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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

जनतंत्र मोर्चा नहीं लड़ेगा चुनाव: अन्‍ना हजारे


नई दिल्ली - सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि उनका नवगठित ‘जनतंत्र मोर्चा’ राजनीतिक दल नहीं बनाएगा और ना ही चुनाव लड़ेगा। हजारे ने कहा कि जनतंत्र मोर्चा का मुख्य उद्देश्य संघर्ष होगा और वे पार्टी का ध्यान किए बिना केवल अच्छे उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। 

अन्‍न हजारे ने कहा कि जनतंत्र मोर्चा कोई चुनाव नहीं लड़ेगा या कोई राजनीतिक दल नहीं बनाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य संघर्ष होगा। हम पार्टियों का ध्यान किये बिना अच्छे उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। उन्होंने एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि उम्मीदवार का चरित्र अच्छा होना चाहिए, उसका पिछला रिकार्ड अच्छा होना चाहिए और अच्छी छवि होनी चाहिए। हजारे ने कहा कि यदि उनकी साथी पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी चुनाव लड़ती हैं तो वह उन्हें अपना समर्थन नहीं देंगे।

अम्बाला से भ्रष्टाचार का बिगुल फूंकेंगे 'अन्ना'

चंडीगढ़ : देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ डंका बजाने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे अब हरियाणा में भ्रष्टाचार का बिगुल बजाएंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार अगले महीने 4 अप्रैल को अम्बाला से अन्ना का हरियाणा दौरा शुरू होगा,जो 10 अप्रैल को सोनीपत में खत्म होगा। अन्ना की इस मुहिम में इस बार अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी नहीं रहेंगे,बल्कि योग गुरु स्वामी रामदेव, जनरलवी.के.सिंह,एन.गोविंदाचार्य व डा.भीमराव अम्बेदकर के पौत्र प्रकाश अम्बेदकर भी हुंकार भरेंगे। अन्ना के दौरे को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। 

इसमें पानीपत में दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन के अध्यक्ष एडवोकेट सतबीर हुड्डा की अगुवाई में समान शिक्षा रैली को भी संबोधित करेंगे।  बता दें कि भ्रष्टाचार की लड़ाई शुरू करने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे का हरियाणा दौरा बीते फरवरी महीने में प्रस्तावित था लेकिन किन्हीं कारणों से अब यह 4 अप्रैल से शुरू होगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार अन्ना हजारे 4 अप्रैल की दोपहर को अम्बाला शहर से अपने मिशन का आगाज करेंगे। उसके बाद यमुनानगर,जगाधरी व कुरुक्षेत्र में लोगों को भ्रष्टाचार की लड़ाई में साथ देने का आग्रह करेंगे।  5 अप्रैल को अन्ना हजारे की सभा करनाल के तरावड़ी,नीलो खेड़ी, घरौंडा,करनाल शहर होते हुए पानीपत में समान शिक्षा रैली में भाग लेेकर जींद में रात्रि ठहराव करेंगे।

 6 अप्रैल को मिर्चपुर,बरवाला, अग्रोहा, फतेहाबाद,ढींग मंडी होते हुए सिरसा पहुंचेंगे। 8 अप्रैल को दादरी, नारनौल,महेंद्रगढ़, अटेली व रेवाड़ी में लोगों को सरकार में फैले भ्रष्टाचार के बारे में बताएंगे। इसी तरह से अन्ना हजारे 9 अप्रैल को पटौदी, मेवात, नूंह, सोहना व गुडग़ांव में लोगों को संबोधित करने के साथ ही 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के क्षेत्र झज्जर,गोहाना,रोहतक व सोनीपत में भ्रष्टाचार के कारनामों का खुलासा करेंगे।  अन्ना के हरियाणा दौरे की कमेटी में शामिल एडवोकेट सतबीर हुड्डा की मानें तो अन्ना के दौरे का मकसद लोगों को भ्रष्टाचार की लड़ाई में शामिल करना है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में जिस तरह से भ्रष्टाचार व घोटाले उजागर हुए हैं, उससे हरियाणा की साख काफी गिरी है। इन्हीं मुद्दों पर राज्य की जनता को जागरुक किया जाएगा।

women's day 2013 : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर क्या महिला शुरक्षित है ??

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भारतीय संस्कृति मातृ-प्रधान संस्कृति रही है। इस नाते पारिवारिक दायरे से लेकर सांस्कृतिक प्रभावों में देश की महिलाओं का वर्चस्व बना रहा है। पौराणिक दृष्टि से देखें तो हमारी प्राचीन संस्कृति में नारी की महत्ता सदैव अप्रतिम मानी गई है। यानी हम कह सकते है-"यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमन्ते तत्र देवता" (जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं।) 

मौजूदा दौर में हम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाकर भी इनकी गरिमा को याद रखा करते हैं। विश्वव्यापी तौर पर आठ मार्च को प्रतिवर्ष हम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हम मनाते हैं और इस सदी में इनके योगदान की मीमांसा करते हैं। लेकिन, व्यापक परिप्रेक्ष्य में आज भी हमारे सामाजिक दायरे में ऐसी विसंगतियां देखने को मिल जाती हैं, जो इनकी गरिमा के विपरीत रहा करती है। ऐसी प्रवृत्ति हमारी दकियानूसी सोच का ही अभिप्राय है। 

अगर ऐसा न होता तो जिस दिन सारी दुनिया में जहां महिला दिवस मनाया जा रहा था। उसी दिन महिलाओं को उत्पीड़ित किए जाने से लेकर उनकी हत्या तक के मामले घटित नहीं होते। जिस महिला दिवस को आधी दुनिया या आधी आबादी के रूप में हम आंकते रहे हैं, उसी आधी दुनिया में विसंगतियों का ऐसा जंजाल आज तक क्यों नहीं मिट पाया है? इस बात का जवाब दिया जाना वाकई टेढ़ी खीर है?

सच्चाई का दायरा तो वास्तव में महिलाओं की अकूत श्रमशीलता, गृहस्थ धर्म, पारिवारिक संस्कार और जीवनदर्शन के तमाम गुणों की अवधारणा पर निर्भर करता है। अंग्रेजी के एक विद्वान का यह कथन कितना सटीक हैः ' टू टीच ए मैन इज इक्वल टू टीच ए मैन, बट टू टीच ए वुमन इज इक्वलेंट टू टीच ए फैमिली" (एक मानव को शिक्षा देना, एक मानव को शिक्षा देने के बराबर है, लेकिन एक महिला को शिक्षा देना, पूरे परिवार को शिक्षा देने के बराबर है।) स्पष्ट है कि महिला का पारिवारिक दायरे में जो योगदान होता है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसीलिए हमारी संस्कृति को मातृ-प्रधान इसलिए माना गया है। 

अफसोस की बात यह है कि आज अपने परिवर्तित दायरे में हम एक दिन तो देश के नारीत्व के नाम समर्पित कर देते हैं। लेकिन, इसके अनुपालन में हमारा समाज उतना तवज्जो नहीं देता जितना उसे देना चाहिए। इन सारी विसंगतियों के पीछे जो मूल कारण है, वह वाकई त्रासदीपूर्ण है। 

चूंकि, राष्ट्रीय परिवेश में जब हम अपने संचार साधनों की समीक्षा करते हैं तो यह साफ जाहिर हो जाता है कि हम अपनी संस्कृति को इस दायरे में कोई महत्व नहीं दे रहे हैं। दूरदर्शन, रेडियो, साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हमें जिस तरह की ऊर्जा मिलनी चाहिए वैसी ऊर्जा आज नहीं मिल पा रही है। इसके पीछे जो तथ्य छिपे हैं, उसकी गंभीरता को समझना चाहिए। 

टेलीविजन के जरिए हमें जो कुछ परोसा जा रहा है उस दिशा में न तो संस्कृति विभाग ही ध्यान दे रहा है और न ही मानवीय गतिविधियों से जुड़े सांस्कृतिक संगठन ही। यदि इसी तरह हमने अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ ली तो न जाने हमारे मानवीय दायरे में किस तरह का भूचाल नहीं आ जाएगा? इसकी चिंता न करते हुए हम यदि इसे सहजतौर पर टालते जाएंगे तो निश्चित तौर पर यह हमारी सभ्यता और संस्कृति को कालिख मलने से चूकेगा नहीं। 


दरअसल, शैक्षणिक संस्थाओं को इस संदर्भ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। यदि हम अपने नौनिहालों को प्रारब्ध की शिक्षा में अपने दायित्व से काट कर रखेंगे तो उनमें परिवर्तन कहां आ पाएगा। यही वह उम्र है जहाँ हम इन नौनिहालों को संस्कारित कर सकते हैं। ऐसा किया जाना अपनी सभ्यता को शिखर तक पहुंचाना ही है।

सात दिनों तक हरियाणा में यात्रा निकालकर क्रांति का आगाज करेंगे अन्ना


लोकपाल के लिए लड़ाई लड़ने वाले प्रमुख समाजसेवी अन्ना हजारे हरियाणा में यात्रा निकालकर क्रांति का आगाज करेंगे। अन्ना की यात्रा राज्य में 4 अप्रैल से शुरू होगी और 11 अप्रैल को उत्तरप्रदेश की ओर रुख करेगी। अन्ना की जनतंत्र यात्रा का कार्यक्रम सोमवार को गुड़गांव के मैत्री भवन में आयोजित बैठक में लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता पूर्व थल सेना अध्यक्ष वीके सिंह ने की।

अन्ना के प्रदेश टीम के सदस्य सुभाष पूनिया ने बताया कि अन्ना की यात्रा पंजाब में पहली अप्रैल से शुरू होगी और 3 अप्रैल तक पंजाब में ही यात्रा जारी रहेगी। हरियाणा में यह यात्रा 4 अप्रैल को सुबह सबसे पहले राजपुरा में प्रवेश करेगी। इसके बाद अंबाला, यमुनानगर के रास्ते कुरुक्षेत्र पहुंचेगी और रात्रि पड़ाव भी कुरुक्षेत्र में ही होगा। 5 अप्रैल को यात्रा कुरुक्षेत्र से करनाल की ओर रुख करेगी तथा पानीपत के रास्ते जींद पहुंचेगी तथा अन्ना रात्रि को जींद में ही रुकेंगे। 6 अप्रैल को बरवाला, अग्रोहा फतेहाबाद के रास्ते यात्रा सिरसा पहुंचेगी। 7 अप्रैल को सिरसा से चौपटा, भट्टूकलां, आदमपुर व हिसार होते हुए रात्रि पड़ाव भिवानी में होगा। 8 अप्रैल को यात्रा दादरी, नारनौल के रास्ते रेवाड़ी पहुंचेगी। 9 अप्रैल को यात्रा मेवात के रास्ते गुड़गांव के लिए निकलेगी और रात्रि ठहराव भी गुड़गांव में होगा। 10 अप्रैल को यात्रा झज्जर, रोहतक के रास्ते सोनीपत पहुंचेगी। अगले दिन सोनीपत से यात्रा उत्तरप्रदेश के लिए रवाना होगी। सुभाष पूनिया ने बताया कि 25 मुद्दों को लेकर की जा रही है और इन मुद्दों पर जनता के बीच अन्ना अपनी बात रखेंगे।

अरविन्द केजरीवाल के समर्थन में अन्ना

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लोकायुक्त ही नहीं ला पाए तो कैसे बन पाएंगे मोदी पीएम : अन्ना हजारे

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नई दिल्ली - भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रहे अन्ना हजारे ने लोकपाल बिल के मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा। वहीं लोकायुक्त के बहाने अन्ना ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। अन्ना ने सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी गुजरात में तो लोकायुक्त कानून नहीं बना पाए, तो कैसे भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बना पाएंगे। वो कैसे पीएम बनेंगे।

अन्ना ने सरकार को भी घेरते हुए कहा कि सरकार ने ऐसा क्यों कहा कि हर राज्य में लोकायुक्त होगा। गरीब को हर जगह करप्शन देखना पड़ता, देश में गरीब लोगों को न्याय नहीं दिलाते तो फिर जनलोकपाल का क्या मतलब है। अब सरकार कह रही है कि सीबीआई भी लोकपाल के दायरे में नहीं आएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार और नेताओं से उन्हें कोई अपेक्षा नहीं है। जनता को अपने प्रतिनिधि भेजने पड़ेंगे। मैं डेढ़ साल घूमता रहूंगा और बताऊंगा कि सरकार ने किस तरह झूठ बोला। सोनिया ने लिखा है कि हमने जनलोकपाल संसद में रखा है। मैंने उनको लिखा कि क्या इसमें सीबीआई, सीवीसी है? जब तक इनपर सरकार का कंट्रोल है तब तक कैसा लोकपाल। मैंने सोनिया को लिखा है कि सत्ता जहर नहीं, नशा है।
अन्ना ने कहा कि हमने तय किया है कि मैं डेढ़ साल तक घूमूंगा, गरीबों को न्याय दिलाउंगा। जनरल वीके सिंह भी साथ रहेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो आम चुनाव से पहले रामलीला मैदान में भी बैठूंगा। उन्होंने कहा कि कानून विधानसभा या संसद में बनता है। लेकिन कानून का ड्राफ्ट जनता के साथ मिलकर बनाना चाहिए। जनता को अपने लोग भेजने चाहिए, ताकि सशक्त कानून बन सके।

सरकार दे रही धोखा, फिर करूंगा अनशन: अन्ना

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भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ रहे समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा है कि लोकपाल बिल के नाम पर सरकार शुरू से धोखा देते आई है. अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो अपने वादे से मुकर गए हैं.

लोकपाल बिल पर अन्ना हजारे ने कहा है कि सरकार ने कैबिनेट के सामने जो ड्राफ्ट रखा है, वह हमारा नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार ने जनलोकपाल पर जो भी आश्वासन दिए, वे पूरे नहीं किए. सरकार ने हमें धोखा दिया है.

अन्ना ने आगे कहा कि सीबीआई और सीवीसी लोकपाल के दायरे में आने चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि लोकपाल को लेकर ज्वाइंट कमेटी बनाई गई थी, उसका क्या हुआ.

अन्ना ने सोनिया गांधी पर निशाना साधा, 'सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल गांधी से कहा था कि सत्ता जहर है. मैंने उनसे पूछता हूं कि अगर ऐसा है तो हर कोई इसके पीछे क्यों भागता है. सत्ता जहर नहीं नशा है.'

नरेंद्र मोदी के पीएम पद की उम्मीदवारी के बारे में अन्ना हजारे ने कहा, 'नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री पद के लिए सही नहीं हैं. नरेंद्र मोदी ने गुजरात में लोकायुक्त नहीं बनने दिया था.' वहीं राहुल गांधी के बारे में अन्ना बोले, 'परिवारवाद देश के लिए बहुत घातक है. देश को चलाने के लिए उनके पास कोई अनुभव नहीं है.' वहीं किरण बेदी के नए लोकपाल बिल के समर्थन के बारे में अन्ना ने कहा, 'अगर वो ऐसा कर रही हैं तो इसका मतलब उन्हें इसके बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है.'

अरविंद केजरीवाल की पार्टी को समर्थन देने के सवाल पर अन्ना ने कहा, 'अगर केजरीवाल चुनाव लड़ेंगे तो मैं उनका समर्थन नहीं करूंगा. मैं सिर्फ अच्छे इंसानों का समर्थन करूंगा. पहले मैं उनका समर्थन कर सकता था लेकिन अब उनकी पार्टी के लोगों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं.'

अन्ना ने कहा, 'अगर जरूरत पड़ी तो मैं एक बार फिर से अनशन करूंगा. मैं पूरे देश का भ्रमण करके लोगों को जागरुक करूंगा.'

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