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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

सांसद भिड़े, बाबा अड़े: रामदेव के खिलाफ नोटिस

बाबा रामदेव के एक विवादित बयान ने देश के सियासी गलियारों में फिर से भूचाल ला दिया है. रामदेव ने कुछ सांसद को 'लुटेरे', 'हत्‍यारे', 'जाहिल' करार दिया है.


दुर्ग में एक सभा में बाबा रामदेव ने कहा कि आज लुटेरे-हत्‍यारे कुर्सी पर बैठे हैं. उन्‍होंने कहा कि जिन्‍हें हमने कुर्सी दी, उन्‍होंने ही देश को लूटा है.


सांसदों के खिलाफ रामदेव की टिप्‍पणी पर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई है. दूसरी ओर अन्‍ना हजारे ने रामदेव के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि पार्टियों को चुनाव में सोच-समझकर टिकट देना चाहिए.


रामदेव के बयान पर कांग्रेस के अलावा बीजेपी ने भी उन्‍हें आड़े हाथों लिया है. बीजेपी नेता यशवंत सिन्‍हा ने कहा कि आज सांसदों का अपमान करना 'फैशन' बन गया है. उन्‍होंने कहा कि जो भी सांसदों का जितना अपमान करने वाला बयान दे रहा है, वह उतना ही बड़ा 'हीरो' है. उन्‍होंने साफ शब्‍दों में कहा कि किसी को भी लोकतांत्रिक मूल्‍यों को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है.


बीजेपी नेता कीर्ति आजाद ने भी कहा कि बाबा रामदेव को सोच-समझकर बयान देना चाहिए. उन्‍होंने कहा कि आज बाबाओं की विश्‍वसनीयता संकट में पड़ गई है.


आरजेडी अध्‍यक्ष लालू प्रसाद ने कहा कि बाबा रामदेव 'मेंटल केस' हैं. उन्‍होंने कहा कि जब कलाम साहब खुद कह चुके हैं कि लोकपाल भ्रष्‍टाचार से निपटने में कारगर नहीं होगा, तो इस पर जोर देना कहां तक सही है?


कांग्रेस नेता जगदंबिका पाल ने कहा कि जब कोर्ट किसी संसद सदस्‍य को दोषी ठहराता है, तो उसकी सदस्‍यता समाप्‍त हो जाती है. उन्‍होंने बाबा रामदेव के बयान को लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था पर कुठाराघात करने वाला करार दिया.


एनसीपी नेता तारिक अनवर ने रामदेव के बयान को 'घटिया' करार देते हुए इसे महत्‍व न देने की अपील की है. बहरहाल, रामदेव के बयान से मचा बवाल अभी थमता नजर नहीं आ रहा है.





महाराष्ट्र में अन्ना के दौरे की अनुसूची

निशाने पर राहुल, सूखाग्रस्त जिलों में भी जाएंगे अन्ना हजारे

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत लोकपाल बिल की मांग पर वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र में रालेगन सिद्धी से अपना आंदोलन मंगलवार को शुरू कर दिया। आंदोलन की शुरुआत में अन्ना ने महाराष्ट्र के जल संकट से जूझते इलाकों में राहुल गांधी के दौरे पर सवाल उठाए। दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के दुर्ग से बाबा रामदेव ने भी अपना दौरा शुरू किया।

इस यात्रा का मकसद राज्य के लोगों तक पहुंचना और उनको एक करना है। मालूम हो कि महाराष्ट्र इस वक्त सूखे से जूझ रहा है। कांग्रेस प्यासे गांवों को पानी मुहैया कराने में नाकाम रही है। यहां तक कि महाराष्ट्र के कई गांवों ने कर्नाटक में जाने की धमकी दी है। खुद सरकार कर्नाटक से पानी की भीख मांग रही है यानि अन्ना ने आज से कांग्रेस पर हल्ला बोल दिया है।

सूखाग्रस्त इलाके में पहुंचे अन्ना हजारे ने कहा कि राहुल गांधी सूखा पीड़ित इलाके में आ गए। मीडिया में खबर छप गई। ये हमारे लिए बेइज्जती की बात है कि देश की आजादी के बाद भी पानी का प्रश्न अभी भी कायम है।

गौरतलब है कि अन्ना इन इलाकों में पानी को लेकर जहां लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं वहीं वो देश में लोकपाल तो राज्य में लोकायुक्त को ताकत दिलाने की, भ्रष्टाचारी नेताओं और अफसरों पर नकेल कसने के लिए सख्त लोकपाल बिल की बात कर रहे हैं।

अन्ना हजारे ने बताया कि वो सूखाग्रस्त 35 जिलों में जाएंगे। लोगों को जगाएंगे। सख्त जन लोकपाल बिल एक दिन सरकार को बनाना पड़ेगा और अगर मजबूत लोकायुक्त राज्य में नहीं बना तो हम फिर से आंदोलन करेंगे और लोगों को बताएंगे कि ऐसे लोगों को वोट क्यों करना?

आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अन्ना के महाराष्ट्र दौरे पर कहा कि उनका आंदोलन असफल होगा। उनके पास जनसमर्थन नहीं है और उनके आंदोलन में अब ज्यादा ताकत नहीं बची है। वहीं एनसीपी नेता तारिक अनवर का कहना है कि अन्ना हजारे का उद्देश्य सही है लेकिन करने का रास्ता सही नहीं है। देश के संविधान, परंपरा में उनका विश्वास नहीं है और खुद को वो इन सब से ऊपर समझ रहे हैं।

दूसरी तरफ बाबा रामदेव ने छत्तीसगढ़ दौरा शुरू कर दिया है। दुर्ग में अपनी रैली के दौरान रामदेव ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। रामदेव ने कहा कि सरकार अखंड पाप में डूबी हुई है।

ये सब सोनिया मैडम का आशीर्वाद है : कुरैशी

उत्तराखंड के नवनियुक्त राज्यपाल अजीज कुरैशी ने कहा भोपाल। उत्तराखंड के नवनियुक्त राज्यपाल अजीज कुरैशी ने कहा कि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आशीर्वाद के कारण यह जिम्मेदारी मिली है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने विदेश दौरे पर रवाना होने से ठीक एक दिन पहले ही कुरैशी को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया था। कुरैशी फिलहाल मार्गेट अल्वा की विदाई का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद वे देहरादून जाकर अपना पद संभालेंगे।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और मध्य प्रदेश में अर्जुन सिंह की सरकार में मंत्री रहे कुरैशी ने रविवार को यहां कहा, मैं गांधी-नेहरू परिवार के प्रति हमेशा से वफादार रहा हूं और राज्यपाल के पद पर मेरी नियुक्ति वफादारी के इस इनाम को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह केवल सोनिया के आशीर्वाद की वजह से संभव हो सका कि मैं इस पद पर नियुक्त किया गया। कुरैशी ने बताया, मैं वर्ष 1951 में कांग्रेस से जुड़ा हूं। तब से मैंने पार्टी के लिए हर स्तर पर काम किया। उन्होंने कहा, मैं उस पीढ़ी से आता हूं जो सोचता है कि राज्यपाल बनाया जाना एक अपमान है। लोग सोचते हैं कि उसे सक्रिय राजनीति से दूर कर दिया गया है। कुरैशी का मानना है कि राज्यपाल बनाया जाना एक सम्मान की बात है।

कसाब पर करोड़ों न्योछावर


पिछले दिनों अजमल कसाब का ट्रायल समाप्त हो गया। अब सारी दुनिया में उत्सुकता है कि 3 मई को विशेष अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है। महाराष्ट्र सरकार इसे अपनी उपलब्धि मानती है कि इस केस का रेकॉर्ड समय में निपटारा होने जा रहा है। राज्य के मौजूदा गृह मंत्री आर. आर. पाटिल 26/11 के आतंकी हमले के समय भी यह मंत्रालय देख रहे थे। हमले की जांच, अदालती लड़ाई और आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार की तैयारी पर पाटिल से कुमुद संघवी चावरे की बातचीत....



26/11 की जांच और फिर कानूनी लड़ाई में कई खामियों का आरोप लगा, ऐसा क्यों?
कोई भी खामी हम कैसे रहने देते। इस घटना पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। मुंबई की क्राइम ब्रांच द्वारा ऐसे सबूत इकठ्ठा किए गए और केस इतना मजबूत बनाया गया कि पाकिस्तान को अपने आतंकवादी कारनामे कबूल करने पड़े। वरना हर बार पाकिस्तान अपना पल्ला झाड़ लेता था। हम दुनिया को इस हमले में पाकिस्तान का हाथ होने का सबूत दे पाए हैं। हमारे स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर उज्ज्वल निकम ने यह मामला अदालत में इतनी ताकत से पेश किया कि रेकॉर्ड समय में केस का निपटारा होने जा रहा है। इस बात पर मुझे फख्र है कि आतंकी हमले के किसी भी मामले का दुनिया में कहीं इतनी जल्दी निपटारा नहीं हुआ है जितनी जल्दी मुंबई हमले का होने वाला है, जबकि इसका दायरा अंतरराष्ट्रीय था। जांच में सभी केंद्रीय जांच एजेंसियों ने महत्वपूर्ण योगदान किया है। राज्य और केंद्र के साझा प्रयासों ने ही यह असाधारण कामयाबी दिलाई है। यह बात दुनिया के सामने लाने में हमें यश मिला है कि हमले के पीछे लश्करे तैयबा, आईएसआई जैसी पाकिस्तानी ताकतों ने काम किया है।


क्या कसाब की सुरक्षा पर महाराष्ट्र सरकार को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं?
यह कहना गलत है कि कसाब पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। हम पूरी टीम और इस केस के लिए आवश्यक नई सुविधाओं के लिए खर्च कर रहे हैं। कसाब के लिए बनी सेफ कस्टडी का आगे भी उपयोग होगा। और फिर इस संबंध में खर्च का मुद्दा उठाना अनुचित है। इस केस के लिए कसाब का जिंदा रहना और न्याय प्रक्रिया जल्दी पूरी करना बहुत जरूरी है। मेरी राय में कसाब को जिंदा पकड़ने में मुंबई पुलिस को मिली सफलता अद्भुत है। अन्य आतंकवादियों की तरह यदि वह भी मारा जाता तो इसके मायने ही बदल जाते। न पाकिस्तान का भंडाफोड़ होता न हमें आतंकवाद से लड़ने की ताकत मिलती।


मारे गए नौ आतंकवादियों को दफनाने के लिए जनवरी का समय क्यों चुना गया?
नो कॉमेंट्स।


मुंबई हमले के बाद महाराष्ट्र की सुरक्षा- व्यवस्था आलोचना का विषय बनी थी। गलतियां सुधारने के लिए क्या किया गया?
हमने अपना खुफिया तंत्र मजबूत किया है और डिजास्टर मैनेजमेंट को आधुनिक तकनीक से लैस कर रहे हैं। राज्य सरकार ने एनएसजी की तर्ज पर राज्य में फोर्स वन का गठन किया है। एनएसजी की एक बटालियन हमेशा मुंबई में तैनात रहती है। कोस्ट गार्ड ने अपनी ताकत बढ़ाई है। राज्य सरकार ने हर जिले में क्विक रेसपॉन्स टीम बनाई है। हमने उसे आजमाकर देखा है। खुदा न खास्ता अब कुछ हो जाए तो क्विक टीम 7-8 मिनट में सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंच जाएगी।


क्या मुंबई और समुद्र मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए यह काफी है?
मैं यह दावा नहीं कर सकता कि यह काफी है। मुझे अहसास है कि अभी बहुत काम बाकी है। नेवी, कोस्टल गार्ड, कस्टम और स्थानीय पुलिस-ये चार सुरक्षा घेरे भेदकर आतंकवादी समुद्र मार्ग से मुंबई में घुसे थे। हमें वह सब करेक्ट करना है। अब तक आम मानसिकता सुरक्षा पर व्यय को फिजूलखर्च मानने की रही है। उस खर्च को विकास, जीवित संपत्ति और देश की अस्मिता पर व्यय की दृष्टि से देखा जाना चाहिए।


हमले के बाद सुरक्षा- व्यवस्था में जनता से सहयोग लेने के बारे में सरकार की ओर से बहुत बयानबाजी की गई थी, इस दिशा में क्या किया गया?
मुझे नहीं मालूम कि आप किन बयानों की बात कर रही हैं। पर यह सच है कि इस दिशा में हम ठोस कुछ नहीं कर पाए हैं। इसके लिए हम सबका रवैया जिम्मेदार है। किसी घटना के बाद हम थोड़ा अलर्ट रहते हैं, कुछ करने के बारे में बहस करते हैं। मगर एकाध दिन में फिर रिलैक्स हो जाते हैं। मुंबई जैसे संवेदनशील महानगर में सदा अलर्ट रहने के बारे में जनता में जागरूकता लानी होगी। खास तौर पर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अलर्ट होना अति आवश्यक है। जर्मन बेकरी में विस्फोट के पहले एक लावारिस बैग एक घंटे से ज्यादा समय के लिए होटल में पड़ा हुआ था पर न वहां मौजूद ग्राहकों ने और न ही होटल प्रबंधन ने इस पर ध्यान दिया। हमें संदिग्ध वस्तुओं के बारे में अलर्ट रहने और पुलिस को सूचित करने का प्रबंध फुल प्रुफ करना होगा।

अलग-अलग रास्‍तों पर निकले अन्‍ना-रामदेव, लेकिन मकसद एक

मुंबई। महाराष्ट्र में सशक्त लोकायुक्त बनाने के लिए अन्ना हजारे और छत्‍तीसगढ़ में चल रही लूटखसोट पर लगाम कसने व काला धन के खिलाफ बाबा रामदेव एक महीने तक चलने वाली राज्यव्यापी यात्राओं पर निकल पड़े।


अन्ना की यात्रा शाम करीब चार बजे शुरू हुई। अन्‍ना ने यात्रा से ठीक पहले मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उनका यह आंदोलन राज्‍य में लोकायुक्‍त नियुक्‍त करने की मांग को लेकर है। यह यात्रा देश के लिए एक लोकपाल की जंग का एक अंग है। अन्‍ना से जब पूछा गया कि टीम अन्‍ना के सदस्‍य यहां नहीं हैं, तो जवाब मिला कि यह यात्रा राज्‍य व्‍यापी है, लिहाजा उनकी जरूरत नहीं।


अन्‍ना ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ लोकायुक्‍त के लिए नहीं बल्कि राइट टू रिजेक्‍ट को लाने के लिए भी है। इस मौके पर उन्‍होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर राहुल को पीने के पानी की समस्‍या को करीब से देखना है तो वो रालेगण आयें।


ज्ञात हो कि बीते महीने अन्ना ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को पत्र लिखकर राज्य में सशक्त लोकायुक्त कानून बनाने की मांग की थी और ऐसा नहीं होने पर जनांदोलन की चेतावनी दी थी। अन्ना के पत्र में कहा गया था, जब आप मुख्यमंत्री बने थे तो हमने सोचा कि आप भ्रष्टाचार खत्म करने के मकसद से कड़े कानून बनाएंगे। लेकिन हमारी उम्मीदों के उलट राज्य में तो भ्रष्टाचार में इजाफा ही हुआ है।


बाबा रामदेव की स्‍वाभिमान यात्रा


अन्‍ना की इस यात्रा के समानांतर योग गुरु बाबा रामदेव ने अपनी स्‍वाभिमान यात्रा छत्‍तीसगढ़ से शुरू की। उन्‍होंने यात्रा से ठीक पहले कहा कि उनका आंदोलन बाबा रामदेव से अलग है, लेकिन दोनों का मकसद एक है। दोनों ही देश के लिए लड़ रहे हैं। वो भ्रष्‍टाचार के खिलाफ और मैं देश की संपत्ति के गलत इस्‍तेमाल व लूट-खसोट के खिलाफ।


बाबा रामदेव ने कहा कि उनकी यात्रा की शुरुआत छत्‍तीसगढ़ से करने के पीछे भी एक बड़ा कारण है। वो यह कि देश की अरबों रुपए की भू-संपत्ति, खनिज, आदि छत्‍तीसगढ़ में है और देश के कुछ चंद लोग इसका गलत इस्‍तेमाल कर निजी लाभ उठा रहे हैं। आम आदमी को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। सच पूछिए तो देश के प्रत्‍येक नागरिक, हर शहरी, हर ग्रामीण, प्रत्‍येक जनजातीय व्‍यक्ति का हक इस भू-संपत्ति पर है। और वो यह हक दिलाकर रहेंगे।


हम आपको बता दें कि दोनों की यात्रा अगले एक महीने तक चलेगी और उसके बाद तीन जून को बाबा और अन्‍ना दोनों जंतर-मंतर पर मिलेंगे। वहां केंद्र सरकार के खिलाफ एक दिन का अनशन होगा।

नेता नहीं खिलाड़ी हूं, खिलाड़ी रहूंगाः सचिन तेंदुलकर

पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान बातचीत में यह सवाल पूछे जाने पर उन्होंने इसका विस्तार से उत्तर दिया.


उन्होंने कहा, ''ये बाउंसर है ...थोड़ा...सबसे पहले यही कहना चाहूंगा कि राष्ट्रपति आपका नाम मनोनीत करती है तो इस लिस्ट में काफी बड़े बड़े नाम आए हैं. लता दीदी, पृथ्वीराज कपूर भी थे, और भी बड़े नाम थे जिनको मनोनीत किया गया था. मनोनीत किया जाता है क्योंकि उनके क्षेत्र में उनके योगदान का रिफ्लेक्शन होता है. मैं साढ़े 22 साल क्रिकेट खेला हूं. मैं समझता हू कि इतने साल खेलने की वजह से मनोनीत किया गया है और ये एक सम्मान है मेरे लिए.''


सचिन का कहना था, ''मैं राजनेता नहीं हूं खिलाड़ी हूं और खिलाड़ी ही रहूंगा हमेशा.''


सचिन ने राज्यसभा में मनोनयन को गंभीरता से लेते हुए कहा, ''मुझे लगता है कि मुझे इस मनोनयन के साथ बहुत सारी ज़िम्मेदारियां भी आएंगी. अभी तक जो भी अवार्ड मिले हैं वो क्रिकेट की वजह से मिले हैं. मुझे नहीं लगता कि क्रिकेट बंद कर के राजनीति में जाऊंगा. क्रिकेट मेरी लाइफ है और लाइफ रहेगी. मुझे याद है दो साल पहले इंडियन एयरफोर्स ने कैप्टन बनाया था लेकिन मुझे प्लेन चलाना नहीं आता है.''


उनका कहना था कि खेल उनकी विशेषज्ञता है और वो चाहेंगे कि वो कुछ योगदान कर पाएं इस दिशा में. उन्होंने कहा, '' खेल के बारे में मुझे जानकारी है. मेरी विशेषज्ञता है. मैं इस दिशा में कुछ योगदान दे सकता हूं. इसके लिए आप लोगों का समर्थन चाहिए.''


उल्लेखनीय है कि सचिन के राज्यसभा में मनोनयन को लेकर अखबारों और मीडिया संस्थानों में काफी चर्चाएं चल रही थीं और कुछ लोगों ने इसके लिए सचिन की आलोचना भी की थी.
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