नई दिल्ली । अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान टीम अन्ना को विदेशों से मिले फंड के मामले में सीबीआइ जांच की मांग को लेकर दायर एक याचिका का दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए निपटारा कर दिया कि इस मामले में आपराधिक मामला नहीं बनता है। मुख्य न्यायाधीश डी. मुरुगेसन व जस्टिस वीके जैन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की रिपोर्ट पढ़ने के बाद अपना फैसला सुनाया है।
मामले में केंद्र सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि अन्ना की टीम से जुड़े सदस्यों के तीन एनजीओ में विदेशी फंड लेते समय कुछ लापरवाही बरती गई है, परतु उन पर आपराधिक मामला चलाने की जरूरत नहीं है। उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर मंाग की गई थी कि टीम अन्ना द्वारा चलाए गए अभियान में विदेशों से मिली मदद के लिए उनके खिलाफ सीबीआइ जांच कराई जाए और आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
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नई दिल्ली। राजनीतिक विकल्प को लेकर टीम अन्ना में मतभेद की रिपोर्टों के बीच अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अन्ना हजारे ने ही पार्टी बनाने की शुरुआत करने के निर्देश दिए थे। उधर, टीम अन्ना की बैठक में फैसला लिया गया कि 2 अक्टूबर को पार्टी के नाम की घोषणा कर दी जाएगी।
रविवार को केजरीवाल ने दावा किया कि पार्टी बनाने का फैसला अन्ना हजारे का ही था। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि अगर अन्ना एक बार कह देंगे कि वह राजनीतिक पार्टी बनाने के खिलाफ हैं तो हम फैसला तुरंत वापस ले लेंगे। केजरीवाल ने लिखा है, 'पिछले एक साल अन्ना को फैसले लेने में अक्षम ऐसे शख्स के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिसे कोई भी प्रभावित कर सकता है। जिन्हें लगता है कि अन्ना को आसानी से उल्लू बनाया जा सकता है, वे उनसे एक भी शब्द उनकी मर्जी के खिलाफ कहवाने की कोशिश करके देख लें।'
केजरीवाल ने ट्वीट में लिखा है, 'दुर्भावना के तहत यह बात फैलाई जा रही है कि अन्ना राजनीतिक पार्टी बनाने के खिलाफ हैं और उनपर टीम ने फैसला थोपा है, जबकि हकीकत कुछ और है। यह फैसला अन्ना का था। अन्ना पिछले 30 सालों से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं और राजनीतिक रूप काफी तेज और स्वतंत्र फैसले करने वाले शख्स हैं।' उन्होंने आगे लिखा है कि अन्ना ने जनता की मांग को स्वीकार करते हुए यह फैसला किया था कि अब राजनीतिक विकल्प के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा है। केजरीवाल कहते हैं कि अन्ना ने स्पष्ट रूप से हमें राजनीतिक पार्टी बनाने का निर्देश दिया था। अगर वह आज भी इसके लिए मना कर देंगे तो पार्टी बनाने का फैसला हम तुरंत वापस ले लेंगे।
इस बीच, रिपोर्ट है कि अन्ना के सहयोगियों ने 2014 से पहले दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ने का फैसला किया। 2014 में लोकसभा चुनाव होना है लेकिन उससे पहले दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव में ही टीम अन्ना अपनी ताकत आजमाना चाहती है। अन्ना के साथियों को उम्मीद है कि उनकी मुहिम का असर दिल्ली चुनाव में दिखेगा।