर खड़े हो गए थे।

अरविंद केजरीवाल अन्ना हजारे और कुमार विश्वास के विरुद्ध कोर्ट में शिकायत


देहरादून - दिल्ली से प्रकाशित किताब 'लोकपाल फैक्ट एंड आरग्यूमेंट' में संविधान के विरुद्ध टिप्पणी के मामले में समाजसेवी अन्ना हजारे और उनके पूर्व करीबी अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास के खिलाफ देहरादून स्थित सीजेएम अदालत में शिकायत की गई है। दून के पूर्व सब-रजिस्ट्रार और वर्तमान में वरिष्ठ अधिवक्ता रूप नारायण सोनकर की तरफ से दाखिल शिकायत का संज्ञान लेते हुए अदालत ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। सोनकर ने हजारे की टिप्पणी को संविधान की अवमानना बताया है। हालांकि, अभी अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखा है।

बुधवार को वरिष्ठ अधिवक्ता रूप नारायण सोनकर की तरफ से सीजेएम कोर्ट (मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी) में एक शिकायत की गई। शिकायत में सोनकर ने बताया है कि उन्होंने पिछले दिनों 'लोकपाल फैक्ट एंड आरग्यूमेंट' नाम की एक पुस्तक पढ़ी। यह पुस्तक परसा वेंटकेश्वर रॉव (जेआर) की लिखी हुई है व ओखला नई दिल्ली स्थित हरानंद पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित की गई है। सोनकर के मुताबिक, पुस्तक के पेज नंबर-20 पर समाजसेवी अन्ना हजारे द्वारा संविधान के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। सोनकर के मुताबिक, हजारे के शब्दों में लिखा है कि 'भ्रष्टाचार हटाने के मार्ग में यदि संविधान आड़े आता है तो ऐसे संविधान को फेंक देना चाहिए।' इस पुस्तक में हजारे के पूर्व करीबी अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास (वर्तमान में आम आदमी पार्टी के सदस्य) के भी बयान हैं। ऐसे में सोनकर ने हजारे समेत केजरीवाल व कुमार के विरुद्ध अदालत से कार्रवाई की अपील की है। सोनकर ने इस मामले में पटेलनगर थाने में भी शिकायत की थी, मगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। सोनकर की शिकायत का संज्ञान लेते हुए सीजेएम कोर्ट ने पटेलनगर थाना पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, मुकदमा दर्ज करने को लेकर कोर्ट ने अपना फैसला अभी सुरक्षित रखा है।

17 भारतीय बंधकों पर केजरीवाल ने मनमोहन को लिखा खत

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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने सोमाली समुद्री लूटेरों द्वारा 17 भारतीय नाविकों को 9 महीने से बंधक बनाने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखी है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को लिखे खत में कहा है कि हमारी पार्टी भारतीय नाविकों को प्रति गहरी संवेदना प्रकट करती है। खत में कहा गया है कि 17 भारतीयों को इस साल मार्च से ही सोमाली समुद्री लूटेरों बंधक बना रखा है। 

आखिर सरकार 9 महीने बाद भी इन बंधकों को रिहा कराने के लिए कुछ क्यों नहीं कर रही है? बंधकों के परिवार वाले बेहद परेशान हैं। वे सरकार की तरफ से कोई कदम नहीं उठाए जाने से काफी निराश हैं। इन पीड़ित परिवार वालों के पास फिलहाल कोई विकल्प नहीं है। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से पूछा है कि क्या ये आम आदमी हैं इसलिए सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है? 


अरविंद केजरीवाल ने खत में लिखा है इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी सोमाली समुद्री लूटेरों ने भारतीय नाविकों के साथ ऐसा किया है। आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री से इस मामले में सीधा हस्तक्षेप करने की मांग की है।


सनी लियोन और केजरीवाल सर्च में सबसे आगे : गूगल/याहू


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नई दिल्ली:  सनी लियोन को लोग सबसे ज्यादा सर्च करते हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे, ऐसा व‌र्ल्ड की सबसे बड़ी सर्च इंजन कंपनी गूगल का कहना है। गूगल ने बताया वर्ष 2012 में भारत में सबसे ज्यादा लोगों ने सनी लियोन को सर्च किया है। इसके अलावा अरविंद केजरीवाल सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहें। याहू का कहना है कि इस साल सबसे ज्यादा खबरों की सुर्खियां बनाने वाले में अरविंद केजरीवाल सबसे टॉप पर रहे।

जिस्म 2 से बॉलीवुड में कदम रखने वाली सनी पहले नंबर पर रही। दूसरे स्थान पर दिवंगत राजेश खन्ना को लोगों ने सर्च किया और तीसरा स्थान पर अपने बयानों से विवादों में रही पूनम पांडे को सर्च किया गया। इनके अलावा अपनी पहली ही फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर में मादक अदाकारी से छा जाने वाली आलिया भट्ट चौथे, विवादास्पद धर्मगुरु निर्मल बाबा पांचवें, अमेरिका की वयस्कों की मशहूर पत्रिका प्लेब्वॉय के लिए नग्न तस्वीरें खिंचवाकर चर्चा में आई शर्लिन चोपड़ा छठे स्थान पर रहीं।

इसी तरह से दिवंगत फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा सातवें, हाल ही में बेबो से शादी रचाने वाले पटौदी के नवाब अभिनेता सैफ अली खान आठवें, फिल्म कॉकटेल से बॉलीवुड में कदम रखने वाली अभिनेत्री डायना पेंटी नौवें तथा महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत विलासराव देशमुख भारत में सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले लोगों में 10वें स्थान पर रहे।

गूगल ने कहा कि वर्ष 2012 में फिल्मों की श्रेणी के तहत भारत में एक था टाइगर को सबसे ज्यादा सर्च किया गया। इसके बाद राउडी राठौर तथा तीसरे नंबर पर जन्नत 2 रहीं।

गन्ना किसान आंदोलन : केजरीवाल और अन्ना का समर्थन


गन्ने की सियासत ऐसी गरमाई है कि सांगली का संग्राम अब महाराष्ट्र की महाभारत बन गया है. पुलिस की पकड़ में किसान नेता राजू शेट्टी और शरद पवार के शेट्टी पर आरोप. अन्ना कहते हैं कि सरकार किसानों का हित नहीं चाहती और बुधवार को शिवसेना इस मुद्दे पर राज्य के 3 शहरों में बंद बुला रही है.
किसानों ने गन्ने की वाज़िब क़ीमत मांगी थी. पुलिस ने गोली दाग दी. अपने पसीने से मिठास के दाने उगाने वाला किसानों ने पुलिसवालों को अपना पहरेदार माना था. लेकिन एक गोली सीधे चंद्रकांत नलावड़े के सीने में धंस गई. इस कातिल गोली के बाद अब सियासत के गोले दागने का सिलसिला शुरू है.

किसान चंद्रकांत के अंतिम संस्कार के लिए तैयार न थे तो सांगली के पालक मंत्री और महाराष्ट्र के पुनर्वास मंत्री पतंगराव कदम मजिस्ट्रेटी जांच का मरहम लगाने पहुंचे. पतंगराव कदम ने कहा, 'हमने चंद्रकांत नलावड़े के परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी ले ली है. जल्द ही उन्हें मुआवजा मिल जाएगा. हम मजिस्ट्रेट के जरिए इसकी जांच कराएंगे. ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसी स्थिति में हम उनका साथ नहीं छोड़ रहे हैं.'

किसानों ने पुलिस के संगीनों के साये में चंद्रकांत नलावड़े का अंतिम संस्कार तो कर दिया लेकिन वो गन्ने के दाम पर समझौते के लिए तैयार नहीं हैं. दरअसल हतकनंगले के सांसद और शेतकरी किसान संगठन के प्रमूख राजू शेट्टी की गिरफ्तारी से किसान और गुस्से में हैं.

सतारा से लेकर कोल्हापुर और सांगली तक किसानों का आंदोलन इतनी तेज़ी से बढ़ रहा है कि एनसीपी के मुखिया शरद पवार को अपनी ज़मीन खिसकने की चिंता सताने लगी है. इसीलिए वो किसानों के क्रोध के लिए राजू शेट्टी को कोस रहे हैं.

शरद पवार ने कहा, 'अगर राजू शेट्टी को वाकई में किसानों की चिंता है तो पहले अपने इलाके के कारखानों को बंद कवाए और बाद में दूसरे के इलाकों में जाए. खुद की दुकान चालू रखते हो और दूसरे की दुकान बंद करवाते हो ये कहां से ठीक है.'

शरद पवार की इस दुकानदारी पर मचे दंगल में कूदने के लिए अब दिल्ली से भी खिलाड़ी कूच करने वाले हैं. अरविंद केजरीवाल यरवदा जेल में बंद राजू शेट्टी से मिलने पुणे पहुंचने वाले हैं तो अन्ना हजारे ने भी राजू शेट्टी के समर्थन का एलान कर दिया है.

किसान, केजरीवाल और अन्ना के इस जुटान पर महाराष्ट्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की राजनीति करने वालों के कान खड़े हो गए हैं. इसलिए विपक्ष के नेता एकनाथ खडसे अलग से खम ठोक रहे हैं.

राजू शेट्टी गन्ने की कीमत बढ़ाने के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. किसान भी उनके साथ जुड़ते जा रहे हैं. इससे चीनी मिल चलाने वाले एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं को अपनी सियासत फीकी होने की फिक्र सता रही है क्योंकि किसान मुनाफे की मिठास में अपने पसीने का हिस्सा लिए बगैर पीछे हटने को तैयार नहीं है.

केजरीवाल विदेशी पूंजीपतियों के एजेंट : नरेंद्र मोदी

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भागलपुर : अरविंद केजरीवाल ढकोसला कर रहे हैं। वे विदेशी पूंजीपतियों के एजेंट हैं। अगर केजरीवाल भ्रष्टाचार के खिलाफ होते तो वे अन्ना हजारे के साथ होते। चूंकि केजरीवाल को पूंजीपति चला रहे हैं इसीलिए उन्होंने अन्ना का साथ छोड़ दिया है। ये बातें सूबे के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने सोमवार को कहीं। वे सोमवार को भागलपुर के परिसदन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। सिंह ने ये बातें तब कहीं जब पत्रकारों ने उनसे केजरीवाल द्वारा अधिकार यात्रा में हुए खर्च का हिसाब मांगने की बाबत सवाल पूछा। नरेंद्र ने खुद को अन्ना का समर्थक बताया।

इसके पूर्व कृषि मंत्री ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कोर नेटवर्क की बैठक की। बैठक में प्रत्येक 250 की आबादी पर 741 सड़कों के निर्माण को हरी झंडी दी गई। कुल 1251.67 किलोमीटर सडकेंबनेंगी। सिंह ने कहा, सड़क नेटवर्क से जिले के छोटे-छोटे गांव जुड़ेंगे। उन गांवों तक कोर नेटवर्क तैयार किया गया है जहां सड़कें नहीं हैं। बैठक में जिन सड़कों को स्वीकृति दी गई उनका मामला कैबिनेट में पेश किया जाएगा। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद ही निर्माण होगा। सिंह ने उम्मीद जताई, अगले वित्त वर्ष 2013-14 में इन सड़कों का निर्माण होगा। तीन वर्षों में सभी सड़कें बन जाएंगी। इसके बाद उन गांवों की सड़कों को तैयार कराया जाएगा जहां आबादी 250 से कम है। इन सड़कों का निर्माण प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना से कराया जाएगा। ये सड़कें 12 फीट चौड़ी होंगी। सड़कों की सूची विधायकों ने दी है। भविष्य में इसमें और सड़कों के जुड़ने की संभावना है।

बैठक में विधायक सदानंद सिंह, अमन कुमार, महापौर दीपक कुमार भुवानिया, जदयू के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत मंडल, भाजपा के जिला अध्यक्ष नभय कुमार चौधरी, डीडीसी गजानन मिश्र, विकास शाखा के प्रभारी रवींद्र कुमार भी मौजूद थे।

DERC का आदेश सार्वजनिक करेंगे केजरीवाल


नई दिल्ली । सामाजिक कार्यकर्ता से राजनेता बने अरविंद केजरीवाल को दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) ने बिजली की कीमत घटाने की सिफारशि से जुड़े दस्तावेज मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। केजरीवाल की आरटीआई अर्जी पर विचार विमर्श के दौरान आयोग ने केजरीवाल को आने वाले कुछ दिनों में उक्त सिफारशि की प्रति देने पर रजामंदी दे दी है। सोमवार को आयोग के सूचना अधिकारी के समक्ष केजरीवाल ने अपना पक्ष रखा। इसके बाद उन्होंने बताया कि आयोग से उक्त सिफारशि की प्रति मिलने पर वह इसे सार्वजनिक करेंगे।


केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी के पास इस सिफारशि की प्रति मौजूद है लेकिन वह इसे सार्वजनिक नहीं कर रही है। उनका आरोप है कि दिल्ली सरकार ने पूर्व सिफारशि को नजरंदाज कर बिजली की कीमत बढ़ाई है और इस मुद्दे पर कांग्रेस भाजपा मिले हुए हैं।

अहंकारी हैं केजरीवाल, उनकी प्रवृत्ति हिटलर के समान: दिग्विजय

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कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अरविंद केजरीवाल पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वह अपने हितों की पूर्ति करने वाले महत्वाकांक्षी और अहंकार से भरे व्यक्ति हैं। हिटलर जैसी उनकी प्रवृति है।

केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि वह शनिवार को भी केजरीवाल से सवाल करेंगे और पूछेंगे कि क्या वह आरएसएस, अन्ना हजारे और रामदेव की तरह उनसे पूछे गए असहज सवालों को खारिज करेंगे।

केजरीवाल को लिखे पत्र में सिंह ने कहा, 'आपके पूर्व सहयोगी वाई. पी. सिंह ने आपको हिटलर कहा मैं आपमें इसके लक्षण देख सकता हूं। मेरे विचार में आपकी सार्वजनिक मुद्दों पर संघर्ष करने वाले व्यक्ति की छवि अब बदल गई है। अब आपकी छवि अपने हितों की पूर्ति करने वाले महत्वाकांक्षी और अहंकारी व्यक्ति की बन गई है जो लोकतंत्र का सम्मान नहीं करता।'

दिग्विजय सिंह ने कहा, 'आप आरटीआई आंदोलन में अपनी गुरु अरुणा रॉय को भी साथ नहीं ले सके। इसके बाद आप किरण बेदी से अलग हो गए और फिर अन्ना हजारे के साथ भी ऐसा ही किया।' कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि केजरीवाल चाहते थे कि उन्हें राष्ट्रीय सलाहकार परिषद(एनसीए) का सदस्य मनोनित किया जाए।

उन्होंने कहा, "आप एनएसी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलना चाहते थे और सदस्य बनाए जाने का अनुरोध किया था। मैंने आपके नाम का प्रस्ताव नहीं किया। सोनिया ने अरुणा रॉय को लिया।"

किसानों की लाश पर गडकरी का बिजनेस: केजरीवाल

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नयी दिल्‍ली : इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शन के नेता और समाजसेवी अरविंद केजरीवाल ने भाजपा अध्‍यक्ष नितिन गडकरी को बेपर्दा करते हुए कहा कि 'किसानों की लाशों पर गडकरी ने अपना बिजनेस अंपयार खड़ा किया है।' दिल्‍ली के कांस्‍टीट्यूशन क्‍लब में केजरीवाल ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि गडकरी किसके ह‍क में काम कर रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि महराष्‍ट्र में 71 हजार करोड रुपये का घोटाला सामने आया है। भाजपा विपक्ष में होने के बावजूद भी कांग्रेस-एनसीपी की साझा सरकार को कुछ नहीं कहा। केजरीवाल अपने बगल में बैठी अंजली दामनिया के बारे में बताते हुए कहा कि वो पेशे से एक डॉक्‍टर है और इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शन की कार्यकर्ता भी हैं। दामनिया के परिचय के बाद केजरीवाल ने गडकरी पर एक के बाद एक मिसाइलें दागनी शुरु कर दी।

केजरीवाल ने कहा कि किसानों के साथ हुए अत्‍याचारों और सिचाई विभाग में हुए गड़बड़झाले के सबूत एकत्र करने के बाद दामनिया गडकरी के पास गईं थी। केजरीवाल ने कहा कि दामनिया यह सोच कर गडकरी के पास गईं थी कि वो विपक्ष पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष है और वो इस मुद्दे को जरुर उठाएंगे। मगर गडकरी ने जो जवाब दिया वो हैरान करने वाला था। केजरीवाल ने कहा कि गडकरी ने दामानिया को जवाब दिया कि "शरद पवार और उनके अच्‍छे संबंध है, चार काम वो मेरा करते हैं और चार काम मैं उनका करता हूं।"

हालांकि मीडिया में यह बात आने के बाद गडकरी ने इसका खंडन किया था और इसे सिरे से नकार दिया था। अपने प्रेस कांफ्रेंस के माध्‍यम से केजरीवाल ने कुछ प्रश्‍न उठाये। केजरीवाल ने कहा कि जब इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शन के कार्यकर्ताओं ने 1 म‍हीने में इस बात की जांच कर ली कि महाराष्‍ट्र के विदर्भ में किसान क्‍यों खुदकुशी कर रहे हैं तो सरकारें क्‍यों नहीं कर रही? जांच एजेंसियां क्या कर रही हैं? अन्ना आंदोलन के दौरान अंजली दमानिया ने आरटीआई दाखिल की जिसके बाद उनको सबूत मिले की 70 हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी किसानों को फायदा नहीं क्यों नहीं मिले? अरविंद ने खुलासा किया कि नागपुर के खुर्सापुर गांव में डैम बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित की गई। इलाके के किसान गजानन रामभावजी घडगे की जमीन अधिग्रहित की गई। 

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जितनी जमीन चाहिए थी उससे ज्यादा जमीन अधिग्रहित की गई।
केजरीवाल ने खुलासा किया कि 4 जून 2005 को बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अजित पवार को चिट्ठी लिखी की उनको 100 एकड़ जमीन चाहिए। अजित पवार ने चार दिन यानि 8 जून को वीआईडीसी को कहा कि गडकरी के प्रस्ताव को 22 जून की बैठक में पेश किया जाए। इस बैठक में नितिन गडकरी की मांग को मंजूरी दे दी गई। हालांकि इसका सिंचाई विभाग ने विरोध किया कि कानून के तहत ऐसा करना संभव नहीं है।

अरविंद ने खुलासा करते हुए कहा कि नितिन गडकरी का बड़ा एंपायर है। उनका इसमें व्यासायिक इंट्रेस्ट हैं। क्या वो महाराष्ट्र के विदर्भा के किसानों के विरोध में है? क्या महाराष्ट्र के अंदर व्यवसाय किसानों की खुदकुशी पर हो रहा है? केजरीवाल ने कहा कि वो एक प्रश्न देश के सामने रखना चाहते हैं कि क्या बीजेपी देश की विपक्षी पार्टी है या बीजेपी सत्ताधारी पार्टियों से मिली हुई है। सवाल उठाते हुए अरविंद ने खुलासा किया कि गडकरी साहब का इंटरेस्ट क्या है। उनके बिजनेस हित क्या महाराष्ट्र के किसानों के हितों से टकरा रहे हैं? महाराष्ट्र के अंदर जो गड़करी के हित हैं उनकी कीमत किसान चुका रहे हैं?

प्रशांत भूषण के खिलाफ CBI जांच का स्वागत: अरविंद केजरीवाल

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इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने सोमवार का कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को हिमाचल प्रदेश में प्रशांत भूषण की संपत्ति को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की जांच करनी चाहिए।

केजरीवाल ने सोमवार को भी केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद पर हमला जारी रखा। जंतर-मंतर पर एकत्र भीड़ में से एक व्यक्ति मंच पर चढ़ गया और उसने कहा कि प्रशांत पर लगे आरोपों की भी जांच होनी चाहिए। केजरीवाल ने कहा कि हम इनकी बात का समर्थन करते हैं और मांग करते हैं कि सरकार प्रशांत भूषण के खिलाफ सीबीआई करें।

गौरतलब है कि कांग्रेस ने हिमाचल में प्रशांत की संपत्ति को लेकर सवाल उठाए हैं। इससे पहले केजरीवाल और उनके सहयोगी सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा द्वारा हरियाणा के गुड़गांव में संपत्ति के अधिग्रहण में भ्रष्टाचार का आरोप लगा चुके हैं।

खुर्शीद के खिलाफ केजरीवाल का अनिश्चितकालीन धरना

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अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद पर अपने गैर सरकारी संगठन में लाखों रुपये का गबन करने का आरोप लगाते हुए उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने एवं गिरफ्तारी की मांग को लेकर शनिवार से अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की घोषणा की।

उधर, लंदन में मौजूद क़ानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने इस मामले पर कहा है कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एक-एककर कांग्रेस के नेताओं को बर्बाद करना चाहते हैं।

खुर्शीद ने कहा कि देश में कुछ थर्ड ग्रेड लोग उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं।

दूसरी ओर, खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद ने इन आरोपों को झूठा बताते हुए केजरीवाल पर राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दा गढ़ने का आरोप मढ़ा। कांग्रेस भी अपने नेता के बचाव में उतर पड़ी। सलमान खुर्शीद इस ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं लुईस परियोजना निदेशक हैं।

केजरीवाल शनिवार को भी संसद मार्ग पर अपने समर्थकों को सम्बोधित कर रहे थे। पुलिस ने प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ते समय केजरीवाल को रोक दिया था।

केजरीवाल ने अपने समर्थकों सहित शुक्रवार को खुर्शीद और उनकी पत्नी के खिलाफ प्रदर्शन किया था और उस दौरान उन्हें 150 समर्थकों सहित हिरासत में ले लिया गया था। केजरीवाल को दिल्ली के बाहर स्थित एक स्टेडियम ले जाया गया, जहां रात को उन्हें रिहा कर दिया गया। लेकिन केजरीवाल और उनके समर्थकों ने जाने से मना कर दिया था।

केजरीवाल शनिवार सुबह इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएएसी) के सदस्यों गोपाल राय एवं मनीष सिसोदिया और राष्ट्रीय विकलांग पार्टी (आरवीपी) के अध्यक्ष केके दीक्षित के साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे।

केजरीवाल ने यहां खुर्शीद के खिलाफ कार्रवाई होने तक थाने के सामने अनिश्चितकालीन धरना देने का निर्णय लिया।

यहां कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि खुर्शीद और उनकी पत्नी ने केंद्र सरकार द्वारा मुहैया कराए गए धन का राज्य सरकार के अधिकारियों का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर गबन किया। यह गबन 10 जिलों में सहायता शिविर के फर्जी हिसाब दिखाकर किए गए, जिन्हें कभी आयोजित नहीं किया गया।

केजरीवाल ने कहा, "हम मांग करते हैं कि खुर्शीद को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और सरकार से बर्खास्त किया जाए। यदि वह मंत्रिमंडल में बने रहते हैं तो वे सारे सबूत नष्ट कर देंगे, जो उनके और उनके परिवार के खिलाफ उपलब्ध हैं।"

केजरीवाल ने कहा कि खुर्शीद की संस्था का खुलासा राष्ट्रीय विकलांग पार्टी के अध्यक्ष के.के. दीक्षित ने किया, जो खुद विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं।

केजरीवाल ने यह भी कहा कि खुर्शीद और उनकी पत्नी पर राज्य सरकार, केंद्र सरकार और नियंक एवं महालेखा परीक्षक ने आरोप लगाया है। इन तीनों संस्थाओं ने जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा विकलांगों के लिए आवंटित धन के गबन की जांच की है।

गबन का आरोप लगाने पर लुईस खुर्शीद ने केजरीवाल एवं एक टीवी चैनल की आलोचना की।

लुईस ने शनिवार को एक अन्य टीवी चैनल से कहा, "हमारे दस्तावेज जांच के लिए खुले हैं। उनके सभी आरोपों का हम प्रतिवाद करते हैं। हमारे पास सभी के बिल हैं और उनके आरोपों के तथ्य एवं आंकड़े झूठे हैं।"

लुईस ने कहा, "उन्हें केवल तीन लोग मिले जिन्होंने कहा कि उन्हें उपकरण नहीं मिले। अगर हमने इतने बड़े पैमाने पर घोटाला किया होता तो क्या उन्हें हजारों लोग नहीं मिलते? हमने 2009 एवं 2010 में 2353 लोगों में वितरित किए और हजारों में से केवल तीन आरोप लगे।"

एक अन्य टीवी चैनल के अनुसार केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय ने लुईस के संगठन जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट को 71.50 लाख रुपये ट्राइ साइकिल एवं सुनने में सहायक उपकरण जरूरतमंदों में वितरित करने के लिए दिए थे। इसके बाद केजरीवाल ने धरना प्रदर्शन शुरू किया।

सलमान की गिरफ्तारी की मांग करने पर केजरीवाल की आलोचना करते हुए लुईस ने कहा, "वह अब सामाजिक कार्यकर्ता नहीं रहे। वह एक राजनीतिक दल चला रहे हैं और वह मुद्दों की तलाश कर रहे हैं। मुझे दुख होता है कि वे विकलांगों का प्रयोग राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं।"

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी ने खुर्शीद के बचाव में कहा, "उनकी छवि बेहद ईमानदार एवं सम्मानित राजनीतिक नेता की छवि है। वित्तीय अनियमितता के आरोप का असर किसी के ऊपर नुकसानदायक होता है। खुर्शीद विदेश में हैं। उन्हें आकर वस्तुस्थिति बताने का मौका देना चाहिए।"

केजरीवाल ने सोनिया गांधी के दामाद पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

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अरविंद केजरीवाल ने प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि वाड्रा ने चार सालों में लगभग 300 करोड़ की प्रॉपर्टी बनाई। उन्होंने कहा कि साल 2007 से 2010 के बीच वाड्रा की संपत्ति 50 लाख से बढ़कर 300 करोड़ रुपए हो गई। वाड्रा की संपत्ति बढ़ाने में डीएलएफ की अहम भूमिका होने की बात भी टीम केजरीवाल ने कही।

शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल ने प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वाड्रा को डीएलएफ ने 65 करोड़ का ब्याज मुक्त लोन दिया। इस बाबत प्रशांत भूषण ने कहा, '2007 में राबर्ट वाड्रा की कंपनियों की कुल पूंजी 50 लाख रुपये थी। इन कंपनियों के पास इनकम का एक मात्र जरिया डीएलएफ से मिला ब्याज मुक्त लोन था। डीएलएफ ने उनको 65 करोड़ रुपये लोन के तौर पर मिले थे। इसके अलावा इन कंपनियों के इनकम का कोई लीगल सोर्स नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन कंपनियों की संपत्ति 2007 से 2010 यानी चार सालों में 50 लाख से बढ़कर 300 करोड़ हो गई।'

उन्होंने कहा, 'रॉबर्ट वाड्रा की संपत्ति का बड़ा हिस्सा डीएलएफ से खरीदा गया है। लेकिन कीमतें बाजार भाव से बहुत कम दिखाई गई हैं। वाड्रा ने गुड़गांव में डीएलएफ से मैग्नोलिया अपार्टमेंट में 7 फ्लैट सिर्फ 5.2 करोड़ में खरीदा जबिक उस वक्त भी एक-एक फ्लैट की कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये थी। इसी तरह गुड़गांव में ही डीएलएफ से खरीदे गए एक दूसरे फ्लैट की कीमत 89 लाख दिखाई गई है जवकि 10 हजार वर्ग फीट के इस फ्लैट की कीमत उस वक्त 20 करोड़ के करीब थी।'

प्रशांत भूषण ने कहा दिल्ली के साकेत स्थित हिल्टन होटेल में भी वाड्रा की 50 फीसदी हिस्सेदारी है और उसकी कीमत सिर्फ 32 करोड़ रुपये दिखाई गई है जबकि उसकी मार्केट प्राइस 150 करोड़ के ऊपर है।

भूषण बोले, 'चार साल में वाड्रा की प्रॉपर्टी का 50 से 300 करोड़ होना कई सवालों को पैदा करता है। उन्होंने पूछा है कि डीएलएफ ने रॉबर्ट वाड्रा को 65 करोड़ का ब्याज मुक्त लोन क्यों दिया? आखिर डीएलएफ अपनी प्रॉपर्टी रॉबर्ट वाड्रा को बाजार भाव से कम पर क्यों बेच रही थी? कहीं ऐसा तो नहीं कि इसके लिए डीएलएफ खुद ही पैसे दे रही थी? आखिर वाड्रा ने इतनी संपत्तियों की खरीदारी की है, तो इसके लिए पैसे कहां से आ रहे थे। कहीं इनमें काले धन का इस्तेमाल तो नहीं हुआ है?'

भूषण ने पूछा कि आखिर डीएलएफ ने रॉबर्ट वाड्रा को ब्याज मुक्त लोन क्यों दिया? क्या इसलिए क्योंकि वे कांग्रेस शासित सरकारों से डीएलएफ को खासा फायदा दिला रहे थे? उन्होंने कहा कि डीएलएफ की ज्यादातर जमीन हरियाणा में है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या जमीन खरीदारी के मामले में डीएलएफ ने वाड्रा की मदद ली?

उन्होंने कहा, 'ऐसे बहुत से सवाल है, जिनके जवाब मिलने चाहिए। आखिर वाड्रा की प्रॉपर्टी की जांच कौन करेगा? अगर जांच हुई भी, तो वह निष्पक्ष होगी? क्या इससे साफ नहीं है कि देश में लोकपाल कितना जरूरी है।' मशहूर वकील शांति भूषण ने सवाल किया कि क्या रॉबर्ट वाड्रा सोनिया गांधी के दामाद हैं, तो कुछ भी करेंगे?

अन्ना का नाम पार्टी में नहीं दिल में रखेंगे : केजरीवाल

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 राजनीति में आने के मुद्दे पर अन्ना हजारे की ओर से पल्ला झाड़ने के एक दिन बाद अरविंद केजरीवाल ने उनके फैसले को हैरत में डालने वाला बताया। उन्होंने कहा कि अन्ना हमेशा हमारे गुरु बने रहेंगे। 

मीडिया से बातचीत में केजरीवाल ने कहा कि हम अन्ना हजारे का सम्मान करते हैं। वह हमारे गुरु और पिता हैं। बुधवार की घटना बहुत चौंकाने वाली है। यह हैरत में डालने वाली, दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद थी। अन्ना ने बुधवार को केजरीवाल की अगुवाई वाले ग्रुप से यह कहते हुए अलग होने का ऐलान किया था कि उन्हें उनके नाम या तस्वीरों का इस्तेमाल अपने उस संगठन के लिए नहीं करना चाहिए जो वह बनाना चाह रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि अन्ना की तस्वीरें और नाम तो हमारे दिलों में हैं। हम उनका आशीर्वाद लेना और उनके पांव छूना जारी रखेंगे। अन्ना के पांच सिद्धांत हमारी पार्टी की नींव होंगे। 

अन्ना की ओर से सोशल नेटवर्किंग साइट पर कराए गए सर्वेक्षणों को खारिज किए जाने के सवाल पर केजरीवाल ने कहा कि अन्ना ने ही राजनीतिक दल बनाने या न बनाने पर सर्वे करवाने के लिए कहा था। इसके लिए एसएमएस और इंटरनेट का इस्तेमाल उनका ही सुझाव था। केजरीवाल ने कहा कि सिस्टम को फौरन चेंज की जरूरत है। हमारे सामने चुनौतियां भी हैं और मौके भी। हमारी नजर में बीजेपी और कांग्रेस एक जैसे हैं। 

केजरीवाल के समर्थकों ने सोशल नेटवर्किंग साइटों पर कमेंट्स किए। एक ट्वीट में लिखा गया कि अन्ना ने लोगों को भ्रष्टाचार के बारे में जागरूक तो किया लेकिन अब यह नहीं बताते कि इस जागरूकता का करना क्या है? राजनीतिक होना ही एकमात्र तर्कसंगत कदम है। एक और ट्वीट में कहा गया कि जनता से कटे रहने वाले कुछ लोगों के बजाय अब जनता खुद इस कहानी को लिखे।

राजनीतिक पार्टी को लेकर अन्ना-अरविंद में मतभेद गहराया

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नई दिल्ली। राजनीतिक पार्टी बनाने के सवाल पर टीम अन्ना में गहरे मतभेद हैं। यहां तक कि अन्ना भी इसके लिए खुद को दिल से तैयार नहीं कर पाए हैं। जंतर-मंतर के मंच से राजनीति विकल्प की बात कहने वाले अन्ना अब पार्टी बनाने के खिलाफ बयान दे रहे हैं। यही नहीं, उनका साफ कहना है कि टीम अरविंद अगर चुनाव लड़ती है तो वो उसके लिए प्रचार भी नहीं करेंगे। अन्ना आंदोलन के जरिए सिर्फ जनता को जगाने के पक्ष में हैं। जिससे जनता योग्य उम्मीदवारों को चुनकर संसद और विधानसभाओं में भेज सके।

वहीं अन्ना के सहयोगी संजय सिंह ने कहा कि अन्ना के ताजा बयान से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। जबकि मयंक गांधी का कहना है कि खुद अन्ना ने महीने भर पहले पार्टी बनाने की बात पर सहमति दी थी, अब ऐसा क्या हो गया कि वे अपने फैसले को बदल रहे हैं। इसके अलावा कुमार विश्वास का कहना है कि अन्ना अपने बयान से भ्रम की स्तिथि पैदा कर रहे हैं। टीम अन्ना एक है। यह सवाल हमें भी अन्ना जी से समझना है। अन्ना की सोच हम सबसे आगे है। हम सब उनके पास जाएंगे और उनसे बात करेंगे।

दरअसल अन्ना जंतर-मंतर का आंदोलन खत्म होने के बाद से ही विरोधाभासी बयान देते रहे हैं। लेकिन गुरुवार को जारी अपने बयान में अन्ना ने साफ तौर पर पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने का विरोध किया। यही नहीं आईबीएन7 के साथ खास बातचीत में तो अन्ना ने ये भी साफ कर दिया कि अरविंद एंड कंपनी अगर चुनाव लड़ती है तो वो उनका प्रचार नहीं करेंगे।

इतना ही नहीं अन्ना की बात से ये भी साफ हो गया कि राजनीतिक पार्टी के मसले पर अब भी उनकी टोली में मंथन जारी है। कोयला आवंटन पर अरविंद के घेराव आंदोलन पर किरण और अरविंद के बीच मतभेद उभर कर सामने भी आ गए। अन्ना ने भी माना कि दोनों में इस बात पर मतभेद है, हालांकि उन्हें उम्मीद है कि इस मतभेद को मिल बैठ कर सुलझा लिया जाएगा।

अरविंद केजरीवाल के फैसले से सहमत नहीं किरण बेदी
अन्ना पहले भी राजनीतिक पार्टी बनाने के विरोधी रहे हैं। लेकिन जुलाई में जंतर-मंतर के आंदोलन के बाद उन्होंने राजनीतिक विकल्प देने की बात कही थी। लेकिन एक बार फिर वो जन-जागरण की अपनी पुरानी बात पर ही लौट आए दिखते हैं। इसके पक्ष में वो अपनी और अरविंद केजरीवाल की जंतर मंतर हुई बात का हवाला देते हैं।
अन्ना हजारे ने लगाई अपने समर्थकों को डांट

टीम अन्ना दिल्ली का विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत दे रही है। लेकिन लगता है अन्ना इससे भी वाकिफ हैं। हमसे हुई बातचीत में उन्होने इस तरह कि किसी जानकारी से ही इनकार कर दिया। जाहिर है लोकपाल की लड़ाई जहां से शुरू हुई थी वहां से काफी दूर चली आई है। ऐसे में अगर हाल के आंदोलन के दौरान मैं अन्ना हूं कि टोपी, मैं अरविंद हूं कि टोपी में बदलने लगी है तो कोई आश्चर्य नहीं। देखना है कि 2014 तक ये आंदोलन और कौन सी शक्ल अख्तियार करता है।
अब से तकरीबन एक महीने पहले अन्ना हजारे ने ऐलान किया था कि वो जनता को राजनीतिक विकल्प देंगे। तब इस मुद्दे पर लंबी बहस भी छिड़ी थी कि अब तक गैर-राजनीतिक रहा अन्ना का आंदोलन राजनीतिक कैसे हो गया। ऐसे में अन्ना का ये ताजा स्टैंड चौंकाने वाला है।

गौरतलब है कि जंतर मंतर के आखिरी अनशन से पहले अन्ना लगतार राजनीति में उतरने से इनकार करते रहे हैं। लेकिन जब अरविंद-मनीष और गोपाल राय के अनशन पर सरकार ने कान नहीं दिया तो अन्ना के रुख में बदलाव साफ दिया। आईबीएन नेटवर्क के एडिटर इन चीफ राजदीप सरदेसाई से बात करते हुए अन्ना ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार की सुरसा के वध के लिए सियासी पहल की जरूरत हुई और जनता ने आदेश दिया तो वो इनकार नहीं कर सकेंगे।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत से ही सत्ता पक्ष से अन्ना हजारे को इस बात की चुनौती दी जाती रही कि चुनाव मैदान में मुकाबला करके दिखाएं। लेकिन अन्ना कभी इसके हक में नहीं रहे। अन्ना का मानना था कि राजनीतिक दल बनाते ही आंदोलन की धार कमजोर पड़ जाएगी। पिछले साल हरियाणा के हिसार में कांग्रेस के उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव प्रचार करने के बाद उनकी टीम को जबरदस्त आलोचना भी झेलनी पड़ी थी। लेकिन तमाम मश्क्कत के बाद भी जब सरकार टस से मस होती नजर नहीं आई तो अन्ना के नजरिए में बदलाव आया। उन्होंने साफ कर दिया कि भले वो खुद राजनीति में सीधे न उतरें मगर चुनाव से उन्हें परहेज नहीं है। अन्ना ने तब कहा था कि जो भी आगे बढ़ेगा, वो उसका साथ देंगे।
जाहिर है अन्ना का ताजा रुख उनके पहले के रुख से अलग दिख रहा है। जो अन्ना समर्थकों और सहयोगियों के पीछे खड़े रहने की बात कर रहे थे वो अब साफ कह रहे हैं कि पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने की कोई जरूरत नहीं है। वो राजनीतिक विकल्प की बात तो अब भी कर रहे हैं लेकिन ये विकल्प जन जागरण का है खुद सियासत में उतरने का नहीं। अन्ना ने भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का दायरा बढ़ाने की बात करते हुए यहां तक कह डाला कि अगर आंदोलन का स्वरुप व्यापक नहीं हुआ तो ये शिकायत निवारण केंद्र बन कर रह जाएगा।

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