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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

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मोदी-राहुल दोनों PM पद के लिए अनफिट: अन्‍ना हजारे

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पीएम पद की उम्‍मीदवारी को लेकर जहां देश गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी की दावेदारियों के ऊपर बहस कर रहा है वहीं समाजसेवी अन्‍ना हजारे ने कहा कि इस पद के लिए दोनों ही फिट नहीं हैं.

जनतंत्र यात्रा को लेकर उत्तर भारत में जगह-जगह रैली कर रहे अन्‍ना हजारे ने कहा कि जनता को अधिकार होना चाहिए कि वह देश के प्रधानमंत्री चुन सके ना कि वह राजनीतिक पार्टियों द्वारा चुना जाए.

उन्‍होंने कहा कि उनके द्वारा निकाली गई यह जनतंत्र यात्रा लोगों को नींद से जगाने के लिये है. हजारे ने कहा कि लोकसभा एक मन्दिर है और जनता की यह जिम्मेदारी है कि वे सही जनप्रतिनिधि को चुनकर संसद मे भेजे ताकि उसकी पवित्रता कायम रहे. जनता को जागना होगा तभी देश का भला हो सकता है.

उन्होंने कहा कि अभी हमें श्रेष्ठ भारत का निर्माण करना है. लोकसभा चुनाव में गुण्डे, माफिया, चोर, लूटेरे और भ्रष्ट नेता किसी भी स्थिति में जीत न पाये. इसके लिये जनता उन्हें अपनी वोट की ताकत का अहसास कराये और शहीद भगत सिह राजगुरू और सुखदेव के सपनों का भारत बनाये.

पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने कहा कि देश की आजादी के 65 वर्ष के अन्तराल में देश की जनता के स्थिर मन को बदलने के लिये व्यवस्था में परिवर्तन करना होगा और इस परिवर्तन के लिये बहुत काम करना पडेगा.

सिंह ने कहा कि देश में बढ रहा भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह चाट रहा है, जिसका इलाज बेहद जरूरी है. इस देश की असली मालिक तो जनता है. लेकिन वह अपनी ताकत नहीं पहचान पाती और देश की बागडोर सही हाथों में नहीं सौंप पाती.

सिंह ने कहा कि अल्पमत हासिल करने वाला भी सांसद या विधायक बन जाता है यह व्यवस्था ठीक नही है इसे बदलने की आवश्यकता है.

हार्ट अटैक के बजाए देश के लिए मरना बेहतर: अन्ना हजारे


फतेहाबाद : भ्रष्टाचार विहीन व्यवस्था लागू करवाने के लिए देश में आंदोलन चला रहे अन्ना हजारे चालीस वर्षो से घर नहीं गए हैं और न ही परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी रखते हैं। उनके लिए सब कुछ देश है। यह खुलासा स्वयं अन्ना हजारे ने फतेहाबाद में जनसभा के दौरान किया।

अन्ना बोले जीवन में व्रत लिया है कि जबतक जीना है समाज और देश के लिए जीना है। मरना है तो भी देश के लिए ही। हार्ट अटैक से मरने से तो बेहतर है कि देश के लिए मरे। इसीलिए जान हथेली में लेकर घूम रहा हूं, नहीं पता घर के क्या हालात हैं। कहां पर बहन है और तीन भाई है, और उनके बच्चों के नाम भी पता नहीं हैं। मंदिर में रहता हूं। एक बिस्तर और एक प्लेट है। देश के लिए योजनाओं करोड़ों की बनाई हैं किंतु अपना बैंक बैलेंस नहीं है। लड़ते लड़ते 6 मंत्रियों के विकेट लिए हैं और 40 अफसरों को चलता कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली में लड़ रहा था तो कपिल सिब्बल बोले बाहर के लोगों को कानून बनाने की कमेटी में क्यों लें? तब उन्होंने कहा कि जिन्हें बाहर के बता रहे हो वह सत्ता के मालिक हैं और फिर सरकार की लाइट जगी और कमेटी बनी।

4 मई से यात्रा का दूसरा पड़ाव शुरू

पूर्व थल सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने कहा कि जनतंत्र मोर्चा की जनतंत्र यात्रा में अपार भीड़ जुट रही है और यात्रा अपने मकसद में कामयाब हो रही है। यात्रा का दूसरा पड़ाव 4 मई से उत्तर प्रदेश से शुरू होगा। यात्रा राजस्थान व मध्य प्रदेश में भी जाएगी। वे आज फतेहाबाद में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का कोई इरादा फिलहाल नहीं है। हालांकि कई पार्टियों से उन्हें ऑफर जरूर मिले हैं। उन्होंने कहा कि जनतंत्र मोर्चा का मकसद जनता को जगाने का है। जनता खुद फैसला करेगी किसे जिताना है। उन्होंने कहा कि सितंबर के प्रथम सप्ताह में दिल्ली में जन संसद बुलाई जाएगी। जिसमें एक बड़े परिवर्तन की शुरूआत नजर आएगी। नेताओं के साथ आने के संबंध में उन्होंने कहा कि जो नेता स्वार्थ छोड़ कर आना चाहे और चुनाव न लड़ने की शपथ लेगा उसे अपने साथ जोड़ेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हरियाणा में यात्रा के सफल होने से किसी को डर लग रहा है। इसीलिए यात्रा के कार्य में बाधा पहुंचाई जा रही है। कैथल में पोस्टर फाड़े गए हैं। वहीं सोनीपत में बैनर की मंजूरी नहीं मिली। लगता है प्रशासन को निर्देश कहीं से मिले हैं।

परमाणु के विरूद्ध खुलकर बोले जनरल

सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद परमाणु सयंत्र का विरोध करने पूर्व में भी गोरखपुर पहुंचे जनरल वीके सिंह ने एक बार फिर परमाणु सयंत्र की मुखालफत कर दी। जनरल ने कहा कि जमीन परमाणु सयंत्र के बदले अच्छा मुआवजा मिला। किसानों की बांछें खिल गई हैं। अच्छे मुआवजे से गाड़ियां आ गई। किंतु ये सब किसान के हित में नहीं है। बैलगाड़ी से सीधे गाड़ी में आने के नुकसान हैं। यह सब बाद में महसूस होगा। पैसा मिला है, खाना अच्छा मिलेगा। रहन सहन अच्छा होगा किंतु वो स्वच्छ हवा और तंदरुस्ती कहां से लाओगे जो गोरखपुर में है। उन्होंने कहा कि थर्मल पावर के कारण बठिंडा कैंसर कैपिटल बन गया है। वहीं कोटा परमाणु बिजली घर से शहर व आसपास का क्षेत्रफल स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि परमाणु सयंत्र के लगने से आम आदमी को लाभ नहीं बल्कि जो बाहर से सयंत्र मंगाकर यहां लगवाएंगे।

सरकार पर नहीं, जनशक्ति पर भरोसा: अन्ना

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अन्ना हज़ारे जनतंत्र यात्रा


सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने रविवार से अमृतसर के जलियांवाला बाग़ से अपनी ‘जनतंत्र यात्रा’ की शुरुआत कर दी है.

अन्ना हज़ारे ने स्पष्ट किया है कि उनके नेतृत्व वाला जनतांत्रिक मोर्चा चुनावी मैदान में नहीं उतरेगा लेकिन अगले लोकसभा चुनाव से पहले पूरे देश की आम जनता को जागरुक बनाने की उनकी मुहिम जारी रहेगी.

इस यात्रा का आयोजन मौजूदा केंद्र सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ और मज़बूत लोकपाल विधेयक लाने के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से किया जा रहा है.

"आम लोगों को जन लोकपाल विधयेक जैसे मुद्दों पर जागरुक करने की जरुरत है. देश में बदलाव तभी होगा जब आम आदमी इस आंदोलन से जुड़ेगा."
अन्ना हजारे, जनतंत्र यात्रा की शुरुआत से पहले

इस यात्रा के दौरान अन्ना अपने समर्थक कार्यकर्ताओं के साथ देश की जनता को जागरुक करने की कोशिश करेंगे.

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'त्रस्त है आम आदमी'

अमृतसर में अन्ना हज़ारे ने मीडिया से कहा, “आम लोगों को जन लोकपाल विधयेक जैसे मुद्दों पर जागरुक करने की ज़रुरत है. देश में बदलाव तभी होगा जब आम आदमी इस आंदोलन से जुड़ेगा.”

अन्ना हज़ारे ने ये भी कहा है कि देश की जनता मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से त्रस्त हो चुकी है.

उन्होंने कहा, “देश के आम लोग भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था से त्रस्त हैं. इसमें बदलाव तभी होगा जब आम जनता एक मंच पर आकर बदलाव की मांग करेगी.”

अन्ना हज़ारे के मुताबिक़ जनतंत्र यात्रा का अंतिम उद्देश्य है आम लोगों को ये बताना कि उनमें सरकारों को उखाड़ फेंकने की ताक़त है.

जन संसद का आयोजन

इस यात्रा के दौरान आम लोगों को भ्रष्टाचार, लोकपाल के अलावा चुनाव सुधार और जन प्रतिनिधियों को वापस बुलाने के प्रावधानों के बारे में भी बताया जाएगा.

अन्ना हज़ारे ने इस यात्रा को समर्थन देने के लिए सभी राजनीतिक दलों को ख़त भेजा था, लेकिन अभी तक कोई राजनीतिक पार्टी इस यात्रा में शामिल होने के लिए सामने नहीं आई है.

जलियांवाला बाग़ से शुरू जनतंत्र यात्रा के तहत पंजाब में अन्ना हज़ारे आठ सार्वजनिक रैलियों को संबोधित करेंगे. ये यात्रा व्यास और कपूरथला होते हुए जालंधर पहुंचेगी.

निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक पांच महीने बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल जन रैली का आयोजन प्रस्तावित है. इसे जन संसद का नाम दिया गया है.

केजरीवाल से मिले अन्ना, अनशन खत्म करने की अपील की


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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार द्वारा बिजली और पानी की कीमतों को बढ़ाए जाने के खिलाफ पिछले सात दिनों से अनशन पर बैठे अरविंद केजरीवाल से शुक्रवार को उनके पुराने साथी और समाजसेवी अन्ना हजारे मिलने पहुंचे। उन्होंने केजरीवाल से अनशन खत्म करने की अपील भी की। इससे पहले श्रीश्री रविशंकर भी उनसे इस तरह की ही अपील कर चुके हैं।

कल देर रात दिल्ली की सुंदर नगरी कालोनी में अनशन पर बैठे केजरीवाल से अन्ना की मुलाकात बेहद औपचारिक तरीके से हुई। अन्ना ने कहा अब सभी के एक साथ चलने का समय आ गया है चाहे वह रामदेव हों या और कोई। उन्होंने कहा कि केजरीवाल और उनकी राहें भले ही अलग हों लेकिन उनकी मंजिल एक ही है, जहां एक दूसरे की जरूरत पड़ेगी हम साथ देंगे।

अन्ना ने कहा कि सरकार चाहती है कि आंदोलनकारियों की मौत हो जाए, लेकिन अब लोग जागरूक हो रहे हैं। बेहतर होगा कि केजरीवाल अनशन खत्म करें और जल्द स्वस्थ्य होकर लंबी लड़ाई के लिए फिर तैयार होकर मैदान में उतरें। अन्ना ने कहा कि वह शनिवार को जलियांवाला बाग से अपना जागरूकता अभियान शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव की घोषणा होते ही वह दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन शुरू करेंगे।

इससे पूर्व केजरीवाल ने दिल्ली सरकार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को खुले मंच पर आकर बहस करने की चुनौती दे डाली। उन्होंने आरोप लगाया कि शीला दीक्षित ने दो विदेशी कंपनियों को सस्ती दरों में पानी देने का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। उन्होंने कहा कि वह डॉक्युमेंट्स के दम पर साबित कर सकते हैं कि शीला दीक्षित के दावे झूठे हैं। शीला दीक्षित ने कहा था कि जनता 24 घंटे बिजली इस्तेमाल करके सिर्फ 8 घंटे का बिल नहीं दे सकती।

लोकायुक्त ही नहीं ला पाए तो कैसे बन पाएंगे मोदी पीएम : अन्ना हजारे

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नई दिल्ली - भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रहे अन्ना हजारे ने लोकपाल बिल के मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा। वहीं लोकायुक्त के बहाने अन्ना ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। अन्ना ने सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी गुजरात में तो लोकायुक्त कानून नहीं बना पाए, तो कैसे भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बना पाएंगे। वो कैसे पीएम बनेंगे।

अन्ना ने सरकार को भी घेरते हुए कहा कि सरकार ने ऐसा क्यों कहा कि हर राज्य में लोकायुक्त होगा। गरीब को हर जगह करप्शन देखना पड़ता, देश में गरीब लोगों को न्याय नहीं दिलाते तो फिर जनलोकपाल का क्या मतलब है। अब सरकार कह रही है कि सीबीआई भी लोकपाल के दायरे में नहीं आएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार और नेताओं से उन्हें कोई अपेक्षा नहीं है। जनता को अपने प्रतिनिधि भेजने पड़ेंगे। मैं डेढ़ साल घूमता रहूंगा और बताऊंगा कि सरकार ने किस तरह झूठ बोला। सोनिया ने लिखा है कि हमने जनलोकपाल संसद में रखा है। मैंने उनको लिखा कि क्या इसमें सीबीआई, सीवीसी है? जब तक इनपर सरकार का कंट्रोल है तब तक कैसा लोकपाल। मैंने सोनिया को लिखा है कि सत्ता जहर नहीं, नशा है।
अन्ना ने कहा कि हमने तय किया है कि मैं डेढ़ साल तक घूमूंगा, गरीबों को न्याय दिलाउंगा। जनरल वीके सिंह भी साथ रहेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो आम चुनाव से पहले रामलीला मैदान में भी बैठूंगा। उन्होंने कहा कि कानून विधानसभा या संसद में बनता है। लेकिन कानून का ड्राफ्ट जनता के साथ मिलकर बनाना चाहिए। जनता को अपने लोग भेजने चाहिए, ताकि सशक्त कानून बन सके।

सरकार दे रही धोखा, फिर करूंगा अनशन: अन्ना

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भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ रहे समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा है कि लोकपाल बिल के नाम पर सरकार शुरू से धोखा देते आई है. अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो अपने वादे से मुकर गए हैं.

लोकपाल बिल पर अन्ना हजारे ने कहा है कि सरकार ने कैबिनेट के सामने जो ड्राफ्ट रखा है, वह हमारा नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार ने जनलोकपाल पर जो भी आश्वासन दिए, वे पूरे नहीं किए. सरकार ने हमें धोखा दिया है.

अन्ना ने आगे कहा कि सीबीआई और सीवीसी लोकपाल के दायरे में आने चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि लोकपाल को लेकर ज्वाइंट कमेटी बनाई गई थी, उसका क्या हुआ.

अन्ना ने सोनिया गांधी पर निशाना साधा, 'सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल गांधी से कहा था कि सत्ता जहर है. मैंने उनसे पूछता हूं कि अगर ऐसा है तो हर कोई इसके पीछे क्यों भागता है. सत्ता जहर नहीं नशा है.'

नरेंद्र मोदी के पीएम पद की उम्मीदवारी के बारे में अन्ना हजारे ने कहा, 'नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री पद के लिए सही नहीं हैं. नरेंद्र मोदी ने गुजरात में लोकायुक्त नहीं बनने दिया था.' वहीं राहुल गांधी के बारे में अन्ना बोले, 'परिवारवाद देश के लिए बहुत घातक है. देश को चलाने के लिए उनके पास कोई अनुभव नहीं है.' वहीं किरण बेदी के नए लोकपाल बिल के समर्थन के बारे में अन्ना ने कहा, 'अगर वो ऐसा कर रही हैं तो इसका मतलब उन्हें इसके बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है.'

अरविंद केजरीवाल की पार्टी को समर्थन देने के सवाल पर अन्ना ने कहा, 'अगर केजरीवाल चुनाव लड़ेंगे तो मैं उनका समर्थन नहीं करूंगा. मैं सिर्फ अच्छे इंसानों का समर्थन करूंगा. पहले मैं उनका समर्थन कर सकता था लेकिन अब उनकी पार्टी के लोगों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं.'

अन्ना ने कहा, 'अगर जरूरत पड़ी तो मैं एक बार फिर से अनशन करूंगा. मैं पूरे देश का भ्रमण करके लोगों को जागरुक करूंगा.'

लोकपाल पर सोनिया ने दिलाया अन्ना को भरोसा


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लोकपाल को अपने पक्ष में करने को लेकर कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने अन्‍ना हजारे को एक चिट्ठी लिखकर बताया कि हमारी सरकार संसद के अगले सत्र में लोकपाल बिल लाएगी.

सोनिया ने लिखा कि हमारी सरकार पूरी कोशिश करेगी कि हम इस बिल को कानून का रूप दे पाएं. सरकार ने लोकपाल बिल को किसी तरीके से तो लोकसभा में पास करा लिया है लेकिन राज्‍यसभा में इसे पास कराने को लेकर दिक्‍कत आ रही है. हालांकि सरकार ने जिस स्‍वरूप में लोकपाल बिल को रखा है वह अन्‍ना हजारे को पसंद नहीं है.

श्रीमती सोनिया गांधीजी को जनलोकपाल के बारे में पत्र...

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सेवा में,
आदरणीय श्रीमती सोनिया गांधीजी,
अध्यक्ष, राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी,
10 जनपथ, नई दिल्ली.

महोदया,
दो दिन पहले आपने वक्तव्य किया है कि, "हमने जन लोकपाल बिल पास किया है।" मेरे साथ देश की जनता यह जानना चाहती है कि अगर जनलोकपाल बिल पास किया है, तो क्या उसमें सी.बी.आई और सी.वी.सी को स्वायत्तता दी गई है ? अगर नहीं दी हो तो देना जरुरी है। जब तक सी.बी.आय. और सी.वी.सी. को स्वायत्तता नहीं मिलेगी तब तक भ्रष्टाचार को रोक नहीं लगेगी। सरकारी दफ्तर के क्लास एक से लेकर चार तक अ, ब, क, ड सभी वर्ग के अधिकारी, कर्मचारी क्या जनलोकपाल के दायरे में आये हैं ? सरकारी दफ्तर के सभी अधिकारी कर्मचारी जब तक सिर्फ सरकार के अधीन हैं, तब तक भ्रष्टाचार नहीं मिट सकता ऐसी देशवासियों की धारणा हैं। क्यों कि नीचे से ले कर ऊपर तक कई जनप्रतिनिधी और अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार की चैन (Chain) बन गई हैं। बिना रिश्वत दिये जनता का कोई काम नहीं होता।
      आपने यूं भी कहा है कि भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए कडे कानून बनाना जरुरी है। जनता भी यही चाहती है कि जब तक देश में कडे कानून नही बनेंगे जिनमें कि भ्रष्टाचारियों को मृत्युदण्ड, उम्रकैद, आजीवन सश्रम कारावास जैसी सजा का प्रावधान नहीं है, जब तक भ्रष्ट लोगों को कानून का डर नही लगेगा, तब तक भ्रष्टाचार की गुनहगारी कम नहीं होगी। जनतंत्र में ऐसे कडे कानून लोकसभा और विधानसभा में बनते हैं। लेकिन जनतंत्र में जरुरी है कि कानून का मसौदा बनाते समय जनता में से सुयोग्य अनुभवी लोग और सरकार के लोग मिल कर मसौदा बनाएं।
      आज जब कानून का मसौदा सरकार के लोग बनाते हैँ, तब सम्भवतः जनता के अनुभवी लोगों का सहभाग न होने के कारण कडे कानून नहीं बन पाते। जनतंत्र में जन सहभागिता को ले कर कानून का मसौदा बनाना जरुरी है। जनलोकपाल का सशक्त कानून बनाने के लिये सरकार और सिवील सोसायटी मिल कर मसौदा बनावे इस लिये 5 एप्रिल 2011 में दिल्ली के जंतर मंतर पर जन आंदोलन हुआ था, जिसमें करोडो लोग शामिल हुये थे। जनता के दबाव के कारण आपकी पार्टी की सरकारने सरकार के पांच मंत्री और सिविल सोसायटी के पांच लोगों की मिल कर एक मसौदा समिती भी बनाई थी।
      सरकार ने एक राजपत्र भी निकाला था। इस मसौदा समिती की तीन महिनों तक मीटिंगे भी चली। लेकिन उस मसौदा समिति का क्या निर्णय हुआ यह अभी तक जनता को पता नहीं चला। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार विकेंद्रीकरण के पक्ष में नहीं है। जब तक सत्ता का विकेंद्रीकरण नहीं होगा तब तक भ्रष्टाचार नहीं रुकेगा।
      आपने यह भी कहा है कि सत्ता एक जहर है। अगर सत्ता जहर है तो हर पक्ष और पार्टी में सत्ता के लिये इतनी जबरदस्त होड क्यूं लगी है ? क्यों कि सत्ता जहर नहीं, बल्कि जैसे कई प्रकार की नशा होती है, वैसे ही एक नशा है, ऐसा हमें और जनता को लगता है।
        इसका एक उदाहरण यह है कि जनलोकपाल का आंदोलन रामलिला मैदान में तेरह दिन तक चला था। देश की जनता आंदोलन में करोडों की संख्या में रास्ते पर उतर आई थी। आजादी के 65 साल में पहली बार इतनी तादाद में जनता रास्ते पर उतर आई थी। खास कर करोडों युवक रास्ते पर उतर गये थे। लेकिन किसीने एक पत्थर तक नहीं उठाया था। अगर सत्ता जहर होता तो सरकार की तरफ से जनता की मांगे मानी जातीं। लेकिन 13 दिन तक देश में आंदोलन चले थे फिर भी सरकार ने जनता को प्रतिसाद नहीं दिया। कारण वह जहर के नहीं बल्कि सत्ता की नशा में थी ऐसा अगर कहें तो गलत नहीं होगा।
                दिल्ली में एक छात्रा पर सामूहिक बलात्कार हुआ और देश भर में करोडों युवक आंदोलन के लिये रास्ते पर उतर गये थे। इस संबंध में महिलाओं पर बलात्कार करनेवालों को फांशी या उम्रकैद जैसी कडी सजा देने वाला कानून यदि सरकार पहले से ही बनाती तो गुनाह करने वालों को कुछ तो डर होता था। ऐसी घटना नहीं हो पाती। लेकिन सरकार न तो कडे कानून बनाती हैं और जो पहले से बने हुए हैं उन कानूनों का सख्ती से अमल नहीं करती, यह भी तो सरकार ही का दोष है। इस दोष को हटाना भी तो सरकार का कर्तव्य है। हर समय जनता आंदोलन करे और फिर सरकार कानून बनाए यह कोई तरिका नहीं है।
     सम्रति में सत्ता मंत्रालय में केंद्रित हुई है। जब तक सत्ता केंद्रित है, तब तक भ्रष्टाचार को रोकने में सही सफलता नही मिलेगी। इस लिये स्व. राजीव गांधीजी ने 73 वें और 74 वें संविधान संशोधन की बात की थी। गांव में ग्रामसभा, शहर में नगर परिषद, नगर पालिका, महापालिका में वार्ड सभा को और मोहल्ला सभा को पुरे अधिकार देना जरुरी है। विकास कार्य के लिये जो पैसा गांव और शहरो में जाता है उसे खर्च करते समय ग्रामसभा, वार्ड सभा, मोहल्ला सभा की अनुमति ले कर ही खर्च होना जरुरी है। 26 जनवरी 1950 में जनता देश की मालिक बन गई है, सरकारी तिजोरी में जमा होनेवाला पैसा जनता का है, इस लिये जरुरी है कि जनता का पैसा कहाँ खर्च हो रहा है इसकी जानकारी जनता को मिलनी चाहिए। जनतंत्र में ग्रामसभा, वार्ड सभा और मौहल्ला सभा की अनुमति से पैसा खर्च होना जरुरी है। उनकी अनुमति के बगैर अपनी मनमर्जी से अगर पैसा खर्च होता हो तो जनता उन ग्रामपंचायत सदस्यों को, महापालिका कार्पोरेटर को बरखास्त कर सकेगी, ऐसे कडे प्रावधान कानून में होंगे तो ही जनता के पैसे खर्च करने में पारदर्शिता आयेगी और योजनाओं में पनपे भ्रष्टाचार को रोक थाम लगेगी। आज मंत्रालय में मंत्री, जनप्रतिनिधी, अधिकारियों ने सत्ता को अपने ही हाथ में केंद्रित रखने के कारण योजनाओं में भ्रष्टाचार बढता ही गया है। सत्ता का विकेंद्रिकरण होना बहुत जरुरी है।
        जनता कई सालों से सत्ता में विकेंद्रिकरण की माँग कर रही है, लेकिन अगर आपकी पार्टी की सरकार सत्ता विकेंद्रित करने के लिये तैयार नहीं है, तो कैसे भ्रष्टाचार को रोकथाम लगेगी?  आपने भ्रष्टाचार से लडने की बात की है। भ्रष्टाचार के विरोध में वह लडाई सत्ता को विकेंद्रित किये बिना कैसे लडेंगे ?
        आपकी सरकार को अगर भ्रष्टाचार को मिटाने की मन से इच्छा है तो सशक्त जनलोकपाल के साथ साथ राईट टू रिजेक्ट, ग्रामसभा, वार्डसभा, मोहल्ला सभा को पुरे अधिकार देने वाला सशक्त कानून बनाना होगा। दफ्तर दिरंगाई को हटाना हो तो एक टेबल का पेपर सात दिन के अंदर अगले टेबल पर जाना चाहिये। यदि ऐसा हो तो रिश्वत देने की नौबत ही नहीं आयेगी। जनता की सनद बनाई जाये। ऐसे कडे कानून अगर बन जाएं और उन कानूनों पर सही अमल हो, कानून का पालन ना करने वालों को कडी सजा का प्रावधान हो तो ""भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना साकार होगा ''। कडे कानून बनाये जाएं इसलिए हम देढ साल तक देश के हर राज्य में जा कर जनता को जगाने का प्रयास करेंगे। जनता संगठित हो कर अहिंसा के मार्ग से देश भर यदि आंदोलन करती है तो यह भी जनतंत्र, लोकशाही को मजबूत करने का ही मार्ग है। देश में लोकशिक्षा, लोकजागृति के लिये हम बिहार के महात्मा गांधी मैदान, पटना से, जहां से महात्मा गांधीजी ने, जयप्रकाश नारायण जी ने आंदोलन की शुरुआत की थी, वहीं से शुरुआत कर रहे हैं। हमारा आंदोलन किसी पक्ष-पार्टी के विरोध में नहीं है। जनतंत्र की मजबूती के लिये संविधान ने जनता को जो अधिकार दिये है उनमें आंदोलन करने का भी अधिकार है। यह आंदोलन उसीका एक हिस्सा है। आप पार्टी के माध्यम से और हम लोग आंदोलन के माध्यमसे जनतंत्र को मजबूत करेंगे, आम आदमी को आधार देंगे ता कि जीना आसान हो। साथ ही साथ अमीर गरीब में फासला कम हो, आर्थिक विषमता कम हो और जनता को प्रजातंत्र का अनुभव हो।
धन्यवाद।

भवदीय,
               
कि. बा. उपनाम अण्णा हजारे.
रालेगणसिद्धी.
22 जनवरी 2013.

क्या ताहिल उल कादरी पाकिस्तान के अन्ना हजारे हैं?

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Tahirul Qadri  Anna Hazare 


मुहम्मद ताहिर उल कादरी पाकिस्तान में जाना-पहचाना नाम है। यह शख्स सूफी धर्मगुरु है और कुछ वक्त तक पाकिस्तान की सियासत से बाहर था। अब वह मुल्क के सिस्टम में भरी गंदगी दूर करने का नारा देकर कनाडा से वापस लौट आएं हैं और उनकी वापसी ने पाकिस्तान में राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है। वह इस्लामाबाद में संसद के बाहर हजारों समर्थकों के साथ डटे हुए हैं। आइये जानते हैं उनके बारे में : 

कौन हैं और क्या चाहते हैं कादरी 
2010 में कादरी ने धार्मिक संदेश जारी कर आतंकवाद और आत्मघाती हमलों की खिलाफत की थी। इसने उन्हें लोकप्रिय बनाया। वह एक शैक्षणिक और धार्मिक संगठन चलाते हैं जिसकी मौजूदगी दुनियाभर में है। वह अपराधियों को राजनीति से बाहर करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के राजनीतिक तंत्र में बदलाव लाने की ठानी है। कादरी ने संकल्प लिया है कि जब तक ऐसा नहीं होता तब तक वह वापस नहीं जाएंगे। एक इंटरव्यू में उन्होंने 'चुनावी तानाशाही' और 'तहरीर स्कवायर' जैसी स्थिति की तरफ इशारा किया। वह ऐसा सिस्टम चाहते हैं जिसमें उम्मीदवारों की ईमानदारी की जांच की जाए। इस मांग के चलते विश्लेषक उनकी तुलना अन्ना हजारे और लोकपाल आंदोलन से करने लगे हैं। 

जनसमर्थन और कद 
लोगों के कादरी के समर्थन में आने की वजह पाकिस्तान में आतंकवादी हमले, जनाक्रोश और प्रशासन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है। ऐसा लगता है कि कादरी को सेना का समर्थन हासिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में उथल-पुथल सुनिश्चित करने के लिए रावलपिंडी (यहां सेना का मुख्यालय है) ने उन्हें खड़ा किया है। ज्यादातर पाकिस्तानियों को सूफी विचारधारा से कोई दिक्कत नहीं है। 

ताजा संकट 
पाकिस्तान में मार्च में आम चुनाव होने हैं। अगर वहां एक असैन्य सरकार के हाथ से सत्ता दूसरी असैन्य सरकार के हाथ में जाती है तो पाकिस्तान में ऐसा पहली बार होगा। पाक का सियासी माहौल इस वक्त नवाज शरीफ के पक्ष में है। वह सेना पर लगाम कस सकते हैं। ऐसे में आर्मी देश में राजनीतिक उथल-पुथल चाहेगी ताकि चुनाव टल जाएं और वहां एक कमजोर अंतरिम सरकार आ जाए। 

amitabh bachchan नहीं anna hazare हैं एंग्री यंग मैन : निदा फाजली नहीं अन्ना हैं एंग्री यंग मैन : निदा फाजली

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मशहूर शायर निदा फाजली ने कहा कि अमिताभ बच्चन की तुलना आतंकवादी अजमल कसाब से नहीं की। उनके बयान को तोड़ा मरोड़ा गया है। फाजली के अनुसार एंग्री यंग मैन अमिताभ नहीं अन्ना हजारे हैं।

यह विवाद हिन्दी की एक साहित्यिक पत्रिका को फाजली के भेजे पत्र के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘एंग्री यंग मैन’ की छवि लेखक सलीम जावेद ने गढ़ी थी जिस तरह कसाब को आतंकवादी हाफिज मोहम्मद सईद ने बनाया था। 

फाजली ने कहा कि मैने कभी अमिताभ को आतंकवादी नहीं कहा। मेरे बयान को सनसनी फैलाने के लिए तोड़ मरोड़कर पेश किया और नया विवाद पैदा कर दिया। मैने एंग्री यंग मैन की छवि के बारे में बयान दिया था, अमिताभ के बारे में नहीं।

उन्होंने कहा कि अमिताभ बेहतरीन कलाकार हैं और बहुमुखी प्रतिभा के धनी है। हर कलाकार की तरह हालांकि उनकी भी सीमाएं हैं।

फाजली ने पत्र में लिखा था, 'अमिताभ को एंग्री यंग मैन की उपाधि से क्यों नवाजा गया। वह तो केवल अजमल कसाब की तरह गढ़ा हुआ खिलौना है। एक को हाफिज मोहम्मद सईद ने बनाया और दूसरे को सलीम जावेद ने गढ़ा।
खिलौने को फांसी दे दी गई लेकिन खिलौना बनाने वाले को पाकिस्तान में उसकी मौत की नमाज पढ़ने खुला छोड़ दिया।

उन्होंने इस पर सफाई देते हुए कहा कि मेरा मानना है कि एंग्री यंग मैन की छवि को सत्तर के दशक में सीमित क्यों कर दिया गया और फिर अमिताभ को ही एंग्री यंग मैन क्यों कहा गया। क्या 74 वर्षीय अन्ना हजारे को हम भूल गए। तब से ज्यादा गुस्सा तो आज है। (भाषा)

अन्ना ने बदली जनांदोलन की दिशा

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नई दिल्ली : सामूहिक दुष्कर्म से पीड़ित युवती को इंसाफ दिलाने के लिए राजधानी की सड़कों पर उमड़े लोगों का हुजूम पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से बेखौफ है। खास कर युवा न तो पुलिस की लाठी से डर रहे हैं और न ही उन्हें गिरफ्तारी देने में झिझक हो रही है। लोगों में आई इतनी हिम्मत अन्ना के आंदोलन से प्रेरित है। विरोध प्रदर्शन में आए लोग स्वीकार करते हैं कि अन्ना हजारे ने देश के लोगों को प्रशासन के खिलाफ डट कर खड़े होने का संबल प्रदान किया है। इस प्रदर्शन में भी अन्ना आंदोलन की झलक दिख रही है। हजारों की संख्या में लोग बगैर किसी संगठन व नेता के अपना हक मांग रहे हैं। तिरंगा लेकर, व बैनर, पोस्टर तथा नुक्कड़ नाटक के जरिए प्रदर्शन भी अन्ना आंदोलन की याद दिला रहा है।

रविवार को जेएनयू से इंडिया गेट पर प्रदर्शन करने आए छात्र राजेश वर्मा ने बताया कि अन्ना आंदोलन से पहले लोगों के विरोध करने का तरीका संकुचित था। वे या तो जंतर-मंतर पर या किसी तय जगह पर एकत्रित होते थे। प्रदर्शनकारी कुछ देर नारेबाजी अथवा अनशन के बाद अपना प्रदर्शन समाप्त कर देते थे। अन्ना ने लोगों को लंबे समय तक आंदोलन करने तरीका सिखाया। दुष्कर्मी को फांसी पर लटकाने की पंट्टी लिए व्यवसायी सूरज प्रसाद के मुताबिक लोगों ने पिछले ही वर्ष 84 वर्षीय व्यक्ति अन्ना को सर्वोच्च तंत्र से लड़ते देखा। उनका साथ देने के लिए देश भर के लोग दिल्ली की सड़कों पर उतर आए। चूंकि उनका मकसद पाक-साफ था। नतीजतन पुलिस की ज्यादतियों के बावजूद प्रदर्शनकारी अडिग रहे। इस घटना से लोगों में बैठा पुलिस प्रशासन का डर भी समाप्त हो गया। इसकी ही परिणति थी कि शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने नार्थ ब्लाक तक को घेर लिया।

एपीजे अब्दुल कलाम ने किया हजारे का समर्थन

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नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की मुहिम का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि हजारे ने जो मार्ग अपनाया है, उससे भ्रष्टाचार के खिलाफ निश्चित ही सख्त कानून आएगा।

एक कार्यक्रम में यहां शिरकत करने पहुंचे कलाम ने नैतिक मूल्यों पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, 'मैं युवाओं को देश में बदलाव लाते देखना चाहता हूं। 2003 में युवाओं ने पूछना शुरू किया था कि वे देश के विकास में किस तरह योगदान कर सकते हैं।

अब वे पूरे विश्वास के साथ कहते हैं कि हम बदलाव ला सकते हैं। इसने मुझे यकीन दिलाया है कि 2020 तक भारत आर्थिक रूप से विकसित मुल्क बन जाएगा।' उन्होंने माना कि देश को आज दूरदर्शी नेताओं की जरूरत है।

अन्ना का 30 जनवरी से पटना में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन संघर्ष का द्वितीय चरण शुरू होगा


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नई दिल्ली| भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कर्णधार अन्ना हजारे ने एक बार फिर सामने आकर भ्रष्टाचार के विरोध में चलायी जा रही मुहीम को दोबारा छेड़ दिया है। अभी बीते दिन ही अपने शुभ चिंतकों को अपने बेहतर स्वास्थ्य की सूचना देने वाले अन्ना ने मंगलवार को भ्रष्टाचार तथा केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के खिलाफ देशभर में यात्रा करने की घोषणा की 

समाजसेवी अन्ना हजारे ने मंगलवार को कहा कि संसद भंग करने का समय आ गया है। अन्ना हजारे ने कहा कि मैं 30 जनवरी को बिहार के पटना से केंद्र सरकार तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ यात्रा शुरू करूंगा। संसद में बैठे लोग अन्य देशों को भारतीय बाजार में आने की अनुमति दे रहे हैं।

अन्ना ने किया इलेक्ट्रॉनिक नकद हस्तांतरण योजना का विरोध


anna hazare, cash for subsidy anna hazare, cash for subsidy anna hazare, cash for subsidy anna hazare, cash for subsidy anna hazare, cash for subsidy anna hazare, cash for subsidy अन्ना हजारे ने यूपीए सरकार की इलेक्ट्रॉनिक नकद हस्तांतरण योजना का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इससे सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को फायदा होगा, गरीबों को नहीं.

सीताराम जिंदल अवॉर्ड समारोह में शिरकत के लिए आए अन्ना ने कहा, ‘इससे गरीबों को मदद नहीं मिलने वाली. आगामी चुनावों को देखते हुए इसकी घोषणा की गयी है.’

उन्होंने कहा, ‘इससे खास तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को फायदा होगा न कि लोगों को.’

इस मौके पर ‘आर्ट ऑफ लीविंग’ के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने कहा कि युवा और राजनीतिक वर्ग में तारीफ और आलोचना दोनों ही सहन करने की बराबर काबिलियत होनी चाहिए.

गिरफ्तार विधायक सुरेश जैन को मिल रहा वीआईपी ट्रीटमेंट: अन्ना


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अहमदाबाद। समाजसेवी अन्ना हजारे का आरोप है कि हाउसिंग घोटाले में गिरफ्तार विधायक सुरेश जैन को अस्पताल में वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा है। अन्ना ने इस संबंध में पुलिस आयुक्त मीरा बोरवनकर को पत्र लिखकर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

महाराष्ट्र के जलगाव से शिवसेना विधायक सुरेश जैन को 29 करोड़ रुपये के हाउसिंग घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें बीमारी के चलते सेंट जॉर्ज अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अन्ना का आरोप है कि अधिकारियों की मिली भगत के चलते सुरेश जैन को वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा है। इस मामले की जांच करवाई जाए।

दरअसल, गरीबों के लिए बनाए जाने वाले 123 करोड़ के घरकुल हाउसिंग सोसाइटी में 29 करोड़ रुपये का घपला हुआ था।

इस मामले में भ्रष्टाचार को लेकर आवाज अन्ना हजारे ने उठाई थी, लेकिन मामले में पहली एफआईआर 2006 में दर्ज हुई। केस दर्ज होने के पांच साल तक जाच नहीं हो पाई, लेकिन पिछले महीने इस केस से जुडे़ दो अहम आरोपी और खानदेश बिलडर्स के डायरेक्टर्स मेजर नाना वाणी और राजा मयूर को गिरफ्तार किया गया।

इसके बाद इन दोनों के बयान के आधार पर जलगाव महापालिका के उस वक्त के उच्चाधिकार समिती के अध्यक्ष रहे प्रदीप रायसेनी और तत्कालीन मुख्याधिकारी रहे पीडी काले को गिरफ्तार किया गया और उनके बयानों के आधार पर शिवसेना विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश दादा जैन की गिरफ्तारी की गई थी।

जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएं बाल ठाकरे: अन्ना


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रालेगण सिद्धि। वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए कहा है कि ठाकरे जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएं। अन्ना ने कहा कि बाला साहेब ठाकरे वाहिद थे जिनको युवा की भाषा समझ में आती थी।

उन्होंने बाला साहेब ठाकरे की स्वास्थ की कामना करते हुए कहा कि युवकों की भाषा किसी को समझ में आई तो बाला साहेब को। इसलिए देश के किसी भी प्रांत के युवकों को वो अपनी ओर आकर्षित करते हैं। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि वो जल्द से जल्द ठीक हो जाएं। दूसरी तरफ मातोश्री से खबर आ रही है कि ठाकरे की सेहत स्थिर है। शिवसेना एमपी अनिल देसाई ने बताया कि बालासाहेब ठाकरे की तबियत स्थिर है। दवाओं का असर हो रहा है। शिवसैनिक शांति बनाए रखें और भगवान से दुआ करें।

गन्ना किसान आंदोलन : केजरीवाल और अन्ना का समर्थन


गन्ने की सियासत ऐसी गरमाई है कि सांगली का संग्राम अब महाराष्ट्र की महाभारत बन गया है. पुलिस की पकड़ में किसान नेता राजू शेट्टी और शरद पवार के शेट्टी पर आरोप. अन्ना कहते हैं कि सरकार किसानों का हित नहीं चाहती और बुधवार को शिवसेना इस मुद्दे पर राज्य के 3 शहरों में बंद बुला रही है.
किसानों ने गन्ने की वाज़िब क़ीमत मांगी थी. पुलिस ने गोली दाग दी. अपने पसीने से मिठास के दाने उगाने वाला किसानों ने पुलिसवालों को अपना पहरेदार माना था. लेकिन एक गोली सीधे चंद्रकांत नलावड़े के सीने में धंस गई. इस कातिल गोली के बाद अब सियासत के गोले दागने का सिलसिला शुरू है.

किसान चंद्रकांत के अंतिम संस्कार के लिए तैयार न थे तो सांगली के पालक मंत्री और महाराष्ट्र के पुनर्वास मंत्री पतंगराव कदम मजिस्ट्रेटी जांच का मरहम लगाने पहुंचे. पतंगराव कदम ने कहा, 'हमने चंद्रकांत नलावड़े के परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी ले ली है. जल्द ही उन्हें मुआवजा मिल जाएगा. हम मजिस्ट्रेट के जरिए इसकी जांच कराएंगे. ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसी स्थिति में हम उनका साथ नहीं छोड़ रहे हैं.'

किसानों ने पुलिस के संगीनों के साये में चंद्रकांत नलावड़े का अंतिम संस्कार तो कर दिया लेकिन वो गन्ने के दाम पर समझौते के लिए तैयार नहीं हैं. दरअसल हतकनंगले के सांसद और शेतकरी किसान संगठन के प्रमूख राजू शेट्टी की गिरफ्तारी से किसान और गुस्से में हैं.

सतारा से लेकर कोल्हापुर और सांगली तक किसानों का आंदोलन इतनी तेज़ी से बढ़ रहा है कि एनसीपी के मुखिया शरद पवार को अपनी ज़मीन खिसकने की चिंता सताने लगी है. इसीलिए वो किसानों के क्रोध के लिए राजू शेट्टी को कोस रहे हैं.

शरद पवार ने कहा, 'अगर राजू शेट्टी को वाकई में किसानों की चिंता है तो पहले अपने इलाके के कारखानों को बंद कवाए और बाद में दूसरे के इलाकों में जाए. खुद की दुकान चालू रखते हो और दूसरे की दुकान बंद करवाते हो ये कहां से ठीक है.'

शरद पवार की इस दुकानदारी पर मचे दंगल में कूदने के लिए अब दिल्ली से भी खिलाड़ी कूच करने वाले हैं. अरविंद केजरीवाल यरवदा जेल में बंद राजू शेट्टी से मिलने पुणे पहुंचने वाले हैं तो अन्ना हजारे ने भी राजू शेट्टी के समर्थन का एलान कर दिया है.

किसान, केजरीवाल और अन्ना के इस जुटान पर महाराष्ट्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की राजनीति करने वालों के कान खड़े हो गए हैं. इसलिए विपक्ष के नेता एकनाथ खडसे अलग से खम ठोक रहे हैं.

राजू शेट्टी गन्ने की कीमत बढ़ाने के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. किसान भी उनके साथ जुड़ते जा रहे हैं. इससे चीनी मिल चलाने वाले एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं को अपनी सियासत फीकी होने की फिक्र सता रही है क्योंकि किसान मुनाफे की मिठास में अपने पसीने का हिस्सा लिए बगैर पीछे हटने को तैयार नहीं है.

अन्ना के नए केजरीवाल हैं जनरल वी. के. सिंह

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नई दिल्ली।सोमवार को एक बार फिर अन्ना हजारे की दहाड़ सुनाई दी। मुंबई में पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी. के सिंह के साथ मीडिया से मुखातिब हुए अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला किया। इस दौरान पूर्व सेना प्रमुख ठीक उसी अंदाज में अन्ना से किए जा रहे सवालों का जवाब दे रहे थे, जैसे कुछ वक्त पहले तक अरविंद केजरीवाल दिया करते थे। ऐसे में माना जा रहा है कि सिंह ने वह जगह भर दी है, जो अरविंद केजरीवाल के राजनीति में जाने के बाद खाली हो गई थी।

मुंबई में अन्ना हजारे और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्ना से पूछे गए कई सवालों का जवाब पूर्व सेना प्रमुख ने दिया। उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की नई नीतियों के बारे में बताया। अन्ना से पूछे जा रहे टेढ़े सवालों का जवाब सिंह खुद ही दे रहे थे और अपनी तरफ से सफाई भी दे रहे थे। सिंह की यह भूमिका ठीक वैसी ही है, जैसी कि अन्ना के लिए अरविंद केजरीवाल की रही है। जन लोकपाल के लिए चलाए गए आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल ही खुद पहल करके अन्ना से पूछे जाने वाले सवालों के जवाब दिया करते थे।


अन्ना हजारे ने भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व सेना प्रमुख को पूरा सम्मान दिया। देश की यात्रा करने का ऐलान करते हुए अन्ना ने कहा, 'हम सिर्फ दो लोग नहीं हैं। हमारे आंदोलन के समर्थन में लाखों-करोड़ों लोग सड़कों पर उतर आएंगे।' इसके बाद वी. के. सिंह ने ही अन्ना की तरफ से मोर्चा संभाला। उन्होंने न सिर्फ आंदोलन को लेकर रणनीति का खुलासा किया, बल्कि मीडिया के सवालों का जवाब भी दिया। इस तरह से लग रहा है कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह ने मौजूदा टीम अन्ना में वही स्थान हासिल कर लिया है, जो पुरानी टीम अन्ना में अरविंद केजरीवाल का था।

मेरी वजह से गिरे मनमोहन सरकार के छह विकेट : अन्ना हजारे

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पुणे।। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे अन्ना हजारे मनमोहन मंत्रिमंडल में हुए बदलाव में अपनी जीत देख रहे हैं। अन्ना ने कहा कि उन्होंने मनमोहन सरकार के छह विकेट गिराए।

पुणे में रविवार को अन्ना ने कहा, 'मेरे चरित्र पर कोई दाग नहीं है, इसलिए मैं इन गुंडों के खिलाफ अब तक लड़ पाया हूं। और देखिए, मैंने छह कैबिनेट मंत्रियों के विकेट ले लिए।'

रविवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल से पहले तीन कैबिनेट और चार राज्य मंत्रियों ने इस्तीफा दिया। इस्तीफा देने वाले मंत्री एसएम कृष्णा, अंबिका सोनी, मुकुल वासनिक, सुबोध कांत सहाय, महादेव खंडेला, विन्सेंट पाल और अगाथा संगमा हैं। इनमें सुबोध कांत सहाय ही ऐसे हैं, जो कोयला घोटाले को लेकर विवादों में रहे थे।

हाल ही में आंख का ऑपरेशन कराने के बाद अन्ना हजारे आराम कर रहे हैं, लेकिन वह मैदान में उतरने को बेचैन हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्दी ही देश की यात्रा पर निकलेंगे, जो करीब डेढ़ साल चलेगी।

अन्ना हजारे आज कर सकते हैं अपनी टीम का ऐलान


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मुंबई: सामाजिक कार्यकर्ता अन्‍ना हजारे सोमवार को अपनी नई टीम का ऐलान कर सकते हैं। इस बात की पूरी संभावना है कि पूर्व थलसेना अध्‍यक्ष वीके सिंह और अभिनेता आमिर खान उनकी इस नई टीम में शामिल हो सकते हैं। अन्‍ना आज मुंबई में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करेंगे और इस दौरान नई रुपरेखा की योजना का खुलासा कर सकते हैं। 

गौर हो कि बीते माह टीम अन्‍ना को भंग कर दिया गया था। उस समय टीम के अहम सदस्‍य अरविंद केजरीवाल ने अलग राह पकड़ ली और राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया। केजरीवाल से अलग होने के बाद अन्ना हजारे भविष्य की रुपरेखा तय करने के लिए कुछ दिनों दिल्ली में अपने समर्थकों के साथ मुलाकात की थी। 

इससे पहले, गांधीवादी अन्ना हजारे ने अपने आंदोलन के नए चरण से अभिनेता आमिर खान को जोड़ने की इच्छा जताई है। अन्‍ना जनवरी से नए सिरे से अपनी भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम छेड़ सकते हैं। उन्‍होंने जनवरी माह से पटना से आंदोलन शुरुआत करने की घोषणा कर रखी हे। 


अन्‍ना हजारे के करीबी सूत्रों ने बताया कि वह आमिर के हज यात्रा से लौटने के बाद उनसे इस बाबत बातचीत करेंगे। गौर हो कि आमिर पिछले साल दिल्ली के रामलीला मैदान में हजारे के आंदोलन को समर्थन जता चुके हैं। सूत्रों के अनुसार संभवत: इन्हीं चीजों के चलते हजारे ने आमिर को अपने साथ जोड़ने की योजना बनाई होगी। गौरतलब है कि आमिर ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर मजबूत भ्रष्टाचार विरोधी प्रणाली लाने की मांग भी की थी।

टीम अन्ना के भंग होने के बाद से अन्‍ना हजारे अपने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के लिए नई टीम को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटे हैं और उन्होंने इसके लिए कई पूर्व आईएएस अधिकारी, पूर्व सरकारी कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों आदि से बात की है। 

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