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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

आम आदमी होगी केजरीवाल की पार्टी , सभी सीटों पर लड़ेगी


नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के मामलों का पर्दाफाश करने में जुटे सामाजिक कार्यकर्ता और इंडिया अगेंस्ट करप्शन के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल की अगले सोमवार को घोषित होने वाली राजनीतिक पार्टी लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर उम्मीदवार खडे़ करेगी। आईएसी के सूत्रों के अनुसार केजरीवाल की पार्टी का नाम संभवतः आम आदमी पार्टी होगा।

टीम केजरीवाल की कोर कमेटी के एक प्रमुख सदस्य ने बताया कि आम आदमी पार्टी का नाम चुनाव आयोग में पंजीकृत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रस्तावित पार्टी में कांग्रेस और भाजपा की तरह अध्यक्ष पद नहीं होगा और न ही वामपंथी दलों की तरह इसमें महासचिव का पद होगा। पार्टी से जुडे़ फैसले एक राष्ट्रीय कार्यकारिणी करेगी और इसमें समन्वय स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय संयोजक का पद होगा।

प्रस्तावित पार्टी का नाम आम आदमी पार्टी क्यों रखा जा रहा है, इसके बारे में उनका कहना है कि जनता की मांग पर यह नाम रखा जा रहा है ताकि आम आदमी को यह महसूस हो कि यही पार्टी सही मायने में उसकी नुमाइंदगी करती है।

उन्होंने बताया कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन की ओर से कराए गए जनमत संग्रह में पहले ज्यादातर लोगों ने सुझाव दिया था कि पार्टी के नाम में स्वराज शब्द आना चाहिए लेकिन बाद में यह सुझाव आया कि पार्टी के नाम में ऐसा कुछ होना चाहिए जिससे लगे कि यह आम आदमी की पार्टी है।

एनएसजी कमांडोज़ के साथ नाइंसाफी की गई: केजरीवाल

नई दिल्ली। मुंबई हमले के दोषी अजमल आमिर कसाब को फांसी के एक दिन बाद उस हमले में घायल एनएसजी कमांडो सुरेंद्र सिंह ने अपनी आपबीती पब्लिक के सामने रखी है। सुरेंद्र ने आरोप लगाया है कि उन्हें 13 महीने से एक रुपये की भी पेंशन नहीं मिली है। वो इलाज भी अपने पैसे से करा रहे हैं। सुरेंद्र इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बैनर तले अरविंद केजरीवाल के साथ मीडिया के सामने आए। अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि मुंबई हमले में जो कमांडो शहीद हुए या फिर घायल हुए सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है। अरविंद ने ये भी आरोप लगाया कि 2 ऐसे कमांडो है जिन्हें मेडिकली अनफिट करार देकर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है।

सुरेंद्र के मुताबिक मुंबई हमले के दौरान घायल होने की वजह से उन्हें अनफिट करार दिया गया उसके बाद उनकी नौकरी भी चली गई। सर्विस से हटाए जाने के बाद उन्होंने आरटीआई का सहारा लिया, लेकिन उन्हें कहा गया कि एनएसजी आरटीआई के तहत नहीं आता है। सुरेंद्र सिंह का कहना है कि उन्हें 13 महीने से एक रुपया नहीं मिला है।



इस बीच सुरेंद्र और केजरीवाल के आरोप का जवाब देते हुए सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार सभी जवानों की इज्जत करती है। सुरेंद्र सिंह को 31 लाख रुपये दिए जा चुके हैं और हर माह 25 हजार पेंशन के तौर पर दिए जा रहे हैं। मनीष की मानें तो सुरेंद्र ने 14 साल तक सेवा की है, उन्होंने ये भी कहा कि सुरेंद्र जो भी बात कह रहे हैं वो गलत है। सरकार के दावे के उलट सुरेंद्र सिंह ने कहा कि उनके बैंक खाते की जांच कराई जाए ताकि पता चले कि उन्हें सरकार से एक भी पैसा नहीं मिला है।

वहीं बीजेपी ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि सेना और पैरा मिलिट्री फोर्सेस के लोग देश की सुरक्षा करते हैं। पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन का कहना है कि बीजेपी किसी नियम की आड़ में पेंशन रोकने को सही नहीं मानती। आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव का कहना है कि अगर इस मामले में सच्चाई है तो फिर ये गंभीर है, उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए।

इस बीच गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने साफ किया कि कमांडो का मामला रक्षा मंत्रालय से जुड़ा है, और वो इस मामले की जांच करेंगे।

झुग्गियां गिराने पर आमाद सरकार को आईएसी की चुनौती, जरूरत पड़ी तो बुलडोजरों के सामने खड़े हो जाएंगे कार्यकर्ता


इंडिया अगेंस्ट करप्शन(आईएसी) के वरिष्ठ कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, गोपाल राय, कुमार विश्वास और संजय सिंह के नेतृत्व में आईएसी के कार्यकर्ता आज शालीमार बाग के हैदरपुर गांव में झुग्गी बस्तियों को सरकार द्वारा जबरन खाली कराने की कोशिशों को विरोध करने पहुंचे. सरकार ने हैदरपुर की 138 झुग्गियों को नवंबर महीने तक हटा देने का आदेश दिया था. इनमें से सिर्फ सात परिवारों को सरकार ने बवाना में बसाने की मंजूरी दी है.

हैदरपुर झुग्गी के निवासियों ने मदद के लिए आईएसी से अनुरोध किया था. हैदरपुर की झुग्गियों में रहने वाले लोगों को अरविंद केजरीवाल ने अपना पूरा समर्थन देते हुए एलान किया कि जरूरत पड़ने पर वह इन झुग्गियों को गिराने के लिए आगे बढ़ रहे बुलडोजरों के सामने खड़े हो जाएंगे.

मंच से अपने संबोधन में अरविंद केजरीवाल ने कहा, “ हैदरपुर की इन झुग्गियों में तीसरी पीढ़ी बड़ी हो रही है और अचानक सरकार ने इनके सर की छत गिराने का तय कर लिया. अगर हैदरपुर के पीड़ित परिवार सरकार की इस मनमानी के खिलाफ संघर्ष को पूरी तरह से तैयार हों तो इनके घरों को गिराने वाले बुलडोजरों के सामने सबसे आगे मैं खड़ा मिलूंगा.”

हैदरपुर की झुग्गियों में रहने वाले बिहार, यूपी, प. बंगाल और देश के दूसरे राज्यों से आए लोग हैं जो छोटी-मोटी नौकरियां या मजदूरी करके अपने परिवार पालते हैं. अरविंद केजरीवाल ने इन मेहनतकश परिवारों की अहमियत गिनाते हुए सरकार से इनकी झुग्गियों को गिराने का फैसला तत्काल वापस लेने की अपील की.

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “ इन झुग्गियों में वे लोग रहते हैं जो अपनी मेहनत से दिल्ली के आलीशान मकानों में रहने वालों लोगों की जिंदगी आसान करते हैं. अगर ऐसे करीब 40 फीसदी आबादी को दिल्ली से बाहर कर दिया जाएगा तो दिल्ली ठप हो जाएगी. सरकार मेहनतकशों का सम्मान करना सीखे. ऐसे कानून बनें कि जिसकी झुग्गी जहां है उसे वहीं पर मकान बनाकर दिया जाए. ”

मंच पर आकर हैदरपुर के स्थानीय लोगों ने अपनी आपबीती सुनाई. एक व्यक्ति ने स्थानीय भाजपा विधायक रवींद्रनाथ बंसल की कार्रवाई के बारे में बताते हुए कहा कि बंसल ने इनकी मदद करने की बजाय दिल्ली आश्रय बोर्ड को एक चिठ्ठी लिखकर कहा कि इन परिवारों की झुग्गियां सर्दियों की बजाय गर्मियों में खाली कराई जाए. अरविंद केजरीवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब वोट बिकने लगेंगे तो जनप्रतिनिधि इसी तरह अपनी जवाबदेही से कन्नी काटना शुरू कर देंगे.

हैदरपुर की झुग्गियों में रहने वाले परिवारों के सरकार ने बिजली पानी के कनेक्शन और मतदाता पहचान पत्र भी बनाए हैं. इन लोगों को 16 नवंबर 2012 तक झुग्गियां खाली कर देने का नोटिस दिया गया था लेकिन दीवाली की वजह से दिल्ली आश्रय बोर्ड ने झुग्गियां खाली करने की डेडलाइन बढ़ाकर 23 नवंबर कर दी है.

लोगों को संबोधित करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा, “सरकार झुग्गियां बसाती है, फिर उजाड़ती है लेकिन सरकार यह क्यों नहीं सोचती कि ये झुग्गियां बनती ही क्यों हैं. कोई भी व्यक्ति खुशी से अपनी मिट्टी से अलग नहीं होना चाहता. परिवार पालने की मजबूरी उसे अपने गांव-घर से हजारों किलोमीटर दूर महानगरों में ले आती है. सरकार को अपनी नाकामियों पर लज्जित होना चाहिए कि वह लोगों को उनके घरों के समीप रोजगार नहीं दे रही. नाकाम सरकार को गरीबों के घर गिराने का नैतिक हक नहीं बनता.”

मनीष सिसोदिया की बात का समर्थन करते हुए कुमार विश्वास ने कहा, “ सरकार यह इल्जाम लगा सकती है कि हम गैर-कानूनी चीजों का समर्थन करने चले आए क्योंकि हमें राजनीति करनी है. सरकार अगर अमीरों और गरीबों के बीच की खाई बढ़ाती चली गई तो देश के सारे कानून, गैर-कानूनी हो जाएंगे. गरीबों का दर्द सरकारों को समझना होगा. ”

हैदरपुर के 139 घर कुल चार एकड़ की जमीन पर बने हैं. सरकार यह जमीन आसपास बने लोकनिर्माण विभाग के सरकारी आवासों का दायरा और सुंदरता बढ़ाने के लिए खाली कराना चाहती है. इस फैसले पर सरकार को घरी खोटी सुनाते हुए संजय सिंह ने कहा, “सरकार गरीबों को धमकाकर भगा रही है लेकिन अंबानी परिवार को उतनी जमीनें एक झटके में दे देती है जितनी अंबानी परिवार मांग करता है. संसद पर संवेदनहीन लोगों ने कब्जा कर रखा है और जनता उन्हें जल्द ही वहां से भगाकर दम लेगी.”

गोपाल राय ने स्थीनाय लोगों को संगठित होकर अपना विरोध जारी रखने का अनुरोध करते हुए कहा, “आज कुछ लोगों से घर खाली कराया जा रहा है, कल कुछ और लोगों को नोटिस आएगी. इस तरह एक-एक करके शहर के सारे गरीबों के घर गिराकर उन्हें बिल्डरों को दे दिया जाएगा जिसपर वे मॉल बना सकें.”

आईएसी ने पीड़ित परिवारों को भरोसा दिलाया है कि वे इसके संघर्ष में हर तरह से उनका साथ देगा. 

IAC Statement on Execution of Ajmal Kasab


Terrorist Ajmal Kasab was hanged in Yerawada Jail in Pune today. IAC welcomes the news as it will bring relief to the families of the victims of the 26/11 and hope to the countless who are still awaiting justice.The State of India has to be unequivocal in its response to terrorism so that the world gets a clear warning that we will not be trifled with.

IAC feels that the State should not have shrouded the hanging in secrecy. A transparent approach would have given a strong message to the world, a clear warning to terrorist groups, and most important, confidence to the citizens that the state is capable of dispensing justice. This much awaited execution could have been handled such that it would unite Indians in the fight against terrorism. On the contrary, the manner in which it has been handled has given rise to numerable conspiracy theories which could have been avoided.

While we commend the execution as it pained every Indian to know that Kasab was alive at the state’s expense and that victims and their families were being denied justice, we must keep in mind that Kasab was one of the pawns of this dastardly attack on the nation’s financial capital and the masterminds are still at large. It is critical that the government intensify its efforts to pinpoint and bring to book all those who planned and delivered this dastardly attack on our soil. We also demand that cases against all other accused in terrorist acts, like Afzal Guru should be dealt with swiftly.

IAC will pays it tribute to the martyrs of 26/11 and assert our support to those injured and the families of those who lost their lives on 26th November 2008. We strongly condemn terrorism and will always stand for swift action against all those who threaten the sovereignty of our Nation.

सरकार ने की 26/11 हमले में जख्मी जवानों की अनदेखी: केजरीवाल


अरविंद केजरीवाल ने अब देश की सुरक्षा में जुटे लोगों की खस्ताहाली का मुद्दा उठाया है.
सरकार पर हमला बोलते हुए केजरीवाल ने बुधवार को एक ऐसे एनएसजी कमांडो सुरेंद्र सिंह को मीडिया के सामने पेश किया जो 26/11 मुंबई हमले के दौरान घायल हो गया था. बावजूद इसके उसे इलाज का पैसा नहीं दिया गया.

केजरीवाल के मुताबिक हमने कसाब को तो फांसी दे दी लेकिन देश के लिए लड़ने वाले दर्दनाक जिंदगी जी रहे हैं. उन्हें पेंशन नहीं मिलती, यहां तक कि अपना मेडिकल बिल भी उन्हें खुद ही उठाना पड़ता है.

सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मुंबई हमले के दौरान लड़ते हुए वह घायल हो गए. 26/11 के दौरान उन्होंने हर आदेश का पालन किया और देश के प्रति अपना फर्ज निभाया लेकिन सरकार ने अपना फर्ज नहीं निभाया.
सिंह के मुताबिक उन्हें अनफिट घोषित कर घर भेज दिया गया. पिछले कई महीने से उन्हें पेंशन भी नहीं मिल रही है.

उन्होंने बताया कि उन्हें इलाज के लिए मिलने वाला ईसीएस कार्ड भी एक साल बाद मिला और जब उन्होंने पिछली तारीखों के बिल का पैसा मांगा तो मना कर दिया गया. उनसे कहा गया कि उन्हें इस बारे में सूचित करना चाहिए था.

सुरेंद्र सिंह ने कहा कि सेवा से बाहर होने के बाद उन्होंने एनएसजी में आरटीआई लगाई लेकिन उन्हें यह कह कर मना कर दिया गया कि एनएसजी बेहद संवेदनशील यूनिट और यह आरटीआई के दायरे में नहीं आता.
सिंह ने बताया कि उन्होंने आरटीआई में जख्मी लोगों का ब्यौरा, किस आधार पर इलाज के लिए कितने पैसे, सम्मानित लोगों को किस आधार पर सम्मानित किया गया जैसे सवाल पूछे थे.

"जागृत मतदार यही लोकशाही का आधार " : अन्ना


                       "जागृत मतदार यही लोकशाही का आधार " 

आज़ादी के बाद देश और देश की जनता की अधोगति के कही कारण है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण कारण हे  उनमे ....



देशके कही मतदार  जागृत नहीं हुये यह स्पष्ट दिखाई देता है। शराब की बोतल लेकर आपना अमूल्य मत देता है। पैसा अथवा कुछ रिश्वत लेकर अपना मत देता है। अपनी जाती-पाती को देखकर मत देता है। धर्म को देखकर मत देता है। रिश्ते देखकर मत देता है। दुसरोंके  कहने पर मत देता है। ,इस कारन गुंडा ,भ्रष्टाचारी ,व्यभिचारी,लुटारू उम्मीदवार संसद और विधानसभा जैसे हमारे लोकशाही के पवित्र मंदिरमें जाते है, ऐसे लोग जनता के उज्वल भविष्य के लिए नहीं सोचते है। आज़ादी के 65 साल के बाद जनता को अपने वोट की कींमत समज में नहीं आई, यह दुर्भाग्य की  बात है। मतदाताओं के एक मत में संसदमें , देशमे बदलाव लाने की शक्ति है ।

   
भ्रष्टाचार मुक्त भारत की निर्मिती करनी है , तो देश के हर नागरिक को यह तय करना है और प्रतिज्ञा  करनी है कि मै भ्रष्टाचार नहीं करने दूंगा ।अपना वोट देने के लिये रिश्वत लेना यह भ्रष्टाचार ही है।मतदार  खुद ही रिश्वत लेकर भ्रष्टाचार करता है, तो ऐसे लोगोंने भ्रष्टाचार मुक्त भारत की अपेक्षा करना  ठिक नहीं है।


इसीलिये देश, गाँव, तहसिल ,जिल्हा स्तर  के सभी मतदारों को  जगाना होगा कि, समाज और देश के उज्वल भविष्य के लिए  किसी  पक्ष , पार्टी को न देखते हुए जाती -पाती को न देखते हुये सिर्फ चरित्र्यशिल व्यक्ति को ही मेरा मत दूंगा। मतदार जागृती अभियान चलाने के लिये गाँव स्तर तहशील स्तर, जिला स्तर पर सेवाभावी सामाजिक , राष्ट्रीय दृष्टिकोन है और देश प्रेम की भावना है ऐसे लाखो युवकोने स्वयंसेवक बनकर (वोलंटियर ) इस  काम  को देश सेवा समजकर आगे आने की जरुरत है ।

  जब तक संसद मे चरित्र्यशील उम्मीदवार नहीं जायेंगे तब तक भ्रष्टाचार को रोकनेवाले कानून नहीं बन पाएंगे। भ्रष्टाचार को कुछ हद तक रोकने के लिये जनलोकपाल  के साथ साथ देश मे राईट टू रिजेक्ट ,ग्रामसभा को  पूरा अधिकार, दप्तर दिरंगाई, एक टेबल का पेपर दुसरे टेबलपर सात (7) दिनमे जाना, जनता को दप्तर में बार बार चक्कर लगाना और रिश्वत न देना पड़े , जनता की सनद, हर दफ्तर में जनता का काम कितने दिनों मे करना, समय पर नहीं किया तो उस अधिकारी को दंडात्मक कारवाई हो, मंत्रालय की सत्ता विकेन्द्रित होकर ग्रामसभाको जादा अधिकार देना, संसद अथवा विधानसभा को गाँव की जल, जंगल, जमींन जैसी कोई भी चीज लेनी है तो ग्रामसभा की  अनुमती लेना अनिवार्य करना है। संसद मै ऐसे कानून बन गये तो नब्बे प्रतिशत  (90%) भ्रष्टाचार को रोक थम लग सकेगा।  अपने काम के लिए रिश्वत नहीं देनी पड़ेगी और गरीब आदमी को न्याय मिलेगा।  इस लिए मतदाताओंको  चरित्रशिल  उम्मीदवार को अपना मत देना है ।


    भ्रष्टाचार रोकने के साथ देशमे किसानोका प्रश्न हातमे  लेना होगा, कृषि प्रधान भारत देश में किसानो की समस्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। इसीलिए  आज़ादी के 65 सालके बाद भी  किसान आत्महत्या कर रहे है। ,26 जनवरी 1950 में हमने पहला प्रजासत्ताक  दिन मनाया, उस दिन से देश में प्रजा की सत्ता आ गयी है। प्रजा इस देश की मालिक  बन गई है, सरकारी तिजोरि में जमा होनेवाला  पैसा जनता का है। देश की जल, जंगल, जमीन  जैसी प्राकृतिक सम्पदा यह जनता की है ।सरकारी तिजोरी के पैसेका सही नियोजन और प्राकृतिक संसाधनों का नियोजन करने के लिये जनता ने सविधान के मुताबिक राज्य के लिये एम्एलए  और केंद्र के लिए एमपी  अपने सेवक के नाते भेजे है, मालिक जनता है ।



    राष्ट्रपतिजीने   आएएस ,आयपीएस  जैसे  सनदी अधिकारियोंके (गवर्नमेंट सर्वेन्ट) जनता के सेवक के नाते चयन किया है। सभी  जन प्रतिनिधी  और अधिकारी जनता के सेवक है। दोनो की मिलकर बनी है सरकार। सरकार का काम जनता की सेवा करना  है। संविधान के मुताबिक किसान और गरीब आदमी की विकास की निती बनाने के बजाय विदेशी कंपनियों को यहा बुलाकर उन कंपनियो के  विकास की निती बनवा रही है, सरकार को किसान, मजदुर, गरीब आदमी की चिंता नहीं है  जीतनी विदेशी कंपनीयोंकी है।

  
सरकार  विदेशी कंपनीयों को यंहा  बुलाकर कंपनीयो को देने के लिये किसानो की जमीन जबरदस्ती से ले रही है। किसनोने जमींन नहीं दी तो किसानो पर डंडे चलाये जाते है, डंडो से  किसान बाज  नहीं आये तो किसानों पर गोलीया चलायी जाती है और जबरन किसानो की जमीन विदेशी कंपनीयो को दी जाती है ।
   
   ऐसे  कृती से  स्पष्ट  होता है कि अंग्रोजो की हुकुमशाही और आज की सरकार मे क्या फरक है ?पानी का निजीकरण, जमींन का निजीकरण, जंगलो का निजीकरण, नदियोंका निजीकरण करके सरकार जनता की  प्राकृतिक  सम्पदा विदेशी कंपनी योको बिक्री कर रही है। यह हमारे देशके  लिए बहुत बड़ा खतरा निर्माण हो गया है। वास्तव यह है कि जनता इस देश कि मालिक है। सभी जन प्रतिनिधी और अधिकारी जनता के सेवक है। जनता (मालीक ) कि  प्राकृतिक धनसंपदा सेवकोको (सरकार ) अपने मनमर्जी से बिक्री करने का कोई अधिकार नहीं है। सरकारने जो भी निर्णय लेने है वह जनता की राय लेकर निर्णय लेने है, इससे स्पष्ट होता है की सरकार चलानेवाले सभी सेवक होते हुये मालिक बनकर जनता की संपत्ती को लुट रहे है। क्या इसी को हम जनतंत्र कहेंगे? यही है हमारी लोकशाही ?

  जो  सरकार  संविधान के मुताबिक गरिब, किसानो  की  नहीं सोचती ऐसे  सरकार  को सत्तामे  बैठने का कोई अधिकार नहीं है। वह संविधान के विपरीत है, जो सरकार संविधान का पालन नहीं करती ऐसे सरकार को सत्ता मे बैठने का कोई  अधिकार नहीं है, यह बात स्पष्ट हो रही है, संविधान  का पालन न करने वाली संसद को जनता ने ही भंग करने का समय आ  गया है। कारन संसद जनताने  ही बनाई है। अब पक्ष  और पार्टियों से देश के लिये उज्वल भविष्य नहीं दिखाई दे रहा है, हर पक्ष और पार्टी सत्तासे पैसा  और  पैसा से सत्ता की  होड़में लगी है, आज़ादी के लिये लाखों शहीदोंके बलिदान की याद नहीं रही। समाज और देशके उज्वल भविष्य की सोच नहीं रही। सभी पक्ष और पार्टियोंने सर्व संमतिसे ऐसा कानून बनवाया है की हमारी  पार्टी के  चुनाव के खर्चा के लिये जनतासे जो पैसा (डोनेशन ) मदत मिलेगा उस पैसे से बिस (20) हज़ार  रूपया का डोनेशन का हिसाब नहीं देना है और बड़े बड़े उद्योगपतियोंसे ऐसे करोडो रुपयों का डोनेशन कही पार्टिया लेती है। उनके  बीस (20) हज़ार रुपयोके तुकडे करती है और उन टुकड़ो को बोगस  व्यक्तियौका नाम देती है और  कालाधन यही से सफ़ेद होना शुरू हो जाता है। इसको रोकना है तो सभी पक्ष और पार्टी का डोनेशन का पैसा जप्त  करके सरकारने चुनाव का खर्चा करना है। तब पक्ष और पार्टी का दुर्व्यवहार कम होगा ।


जीन  पक्ष और पार्टियों की  शुरवातही भ्रष्टाचार से होती है  ऐसी  पार्टी देश का उज्वल भविष्य कैसे बना सकती है? इस लिए  जनता ने  पक्ष और पार्टी का सोच न करते हुये जनताने ही चारित्र्यशिल  उमेदवार चुनकर ऐसे उमीदवार को अपना मतदान करना है। संसदमे चारित्र्यशिल लोग भेजनेसे देशमे परिवर्तन आ सकेगा। साथ साथ देश में गाँव, तहसिल, जिला  और राज्यस्तर पर जन आंदोलन करनेवाले करोडो लोगो का संघटन  करना होगा। आज़ादी का अर्थ स्वैराचार लगाकर चलनेवाली  सरकार पर जनशक्ती  का दबाव निर्माण करके, सरकार चाहे किसी भी पक्ष या पार्टीकी  हो सरकार गिराने की शक्ती जनसंघटनमे आ गई तो जनता कहेगी  वह सरकार को करना पड़ेगा अन्यथा सत्ता छोड़कर सरकारको जाना पड़ेगा ।





देश के युवा शक्तीने जनता  को जगाकर संघटित  करने का समय आ गया है। गाव, तहसील, जिला, राज्य स्तर पर बहुत बड़ा संघटन खड़ा करना है। मै  जनवरी से  देड साल देशभर दौरा करके हर राज्य में जाकर जनता को जगाने का प्रयास करूँगा। साथ साथ युवाको ने इस काम के लिये  आगे आना है। ऐसे युवको को अवाहन करूँगा। आज़ादी की दूसरी लड़ाई समजकर राष्र्टीय स्तर पर संघटन खड़ा करने का प्रयास देश की जनता ने सब मिलकर करना है ।


इस  अन्दोलन से जुड़ने वाले कर्यकरतोओने निचे लिखे  पते पर सम्पर्क  करना है ।



(कि .बा. उपनाम अन्ना हजारे  )


दिनांक :-21 नवम्बर 2012


पत्ता                                                                                  दिल्ली  कार्यालय 
भ्रष्टाचार विरोधी जन आन्दोलन                                     इंडिया अगेंन्स करप्शन ,
मु.पो. रालेगन सिद्धी, तहशील - पारनेर,                         बी -18,सर्वोदय एनक्लयु,नियर  मदर स्कूल 
जिल्हा -अहमदनगर, पिन -414302                                हुज  खास रोड ,बारखम्बा रोड ,
पिन -414302                                                                    नई  दिल्ल्ली -110017
फ़ोन नंबर -02488 -240401,240010                                 ईमेल -annahazareofficedelhi@gmail.com
ईमेल -joinbvja@gmail.com
वेब साईट -joinannahazare.org.in



आन्दोलन  को आर्थिक सहयता करने के लिए  निचे दिए हुए -- Bank Details:-


Name :- India Against Corruption
Bank Name :- Bank Of India
Branch Name :- Hauz Khas C&P Banking
Address :-G-1, Hauz Khas Enclave,Mehrauli Road, New Delhi
A/C No-  600520110000486
IFSC Code :- BKID0006005
MICR Code :-110013010

इसपर आप अपनी आर्थिक सहायता चेक या डिमांड ड्राफ्ट से दे सकते है । 

IAC strongly condemns the arrest in Palghar of the young women who expressed an opinion on Facebook


IAC condemns the arrest of two young girls in Thane who expressed their views on Facebook. IAC defend the right to freedom of expression and demands that the State Government explain the incident and take the case back immediately.

There are three shocking aspects of this case: One, it is a sad state for our democracy that political parties have started filing complaints against everyone who has a difference of opinion. This intolerance of views in unacceptable and reeks of arrogance of a party who is used to wielding power as tool of intimidation. 

It is even more shocking that the police which take days to file a murder complaint were so prompt in registering an FIR and arresting the girl who made the post and the other girl who liked it. How is a girl’s dismay over a bandh a threat to the nation! We demand that Maharashtra Police take back the case immediately and issue an unconditional apology. It is unbelievable that the Magistrate ordered 14 days remand! If this is the view of the state then democracy is done and dusted and they must arrest thousands who express their views on social media.

But the saddest part for this state is that vandlism and hooliganism that was displayed in the attack on the girl’s uncle’s office. Patients who were being treated were shunted out of the clinic! Violence and vandalism is not the expression of Maharashtrian pride. Browbeating and intimidating defenseless young girls who are expressing their opinion about a bandh is neither an expression of pride nor manhood. A state that was standing tall yesterday is today hanging its head head in collective shame. 

IAC affirms their support to the young girls. We demand that all charges are dropped immediately and action is taken against all those who have shamed the state and the nation by victimizing young girls who had an innocuous opinion.
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