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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

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हिना रब्बानी : मनमोहन सिंह पर भी लगे हैं भ्रष्टाचार के आरोप



न्यूयार्क: पाकिस्तान में लगातार दूसरे प्रधानमंत्री की कुर्सी भ्रष्टाचार की आंधी में उडऩे के खतरे के बीच देश की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार इस मामले में भी भारत से तुलना करने से बाज नहीं आईं, जब उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी ‘‘बहुत बड़े’’ आरोपों का सामना किया है।  हिना ने यहां कहा, ‘‘दक्षिण एशिया के कई देशों और अन्य स्थानों पर भी भ्रष्टाचार की समस्या है। भारत भी इन आरोपों से अछूता नहीं है और भारत के प्रधानमंत्री पर भी भ्रष्टाचार के काफी बड़े आरोप लगे हैं।’’

हिना कल यहां एशिया सोसायटी में एक समारोह के दौरान पाकिस्तान में फैले भ्रष्टाचार के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रही थीं। पाकिस्तान में शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार का यह आलम है कि देश के प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी ने बिजली परियोजनाओं में घूस लेने के आरोपों के चलते प्रधानमंत्री राजा परवेश अशरफ की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। 

याद रहे कि अशरफ से पहले युसुफ रजा गिलानी को भी देश के सुप्रीम कोर्ट ने सत्ता से हटा दिया था क्योंकि गिलानी ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच दोबारा शुरू करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करके उसकी अवमानना की थी।

प्रधानमंत्री का सख्‍ती वाला बयान देर से आया.....आपकी क्‍या राय है???

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हमारे देश के प्रधानमंत्री देश के बड़े से बड़े मुद्दों पर बयान तो देते हैं लेकिन इसमे थोड़ा समय लग जाता है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीमा पर दो भारतीय जवानों की बर्बरता से हत्या मामले में आखिरकार मंगलवार को अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि इस तरह से पड़ोसी मुल्क से रिश्ते सामान्य नहीं हो पाएंगे.
प्रधानमंत्री ने 9 दिन बाद ही सही कड़े तेवर दिखाए और कहा, 'इस घटना के बाद पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य नहीं रह सकते हैं. मुझे उम्मीद है कि पाकिस्तान को इस बात का एहसास जरूर होगा.'

इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 27 अगस्त 2012 को कोलगेट स्कैम पर भी अपनी इस चुप्पी की सफाई दे चुके हैं, उस समय मनमोहन सिंह ने कहा था, 'हजारों जवाबों से अच्छी मेरी खामोशी है, ना जाने कितने सवालों की आबरू रखे.'

इसके अलावा हमारे प्रधानमंत्री जहां देश के दो जांबाज जवानों की नृशंस हत्या पर 9 दिन बाद बोले वहीं दिल्ली में हुए गैंगरेप पर उनका बयान घटना के 9 दिन बाद ही आया था.

एफडीआई मुद्दे पर मनमोहन सिंह ने अपनी चुप्पी 82 दिन बाद तोड़ी तो लोकपाल पर उन्होंने बयान देने में 6 महीने का समय लगा दिया था. देश के इन गंभीर मुद्दों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी जनता को लंबे समय से सालती आ रही है.

2जी घोटाले में और कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले पर अपनी चुप्पी तोड़ने में हमारे प्रधानमंत्री को पूरे एक साल लग गए थे.

रामदेव के निशाने पर सोनिया और मनमोहन

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दिल्ली :  बाबा रामदेव ने दिल्ली गैंगरेप मामले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि ये देश इन दोनों के इस मुद्दे पर मौन टूटने का इन्तजार कर रहा है।

दिव्य योग मंदिर में संवाददाता सम्मेलन में रामदेव ने आरोप लगाया कि विपक्ष अपना पक्ष स्पष्ट कर चुका है, लेकिन सत्ता पक्ष की चुप्पी सोचने पर मजबूर करती है कि देश के 260 विधायकों और सांसदों पर रेप के मामले दर्ज हैं। कहीं उन्हें बचाने का प्रयास तो सरकार की चुप्पी में नहीं छुपा है।

रामदेव ने दावा किया कि आजादी के बाद से अब तक किसी बड़े आदमी के परिवार में इस तरह की घटना नहीं हुई है और यदि होती तो शायद तुरंत कानून बन जाता। उन्होंने अपने ऊपर लग रहे आरोपों का स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि मैं दिल्ली में आन्दोलन हाईजैक करने नहीं गया था, क्योंकि छात्रों के साथ कोई राजनैतिक पार्टी नहीं थी, तो मैं अपने साथ 100 बसें और सैकड़ों अन्य वाहन से आन्दोलनकारियों को समर्थन देने गया था।

रामदेव ने आन्दोलनकारियों से पुलिस के व्यवहार की निंदा की तथा बलात्कारियों के लिये फांसी की सजा की मांग और फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई की मांग की। उन्होंने फिल्मों और टीवी सीरियल पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की, जिसमें बलात्कार की घटना को सस्ते मनोरंजन के लिए परोसा जाता है।

दिल्ली गैंगरेप के दोषियों को जल्द मिलेगी सजा: manmohan singhmanmohan singh

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता को अब सिंगापुर के एक अस्पताल में सबसे अच्छी चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने इस दुष्कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की अपनी प्रतिबद्धता के प्रति आश्वस्त भी किया। 

प्रधानमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, "मेरा आश्वासन है कि हमारी सरकार दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।"

दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार बनी 23 वर्षीया पीड़िता को इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया है। वहां भी उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।

17 भारतीय बंधकों पर केजरीवाल ने मनमोहन को लिखा खत

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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने सोमाली समुद्री लूटेरों द्वारा 17 भारतीय नाविकों को 9 महीने से बंधक बनाने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखी है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को लिखे खत में कहा है कि हमारी पार्टी भारतीय नाविकों को प्रति गहरी संवेदना प्रकट करती है। खत में कहा गया है कि 17 भारतीयों को इस साल मार्च से ही सोमाली समुद्री लूटेरों बंधक बना रखा है। 

आखिर सरकार 9 महीने बाद भी इन बंधकों को रिहा कराने के लिए कुछ क्यों नहीं कर रही है? बंधकों के परिवार वाले बेहद परेशान हैं। वे सरकार की तरफ से कोई कदम नहीं उठाए जाने से काफी निराश हैं। इन पीड़ित परिवार वालों के पास फिलहाल कोई विकल्प नहीं है। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से पूछा है कि क्या ये आम आदमी हैं इसलिए सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है? 


अरविंद केजरीवाल ने खत में लिखा है इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी सोमाली समुद्री लूटेरों ने भारतीय नाविकों के साथ ऐसा किया है। आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री से इस मामले में सीधा हस्तक्षेप करने की मांग की है।


मेरी वजह से गिरे मनमोहन सरकार के छह विकेट : अन्ना हजारे

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पुणे।। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे अन्ना हजारे मनमोहन मंत्रिमंडल में हुए बदलाव में अपनी जीत देख रहे हैं। अन्ना ने कहा कि उन्होंने मनमोहन सरकार के छह विकेट गिराए।

पुणे में रविवार को अन्ना ने कहा, 'मेरे चरित्र पर कोई दाग नहीं है, इसलिए मैं इन गुंडों के खिलाफ अब तक लड़ पाया हूं। और देखिए, मैंने छह कैबिनेट मंत्रियों के विकेट ले लिए।'

रविवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल से पहले तीन कैबिनेट और चार राज्य मंत्रियों ने इस्तीफा दिया। इस्तीफा देने वाले मंत्री एसएम कृष्णा, अंबिका सोनी, मुकुल वासनिक, सुबोध कांत सहाय, महादेव खंडेला, विन्सेंट पाल और अगाथा संगमा हैं। इनमें सुबोध कांत सहाय ही ऐसे हैं, जो कोयला घोटाले को लेकर विवादों में रहे थे।

हाल ही में आंख का ऑपरेशन कराने के बाद अन्ना हजारे आराम कर रहे हैं, लेकिन वह मैदान में उतरने को बेचैन हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्दी ही देश की यात्रा पर निकलेंगे, जो करीब डेढ़ साल चलेगी।

भ्रष्ट सरकार के मुखिया' हैं बेअसर मनमोहन सिंह : वाशिंगटन पोस्ट

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नई दिल्ली।। अपने सवा 8 साल के कार्यकाल में सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कार्यप्रणाली को लेकर घरेलू मोर्चे पर पहले से ही सवाल उठाए जा रहे थे, पिछले कुछ दिनों से वह विदेशी अखबारों के भी निशाने पर आ गए हैं। टाइम मैगजीन से अंडरअचिवर, द इंडिपेंडेंट से सोनिया गांधी की कठपुतली का तमगा मिलने के बाद अब अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने उन्हें दया का पात्र करार दिया है।

अखबार ने लिखा है कि मनमोहन सिंह ने कभी देश को आधुनिक, संपन्न और शक्तिशाली बनाने की राह बनाई थी, लेकिन आलोचक अब कहते हैं कि 79 वर्षीय प्रधानमंत्री अपनी असफलताओं के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज होंगे। अखबार लिखता है कि मनमोहन सिंह अपने देश में आर्थिक सुधार के सूत्रधार बने लेकिन अत्यंत ईमानदार, विनम्र और बुद्धिजीवी शख्स की छवि अब बदल चुकी है। अब उनकी छवि ऐसे निष्प्रभावी नौकरशाह की है जो एक भ्रष्ट सरकार को चला रहा है।

अमेरिकी अखबार ने लिखा है कि ईमानदारी और इकॉनमी के क्षेत्र में अनुभव उनकी ताकत मानी जाती थी लेकिन इन्हीं दो मोर्चे पर उनकी सरकार को आईना दिखाया जा रहा है। उनके नेतृत्व में आर्थिक सुधार रुक गए, इकॉनमी की ग्रोथ धीमी पड़ गई और रुपया मटियामेट हो गया। उनकी साख पर इस आरोप से भी बट्टा लगा कि वह अपनी कैबिनेट के सहयोगियों को जेब भरते चुपचाप देखते रहे।


प्रधानमंत्री के पहले कार्यकाल में उनके मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने कहा, 'कभी वह सम्मान के पात्र थे और अब उपहास का केंद्र बनकर जीवन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं।' अखबार ने मनमोहन सिंह की चुप्पी का मज़ाक उड़ाते हुए कहा है कि अब लोग मीटिंग में कहते हैं कि फोन को मनमोहन सिंह मोड में रख दो। एक और जोक का जिक्र अखबार ने किया है, 'मनमोहन सिंह एक बार डेंटिस्ट के यहां गए तो उसने कहा कि क्लीनिक में तो मुंह खोलिए।'

केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी ने अमेरिकी अखबार की टिप्पणी पर नाराजगी जताई है। सोनी ने कहा कि प्रधानमंत्री पर ऐसे आरोप लगाना सरासर गलत है। सोनी ने कहा कि सरकार इस बारे में विरोध जताएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के बारे में पहले भी ऐसा कहा गया था और बाद में माफ़ी मांगी थी। 'द वॉशिंगटन पोस्ट' को हमारे प्रधानमंत्री के बारे में इस तरह की बात करने का उन्हें कोई हक नहीं है। दूसरी तरफ. बीजेपी ने अखबार की टिप्पणी को सही ठहराया है। बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है कि भ्रष्टाचार का सिंहासन कितना डोल रहा है इसकी जानकारी सबको हो गई है। नकवी ने कहा कि अब इसकी जानकारी पूरी दुनिया को हो गई है।

इससे पहले अमेरिकी मैगजीन 'टाइम' और ब्रिटेन के अखबार 'द इंडिपेंडेंट' भी प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर सवालिया निशान लगा चुके हैं। 'द इंडिपेंडेंट' ने मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाते हुए उन्‍हें कांग्रेस अध्यक्ष की कठपुतली करार दिया था।'द इंडिपेंडेंट' ने लिखा था कि मनमोहन सिंह के पास कोई राजनीतिक ताकत नहीं है और पीएम की कुर्सी पर वह सिर्फ सोनिया गांधी की वजह से बैठे हैं। टाइम मैगजीन ने पीएम के कामकाज के तरीके पर सख्त टिपणी की थी। मैगजीन ने अपने जुलाई अंक में मनमोहन सिंह के फैसला लेने की क्षमता पर भी सवाल उठाते हुए उन्हें 'अंडरअचिवर' करार दिया था।

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