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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

केजरीवाल पर जूता फेंकने वाला गांधी परिवार का करीबी : IAC


इंडिया अगेन्स्ट करप्शन की अगुवाई कर रहे अरविंद केजरीवाल पर जूता फेंकने वाला जगदीश शर्मा गांधी परिवार का करीबी होने का दावा किया गया है. जगदीश शर्मा की ऐसी तस्वीरें सामने आईं हैं जिनमें वो सोनिया गांधी और राबर्ट वाड्रा के साथ नजर आ रहा है.

जगदीश शर्मा ही वो शख्स है जिसने केजरीवाल की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान हंगामा मचाया था औऱ केजरीवाल पर जूता फेंकने की कोशिश की थी. जगदीश शर्मा वाड्रा परिवार के साथ समाधि स्थल पर खींची गई तस्वीरों में भी नजर आया है जिसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी दिखाई पड़े हैं.

गौरतलब है कि 31 अक्‍टूबर को जब अरविंद केजरीवाल प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे तब जगदीश शर्मा ने पहले तो वहां खूब हंगामा किया और फिर केजरीवाल पर जूता फेंकने की कोशिश की थी. जगदीश शर्मा ने कहा था कि उसे केजरीवाल की ईमानदारी पर शक है क्योंकि वह राजनीतिक दलों और दूसरे व्यक्तियों के सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं. उस वक्‍त जगदीश शर्मा ने कहा था कि वह किसी राजनीतिक दल से नहीं है. लेकिन जो तस्‍वीरें सामने आई हैं वो कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं.

इस घटना पर केजरीवाल ने कहा था कि उन्हें इस हंगामे की उम्मीद थी क्योंकि उन्होंने रॉबर्ट वाड्रा, नितिन गडकरी, सलमान खुर्शीद जैसे बड़े व्यक्तियों पर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि वह इससे डरने वाले भी नहीं हैं और न ही पीछे हटेंगे.

पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह से जब इस मामले पर पूछा गया तो उन्‍होंने इसपर टिप्‍पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि कांग्रेस और केजरीवाल दोनों की ही बोली कठोर है.

आईएसी का बिजली सत्याग्रह, कल एक घंटे के लिए बत्ती बंद रखने का जनता से आग्रह



इंडिया अगेंस्ट करप्शन(आईएसी) ने दिल्ली की जनता से आह्वान किया है कि वह बिजली के बढ़े बिलों के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन करने के लिए 3 नवंबर (शनिवार) की शाम 7-8 बजे तक एक घंटे के लिए अपने-अपने घरों की बिजली बंद रखे.

आईएसी के वरिष्ठ कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने जनता से एकजुट होकर बिजली कंपनियों और शीला दीक्षित सरकार की मनमानी का विरोध करने की अपील की है. अरविंद केजरीवाल ने कहा, “आईएसी के बिजली आंदोलन को जनता का भारी समर्थन मिला तो सरकार दबाव में आई और बिजली के दामों में मामूली कमी की गई. लेकिन महंगाई से त्रस्त जनता के लिए यह पर्याप्त नहीं है. बिजली के दामों में जो इजाफा हुआ है वह गलत है. जब तक बिजली के बढ़े दाम पूरी तरह वापस नहीं लिए जाते हमारा बिजली सत्याग्रह चलता रहेगा.”

अरविंद केजरीवाल ने बिजली के दामों में वृद्धि के पीछे निजी कंपनियों, दिल्ली विद्युत नियामक आयोग(डीईआरसी) और शीला सरकार के बीच साठगांठ का आरोप लगाया. उनका कहना है कि डीईआरसी के पूर्व अध्यक्ष बरजिंदर सिंह ने पाया था कि बिजली कंपनियां जनता से जरूरत से ज्यादा पैसा वसूल रही हैं इसलिए उन्होंने बिजली के दाम 23 फीसदी तक घटाने का आदेश तैयार किया था. शीला दीक्षित सरकार ने वह आदेश लागू ही नहीं होने दिया और बरजिंदर सिंह के रिटायर होते ही डीईआरसी में कंपनियों की पसंद का अफसर बिठाकर दाम घटाने की बजाय दोगुने तक बढ़ा दिए गए.

आईएसी ने बरजिंदर सिंह के उस आदेश की प्रति हासिल करने के लिए डीईआरसी में एक आरटीआई आवेदन लगाया था लेकिन डीईआरसी उसे देने में आनाकानी कर रही है. डीईआरसी ने आरटीआई के जवाब में कहा था कि उसके सारे आदेश वेबसाइट पर मौजूद होते हैं और अगर दाम घटाने वाला कोई आदेश वेबसाइट पर नहीं है तो इसका मतलब है ऐसा कोई आदेश निकला ही नहीं होगा.

डीईआरसी द्वारा आईएसी के एक के बाद एक आरटीआई का जवाब देने में टालमटोल से आहत अरविंद केजरीवाल ने अब खुद एक आरटीआई आवेदन देकर डीईआरसी से कई सवाल पूछे हैं.

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “जनता को मिले सूचना के अधिकार के हनन में डीआईआरसी जैसी संस्थाओं ने महारथ हासिल कर ली है. सूचनाएं देने की बजाय सूचनाएं छुपाने में इनकी मशीनरी ज्यादा काम करती है. लेकिन हम इन अड़चनों से घबराने वाले नहीं. इनको जनता के प्रश्नों के उत्तर देने होंगे. हम डीईआरसी, बिजली कंपनियों और शीला सरकार की साठगांठ का भंडाफोड़ करेंगे. ”

गौरतलब है कि बरजिंदर सिंह के आदेश की कॉपी डीईआरसी ने भाजपा को काफी पहले दे दी थी लेकिन भाजपा ने भी बजाय उस मामले में सरकार को घेरने के बजाय उसे चुपचाप दबाए रखा. डीईआरसी अध्यक्ष के उसी आदेश को लागू होने से रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी.

आईएसी, डीईआरसी से साल 2010 के उस आदेश की कॉपी मांग रहा है जो डीईआरसी के तत्कालीन अध्यक्ष बरजिंदर सिंह और एक अन्य सदस्य एसआर सेठी ने तैयार किया था.

आईएसी ने दिल्ली में बिजली के बढ़े दामों के खिलाफ बिजली सत्याग्रह छेड़ा है. इसमें शामिल जनता ने सामूहिक रूप से दिल्ली के हर इलाके में बिजली बिलों की होली जलाई है. आईएसी ने जनता से बिजली के बिलों का भुगतान बंद करने की भी अपील की थी जिसको भरपूर समर्थन मिला. जिन परिवारों की बिजली, बिल नहीं भरने के कारण काटी गई उन घरों की बिजली आईएसी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, गोपाल राय और कुमार विश्वास ने खुद जोड़ी है और उसका सारा जिम्मा अपने ऊपर लिया है.

जनरल वीके सिंह ने भरी किसानों के लिए हुंकार


पिछले साल अन्ना के आंदोलन ने धूम मचायी थी. जनलोकपाल के सवाल पर हुए उस आंदोलन ने मनमोहन सिंह सरकार को झुका दिया था. इस साल उनके सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली से फर्रुखाबाद तक आंदोलन छेड़कर सरकार की नींद हराम कर दी और अब पूर्व आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह ने किसानों के लिए भरी है आंदोलन की हुंकार.

चार दशक से ज्यादा समय तक जनरल वीके सिंह ने सरहद पार के दुश्मनों के दांत खट्टे किये. लेकिन रिटायर होने के बाद उन्होंने सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक है. जनरल तो वही है, बस उसकी आर्मी बदल गयी है. क्योंकि इस नए कप्तान के पास है किसानों की सेना.

वर्दी उतारकर सदरी चढ़ायी तो जय जवान से बात आगे बढ़कर जय किसान तक जा पहुंची. देश के 21 लाख जवानों की रहनुमाई करनेवाला जनरल रिटायर होने के बाद अब किसानों के हक के लिए हुंकार भर रहा है और हुंकार ऐसी कि सीधे देश की सबसे बड़ी पंचायत में बैठे लोकतंत्र के बड़े-बड़े पंचों को सुनायी पड़े.

जब आर्मी चीफ थे, तब जनरल साहब ने जवानों की दुर्दशा की दास्तां अपने मंत्रीजी को सुना दी थी. अब आम आदमी बनकर किसानों की आवाज सीधे प्रधानमंत्री को सुनाना चाहते हैं. इसके लिए किसी के मंच पर जाने से गुरेज नहीं. चाहे चौटाला हों या अन्ना या फिर अब वी एम सिंह, जो राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन चलाते हैं.

वी एम सिंह की मांग है कि शुगर किसानों के लिए बने रंगराजन पैनल ने देश भर के किसानों को एक समान बताकर पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों से भेदभाव किया गया है. सरकार इस पैनल की रिपोर्ट को रद्द करे, नहीं तो चार दिसंबर के बाद संसद का घेराव होगा, जिसे समर्थन दे रहे हैं जनरल वी के सिंह.

अब भूतपूर्व फौजी जनरल के लिए ये व्यक्ति का नहीं, विचारों का सवाल है और जब बात विचारों की आती है, तो इस देश में गांधी से ज्यादा शिद्दत से और किसे याद किया जा सकता है.

जनरल साहब ने गांधी के उस मंत्र को याद किया, जिसमें हाशिये पर खड़े आखिरी आदमी को याद किया जाता है. रिवाड़ी से दिल्ली तक जनरल की ललकार है, तो दिल्ली से फर्रुखाबाद तक केजरीवाल की. वही अपने गांव रालेगण सिद्धि से अन्ना भी नई लड़ाई के लिए कमर कस रहे हैं.

अब इसे सिविल सोसायटी की आवाज कहें या भ्रष्टाचार के खिलाफ छिड़ी मुहिम का असर, लेकिन सत्ता को साधने में माहिर सियासतदां का दर्द इन सवालों पर कुछ ऐसे निकलता है.

जनरल वीके सिंह ने तो अपने रंग तभी दिखा दिये थे, जब कुछ समय पहले ही अन्ना के मंच से सत्ता चलाने वालों को चुनौती दी थी राष्ट्रकवि रामधानी सिंह दिनकर के शब्द उधार लेकर और अब किसानों के सवाल पर चार दिसंबर के बाद संसद के घेराव का अल्टीमेटम उनकी भूमिका की नई परिभाषा गढ़ रहा है.

करवाचौथ पर हास्य व्यंग्य कविता - आज की करवाचौथ


चाँद भी वही है 
पति भी वही 
पर बदला है नारी ने रूप 
पहले वो करती थी चाँद की पूजा 
कि आयु पति  की  हो लम्बी
अब चाहती सामान की लिस्ट हो लम्बी 
सहेलियों में मची आज होड़ है 
ज्यादा धन खर्च करने की लगी दौड़ है 
कई दिन पहले शुरू हो जाती है तैयारी
बहु घुमे बाजारों में घर संभाले सासु बेचारी 
पति भी कर्ज से पिस रहा है 
पत्नी को खुश रखने के चक्कर में

बर्तन घिस रहा है 
मंहगाई के साथ -साथ बढ़ी है खरीददारी 
कपड़ों और गहनों कि लिस्ट है भारी
तुम्हारी लम्बी आयु के लिए व्रत रखूंगी 
फिर क्यों मै काम करुँगी 
आज की नारी जैसे एहसान कर रही है 
भूखे रह कर पति को  परेशान कर रही है 
क्या जाने बाबा रामदेव क्या जाने अन्ना हजारे
पति किस हाल में है बेचारे 
पहले खूब होती थी दो नम्बर की कमाई
खुश रहती थी घर में लुगाई 
भ्रष्टाचार मिटाने के आन्दोलन में 
पति ने भी थी मोमबत्ती जलाई 
पर उसे क्या पता था 
कि मुसीबत उसी पर है आई 
काश बाबा और अन्ना के घर भी होती इक इक नार
प्रयास न करते कभी मिटाने का भ्रष्टाचार 
पत्नी कि करवाचौथ 
पति कि बन गई है संकट चौथ  
हाय कैसे बदल गया नारी का व्यवहार
क्या ये नहीं है इम्मोशनल अत्याचार 
पहले भी होती थी चाँद कि पूजा 
रखे जाते थे व्रत 
पर झूठे आडम्बर बढ़ा कर 
नारियों ने कर दी है हद 
'सविता'का है यह कहना 
सादगी और शालीनता ही है नारी का गहना 

Savita Kaushal

अब सड़क पर सरकार से भिड़ेंगे जनरल वीके सिंह


अन्ना के नए 'केजरीवाल' और पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह यूपीए सरकार पर प्रेशर बनाने के लिए अगली रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। सिंह के तेवर से लगता है कि वह अन्ना के आंदोलन से केजरीवाल के हटने के बाद आए खालीपन को भर देगे। आज सिंह 4 दिसंबर को पार्ल्यामेंट का घेराव करने का ऐलान किया।


सिंह यह घेराव गन्ना उत्पादकों पर पड़ने वाली मार पर सरकार के कानों में आवाज पहुंचाने के मकसद से करने जा रहे हैं। अभी तक गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित नहीं किया गया है जिसके चलते किसानों को औने-पौने दामों में फसल बेचनी पड़ रही है। गौरतलब है कि वह इस मुद्दे पर पीएम मनमोहन सिंह को पहले भी खत लिख चुके हैं।

हाल ही में अन्ना हजारे और जनरल वीके सिंह ने साथ मिलकर देश की संसद को भंग करने की मांग की थी। सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि मौजूदा संसद ने लोगों का विश्वास खो दिया है इसलिए उसे भंग किया जाना चाहिए और सत्ता और विपक्ष दोनों को जनता का सामना करना चाहिए।


कल यानी गुरुवार को वीके सिंह ने पहली बार एक राजनीतिक रैली में भाग लिया था। इस रैली में सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश नेतृत्व की कमी से जूझ रहा है।

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सोनिया-राहुल पर 1600 करोड के फर्जीवाडे का आरोप लगाया


जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे पर करोड़ों रुपए की अघोषित संपत्ति होने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास यंग इंडिया नाम की कंपनी के 76 फीसदी शेयर हैं। दिल्ली में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी में राहुल के तीन लाख शेयर हैं। इसमें उन्होंने 2.63 लाख शेयर बाद में प्रियंका गांधी को दिए। स्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि इस बात की राहुल ने इस बात की जानकारी अपने 2008 के लोकसभा नामांकन पत्र में नहीं दी है।

स्वामी के मुताबिक यंग इंडिया कंपनी को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी से 90 करोड़ का लोन मिला। यह कानूनन गलत था। स्वामी ने साफ कहा कि कोई भी राजनीतिक पार्टी इस तरह लोन नहीं दे सकती और न ही किसी व्यवसायिक गतिविधि में हिस्सा ले सकती है। उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड और कौमी एकता अखबार के मालिक एसोसिएट जर्नल दिल्ली और उत्तर प्रदेश में अन्य स्थानों पर उच्च मूल्य की अचल संपत्ति के मालिक हैं। स्वामी ने आरोप लगाया कि यंग इंडिया और एसोसिएट जर्नल के बीच हेराल्ड हाउस को हडपने के लिए एक धोखाधड़ी वाला सौदा हुआ है। इसकी कीमत लगभग 1600 करोड़ रुपए हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह संपत्ति केवल 50 लाख रुपए में अधिग्रहित की गई थी। 

स्वामी ने कहा कि यंग इंडिया के दायर बयान में कहा गया है कि शेयरहोल्डर की बैठक सोनिया गांधी के घर दस जनपथ पर होती थी। सोनिया गांधी ने सरकारी ढांचे का गलत इस्तेमाल किया है। यह मकान सोनिया गांधी का सरकारी आवास है और इसे सरकार की ओर से आवंटित किया गया है। इसमें बैठक गैरकानूनी है। सरकारी आवास को किसी भी व्यवसायिक गतिविधि के इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यंग इंडिया कंपनी युवकों को सेक्युलरिजम सिखाने का काम करती है। स्वामी ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इस मामले की संयुक्त सीबीआई जांच की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह साफ है कि प्रधानमंत्री इस मसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे तो वे इस मामले को कोर्ट में ले जाने के लिए विवश हो जाएंगे।

Press Release on IAC rally in Farrukhabad


IAC member Arvind Kejriwal announced that the new party, carved out of the movement led by him among others, would field a physically challenged person from Farrukhabad and ensure that Union Minister Salman Khurshid was defeated in the next Lok Sabha election from that constituency. This would be a befitting reply to Khurshid’s Trust siphoning off money in the name of physically challenged people, he said at a massive rally at the said minister’s constituency.

When the names of listed beneficiaries of the Zakir Hussain Memorial Trust run by the minister and his wife were announced one by one, they came and declared before a packed gathering that, although the names were correct, they did not receive the equipments claimed. About 20,000 people had gathered for the rally to listen to Arvind Kejriwal and his colleagues.

The gathering included physically challenged people from seven districts, namely Farukhabad, Kannauj, Mainpuri, Itawah, Bareili, Allahabad and Gautam Buddh Nagar. Supporters and volunteers of the movement had also converged from Madhya Pradesh, Rajasthan, Uttarakhand, Delhi, Punjab, Haryana and Himachal Pradesh.

The list of beneficiaries included a dead person — Gajraj from Bulandshahr!

Kejriwal took strong exception to the language used by former Union Law Minister and now External Affairs Minister Salman Khurshid, who had threatened IaC volunteers of dire consequences with the words, “They can come to Farrukhabad but how will they return?”

How can a Union Minister and MP use such a language, Kejriwal asked. This was an insult to democracy, showing the system is actually not working in the country, he added.

Earlier, about 60 physically challenged persons had sought to meet Prime Minister Manmohan Singh in Delhi. The appointment was declined, citing security reasons. How could there be threat to the Prime Minister from physically challenged people, Kejriwal questioned.
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