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नितिन गडकरी के इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, जांच भी हो:केजरीवाल

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नई दिल्ली - आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल का भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ पोल खोलने का अभियान इन दिनों नरन पड़ गया हो पर नितिन गडकरी के इस्तीफे के रूप में केजरीवाल को पहली सफलता हासिल हो गई है। केजरीवाल के बड़े खुलासों का ही असर है कि  गडकरी को न केवल दोबारा भाजपा अध्यक्ष बनने की दौड़ से बाहर हुए बल्कि लोगों की आलोचनों का शिकार भी बनना पड़ा।

केजरीवाल ने ही सबसे पहले  नितिन गडकरी के स्वामित्व में रही पूर्ति समूह का कच्चा-चिट्ठा लोगों को सामने खोला था। केजरीवाल ने गडकरी और महाराष्ट्र सरकार में मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया था। गडकरी पर लग रहे आरोपों और उनके खिलाफ आयकर विभाग की सक्रियता के बावजूद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अध्यक्ष पद पर उनकी दावेदारी को समर्थन देता रहा, जबकि भाजपा के कई नेता उनके खिलाफ खुलकर खड़े हो गए थे।

किसानों की लाश पर गडकरी का बिजनेस: केजरीवाल

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नयी दिल्‍ली : इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शन के नेता और समाजसेवी अरविंद केजरीवाल ने भाजपा अध्‍यक्ष नितिन गडकरी को बेपर्दा करते हुए कहा कि 'किसानों की लाशों पर गडकरी ने अपना बिजनेस अंपयार खड़ा किया है।' दिल्‍ली के कांस्‍टीट्यूशन क्‍लब में केजरीवाल ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि गडकरी किसके ह‍क में काम कर रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि महराष्‍ट्र में 71 हजार करोड रुपये का घोटाला सामने आया है। भाजपा विपक्ष में होने के बावजूद भी कांग्रेस-एनसीपी की साझा सरकार को कुछ नहीं कहा। केजरीवाल अपने बगल में बैठी अंजली दामनिया के बारे में बताते हुए कहा कि वो पेशे से एक डॉक्‍टर है और इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शन की कार्यकर्ता भी हैं। दामनिया के परिचय के बाद केजरीवाल ने गडकरी पर एक के बाद एक मिसाइलें दागनी शुरु कर दी।

केजरीवाल ने कहा कि किसानों के साथ हुए अत्‍याचारों और सिचाई विभाग में हुए गड़बड़झाले के सबूत एकत्र करने के बाद दामनिया गडकरी के पास गईं थी। केजरीवाल ने कहा कि दामनिया यह सोच कर गडकरी के पास गईं थी कि वो विपक्ष पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष है और वो इस मुद्दे को जरुर उठाएंगे। मगर गडकरी ने जो जवाब दिया वो हैरान करने वाला था। केजरीवाल ने कहा कि गडकरी ने दामानिया को जवाब दिया कि "शरद पवार और उनके अच्‍छे संबंध है, चार काम वो मेरा करते हैं और चार काम मैं उनका करता हूं।"

हालांकि मीडिया में यह बात आने के बाद गडकरी ने इसका खंडन किया था और इसे सिरे से नकार दिया था। अपने प्रेस कांफ्रेंस के माध्‍यम से केजरीवाल ने कुछ प्रश्‍न उठाये। केजरीवाल ने कहा कि जब इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शन के कार्यकर्ताओं ने 1 म‍हीने में इस बात की जांच कर ली कि महाराष्‍ट्र के विदर्भ में किसान क्‍यों खुदकुशी कर रहे हैं तो सरकारें क्‍यों नहीं कर रही? जांच एजेंसियां क्या कर रही हैं? अन्ना आंदोलन के दौरान अंजली दमानिया ने आरटीआई दाखिल की जिसके बाद उनको सबूत मिले की 70 हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी किसानों को फायदा नहीं क्यों नहीं मिले? अरविंद ने खुलासा किया कि नागपुर के खुर्सापुर गांव में डैम बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित की गई। इलाके के किसान गजानन रामभावजी घडगे की जमीन अधिग्रहित की गई। 

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जितनी जमीन चाहिए थी उससे ज्यादा जमीन अधिग्रहित की गई।
केजरीवाल ने खुलासा किया कि 4 जून 2005 को बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अजित पवार को चिट्ठी लिखी की उनको 100 एकड़ जमीन चाहिए। अजित पवार ने चार दिन यानि 8 जून को वीआईडीसी को कहा कि गडकरी के प्रस्ताव को 22 जून की बैठक में पेश किया जाए। इस बैठक में नितिन गडकरी की मांग को मंजूरी दे दी गई। हालांकि इसका सिंचाई विभाग ने विरोध किया कि कानून के तहत ऐसा करना संभव नहीं है।

अरविंद ने खुलासा करते हुए कहा कि नितिन गडकरी का बड़ा एंपायर है। उनका इसमें व्यासायिक इंट्रेस्ट हैं। क्या वो महाराष्ट्र के विदर्भा के किसानों के विरोध में है? क्या महाराष्ट्र के अंदर व्यवसाय किसानों की खुदकुशी पर हो रहा है? केजरीवाल ने कहा कि वो एक प्रश्न देश के सामने रखना चाहते हैं कि क्या बीजेपी देश की विपक्षी पार्टी है या बीजेपी सत्ताधारी पार्टियों से मिली हुई है। सवाल उठाते हुए अरविंद ने खुलासा किया कि गडकरी साहब का इंटरेस्ट क्या है। उनके बिजनेस हित क्या महाराष्ट्र के किसानों के हितों से टकरा रहे हैं? महाराष्ट्र के अंदर जो गड़करी के हित हैं उनकी कीमत किसान चुका रहे हैं?

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