" "

भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

हेलीकॉप्टर डील में 350 करोड़ की दलाली, इटली की कंपनी पर आरोप

इटली में डिफेंस डील में कथित दलाली की गूंज अब भारत में भी शोर मचाने लगी है। इतालवी कंपनी अगस्टा वेस्टलैंड पर आरोप लगा है कि वीवीआईपी के इस्तेमाल के लिए भारत को बेचे गए 12 हेलीकॉप्टर के लिए उसने 350 करोड़ रूपए से ज्यादा की दलाली दी है।


भारत को 12 हेलीकॉप्टर बेचेगी अगस्टा
डील के मुताबिक अगस्टा वेस्टलैंड 3546 करोड़ रूपए में भारत को 12 हेलीकॉप्टर बेचेगी। ये 12 हेलिकॉप्टर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति सहित अन्य वीवीआईपी के लिए इस्तेमाल किए जाने हैं। भारत को इसकी सप्लाई अगले साल होनी है।


शीर्ष अधिकारी ने किया खुलासा
इटली के ला रिपब्लिका समेत कई अखबारों के मुताबिक जांचकर्ताओं ने स्विट्जरलैंड के कंसल्टेंट गिडो राल्फ हाश्के के स्विस ऑफिस पर भी छापा मारा है। अगस्टा वेस्टलैंड के एक शीर्ष अधिकारी ने इसका खुलासा किया। उसने बताया कि भारत से डील कराने की जिम्मेदारी उसे सौंपी गई थी।


बिजनेस सर्किल में नामचीन चेहरा है हाश्के
62 वर्षीय हाश्के इंडियन डिफेंस बिजनेस सर्किल में नामचीन चेहरा है। माना जाता है कि हाश्के के पास अमेरिका और स्विट्जरलैंड की नागरिकता है।

बोफोर्स का जिन्न फिर बाहर, क्वात्रोच्चि को बचाया था राजीव ने, अमिताभ को फंसाया गया!

बोफोर्स का जिन्‍न एक बार फिर बाहर आ गया है। स्‍वीडिश पुलिस के पूर्व प्रमुख स्‍टेन लिंडस्‍टॉर्म ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। स्‍टेन वही अधिकारी हैं, जिन्‍होंने इस मामले की जांच की थी और पत्रकार चित्रा सुब्रमण्‍यम (तब 'द हिंदू' में काम करती थीं) को घोटाले से जुड़े 300 पन्‍नों के दस्‍तावेज सौंपे थे। इसी दस्‍तावेज के आधार पर चित्रा ने बोफोर्स सौदे में कथित दलाली की खबर ब्रेक की थी।


25 साल बाद एक बार फिर स्‍टेन ने चित्रा को इंटरव्यू दिया है। इसमें उन्‍होंने कहा है कि कि इस बात के कोई सुबूत नहीं है कि राजीव गांधी ने रिश्‍वत ली थी। लेकिन यह भी सच है कि राजीव ने इस मामले के मुख्‍य आरोपी ओट्टावियो क्‍वात्रोच्चि को बचाने की कोशिशें रोकने के लिए कुछ नहीं किया। स्‍टेन के मुताबिक क्‍वात्रोच्चि के खिलाफ ठोस सुबूत उपलबध हैं और उसे भारत और स्‍वीडन, दोनों ही देशों में बचाने की खूब कोशिशें की गईं। 'द हूट' नाम की वेबसाइट पर पोस्‍ट इंटरव्यू में स्‍टेन ने यह भी कहा है कि निर्दोष लोग फंसाए गए और दोषी आजाद घूमते रहे।


स्‍टेन ने अमिताभ बच्‍चन को क्‍लीन चिट देते हुए कहा है कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ इस घोटाले से जुड़ी जो भी खबरें छपी थीं, वे सारी प्रायोजित थीं। उनके मुताबिक भारत के जांचकर्ताओं ने स्‍वीडन के अखबार DAGENS NYHETER में अमिताभ और उनके परिवार के खिलाफ खबरें छपवाईं। स्‍टेन ने कहा, 'उन्‍होंने (भारतीय जांचकर्ताओं ने) मुझे कुछ लोगों के नामों की सूची सौंपी, जिनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया था। इसमें अमिताभ बच्‍चन का भी नाम था। स्‍वीडन के उस दौरे के दौरान भारतीय जांचकर्ताओं ने DN में अमिताभ एंगल से खबरें प्रायोजित करवाईं।'


इस खुलासे पर राजनीतिक दलों की टिप्‍पणी भी आ रही है। माकपा का कहना है कि वह बोफोर्स घोटाले के आरोपी क्‍वात्रोच्चि को बचाने के पीछे राजीव गांधी का हाथ होने की बात शुरू से कहती रही है। ऐसे में यह खुलासा कोई नया या चौंकाने वाला नहीं है, बल्कि इसके जरिए सच सामने आया है। माकपा इस मुद्दे को संसद में भी उठा सकती है। लेकिन सपा का कहना है कि 25 साल पुराने बोफोर्स के जिन्‍न को सदा के लिए दफन कर देना चाहिए।

"भ्रष्टाचार" ये बीमारी 65 वर्ष पुरानी है!

योग गुरु बाबा रामदेव और अन्ना हजारे मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने को तैयार हो गये हैं। उन्होंने साझा मंच से इसके लिए घोषणा करके अपनी मंशा से जनता और सरकार दोनों को अवगत भी करा दिया है। टीम अन्ना एक मजबूत लोकपाल लाने की मांग पर अड़ी है जबकि बाबा रामदेव विदेशी बैंकों में जमा देश के कालेधन को वापस मंगाने की मांग कर रहे हैं। पिछले दिनों संसद में इस मुद्दे पर लगभग सभी दल टीम अन्ना के खिलाफ हो गये थे। इससे साफ जाहिर है कि जैसा लोकपाल बिल टीम अन्ना चाहती है वैसा बिल संसद पास करने वाली नहीं।


यह सभी जानते हैं कि देश में नीचे से ऊपर तक भ्रष्टाचार ने गहरी जड़े जमा ली हैं। कोई भी विभाग इससे अछूता नहीं रह गया है। आजादी मिलने से आज तक भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है। जो बीमारी हमने 65 वर्षों में पाल पोस कर बहुत गंभीर बना दी है भला उसे एक दम कैसे खत्म किया जा सकता है?


ऐसा नहीं कि हमारे यहां भ्रष्टाचार से लड़ने को कानूनों की कमी है। लोकतंत्र में जो सबसे बेहतर व्यवस्था हो सकती है वह हमारे पास है और हमें उसी के आधार पर चलना चाहिए। लेकिन जहां जिसकी चलती है वह उतना ही असंगत काम करता है। बड़े लोग बड़े घोटाले करते आ रहे हैं और छोटे लोग छोटे घोटाले करते आ रहे हैं। कहने को कानून सबके लिए समान है लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं। कानून छोटे-बड़े और अमीर तथा गरीब के लिए अलग-अलग काम करता है।


रघुराज प्रताप सिंह जैसे लोगों को कई गंभीर मामलों के आरोपी होने के बावजूद मंत्री बना दिया जाता है। बहुत से भले लोगों को चुनाव में जनता वोट ही नहीं देती और वे चुनाव हार जाते हैं। कई अपराधी जेल में बंद रहते हुए चुनाव जीत जाते हैं।


अन्ना जी को पता होना चाहिए कि लोकपाल भ्रष्टाचार को खत्म नहीं कर पायेगा बल्कि उससे भ्रष्टाचार और भी बढ़ सकता है। भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए देश में जन जागरण की आवश्यकता है। उसके लिए बहुत परिश्रम और साहस की जरुरत है। जंतर-मंतर पर एक दिन का उपवास रखने या वंदेमातरम गाने से कुछ नहीं होने वाला। ठोस और रचनात्मक पहल इसके लिए जरुरी है। धैर्य और समर्पण की भी यहां जरुरत है। चुटकी बजा देने से यह काम नहीं होने वाला।


रही बात चुनाव की। अन्ना जी कह रहे हैं कि 2014 में वे मौजूदा सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ेंगे। ठीक है मान लें कि यदि यूपीए गठबंधन पराजित हो गया तो इसकी क्या गारंटी है कि नयी सरकार मौजूदा सरकार से बेहतर सिद्ध होगी।


1977 में कांग्रेस को पराजित कर जो जनता पार्टी की सरकार केन्द्र में बनी उसने देश की सारी व्यवस्था को ही चौपट करके रख दिया था।


क्या अन्ना या रामदेव के पास कोई ऐसा यंत्र है जिससे वे देशभक्त और ईमानदार उम्मीदवारों का चयन कर सकते हैं। यदि ऐसा है तो अन्ना जी इतने साल से आप कहां थे? अब भी आप यदि देश का भला करना चाहते हैं तो लोगों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जाग्रति लाने का प्रयास करें। उसके लिए गांव-गांव और घर-घर जाना होगा। कभी अनशन और कभी मौन के बजाय कुछ ठोस करके दिखायें।

1100 करोड़ रुपये के लोन का घोटाला!

सीवीसी अधिकारियों ने बताया कि एक निजी कंपनी यह कहकर विभिन्न बैंकों से ऋण ले रही थी कि उसका उपयोग विभिन्न राज्यों के किसानों द्वारा अरंडी के बीज की खेती करने और आपूर्ति करने के लिए किया जाएगा.


विस्तृत जांच के दौरान बैंक ऑफ महाराष्ट्र के मुख्य सतर्कता अधिकारी को अनियमितता नजर आयी और उन्होंने पाया कि कंपनी ने 50 करोड़ रूपए की कथित धोखाधड़ी की है.


एक सीवीसी अधिकारी ने कहा, ‘मामला अन्य बैंकों और आयोग के संज्ञान में लाया गया तथा आयोग ने पाया कि इस पूरे मामले में 1100 करोड़ रूपए शामिल है.’ उन्होंने बताया कि नौ बैंकों के समूह ने उसे ऋण दिया.


अधिकारी ने कहा, ‘ऋण की राशि कंपनी द्वारा नियुक्त ग्राम स्तरीय समूहों के माध्यम से गबन कर ली गयी. यह ऋण अब गैर निष्पादित संपत्ति हो गयी है और उसे धोखाधड़ी घोषित कर दिया गया.’ हालांकि अधिकारी ने ज्यादा ब्यौरा नहीं दिया.


आयोग ने बैंकों को सलाह दी कि मामले में कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और उनसे सीबीआई में मामला दर्ज कराने को कहा गया है. उन्होंने कहा, ‘सीबीआई को मामला दर्ज करने और जांच करने को कहा गया है.’

अन्ना के आंदोलन पर अखिलेश और आजम की राय अलग अलग

नई दिल्ली। अन्ना के आंदोलन के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी में दो फाड़ में नजर आ रही है। जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान आरोप लगा रहे हैं कि टीम अन्ना की बागडोर आरएसएस और बीजेपी के हाथों में है और टीम अन्ना भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के हाथों में खेल आराजकता फैला रही है।


वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि कालेधन पर आन्दोलन करने वालों का वो स्वागत करते हैं और उनको बधाई देते हैं।


वहीं टीम अन्ना के सदस्यों के तल्ख बयान के बाद योग गुरु स्वामी रामदेव के कहा की अन्ना हजारे और हम एक है और देश के करोड़ों लोग भी उन्हें एक साथ देखना चाहते हैं। बाबा रामदेव ने कहा है कि उनकी लड़ाई व्यक्तियों की लड़ाई नहीं है बल्कि दोनों ही आंदोलन भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ हैं।
उन्होंने कहा कि भले ही हम लोग अलग-अलग रहते हुए काम करें लेकिन जब भी जरूरत होगी हम लोग एक साथ एक मंच पर होंगे।

अन्ना-रामदेव बोले, नहीं हमारे बीच विवाद

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने अपनी टीम में किसी प्रकार के विवाद से इंकार करते हुए सोमवार को कहा कि वे योग गुरु बाबा रामदेव के साथ यात्रा नहीं करेंगे, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी लड़ाई में जहां भी जरूरत होगी वे वहां उनके साथ मंच पर मौजूद रहेंगे।


महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि रवाना होने के लिए दिल्ली हवाईअड्डे पर पहुंचे हजारे ने संवाददाताओं से कहा, "मैंने आपसे पहले भी कहा कि मैं और रामदेव एक साथ यात्र नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम दोनों कालाधन वापस लाने और जनलोकपाल और लोकायुक्त विधेयक पास करवाने जैसे समान उद्देश्य के लिए लड़ रहे हैं। हम एक साथ खड़े होंगे और जब भी जरूरत होगी एक मंच पर मौजूद होंगे।"


अन्ना हजारे के बाबा रामदेव के साथ राष्ट्रव्यापी प्रचार पर जाने की घोषणा के कारण टीम अन्ना में विवाद की खबरों के बाद अन्ना की यह टिप्पणी आई है।


अन्ना ने कहा, "महाराष्ट्र की एक साथ यात्रा के बाद यह सम्भव है कि हम एक मंच साझा करेंगे।" अन्ना हजारे जून के अंत से राष्ट्रव्यापी दौरे पर निकलेंगे।

अन्ना बनाम रामदेव: शुरू से अब तक


लोकपाल और काले धन के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले समाज सेवी अन्ना हजारे और योग गुरु बाबा रामदेव में अपने अभियान की सफलता को लेकर शुरू से ही होड़ मची हुई है। टीम अन्ना का मकसद सशक्‍त लोकपाल बिल पारित करवाना और बाबा रामदेव विदेशों में जमा काले धन की स्वदेश वापसी कराकर जनता का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते हैं।


अन्ना ने टीम में दरार को खारिज किया
जनता से खासा समर्थन हासिल करने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे और बाबा रामदेव केंद्र सरकार के खिलाफ चलाए जा रहे अपने अभियान की सफलता के लिए खुले मंच पर एक-दूसरे का साथ देने का वादा करते हैं। लेकिन टीम अन्ना में बाबा रामदेव के साथ मंच साझा करने को लेकर दरार साफ नजर आती हैं। टीम अन्ना ने बाबा रामदेव के साथ चलने का खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया। हालांकि टीम अन्ना में दरार की अटकलों को अन्ना हजारे ने खारिज कर दिया।


मेरे पास खुद आई थी टीम अन्ना
अब बाबा रामदेव ने टीम अन्ना के साथ गठजोड़ पर चुप्पी तोड़ दी हैं। बाबा ने कहा कि टीम अन्ना खुद मेरे पास गठजोड़ के लिए आई थी। बाबा रामदेव ने एक निजी समाचार चैनल से खास बातचीत में कहा कि टीम अन्ना मेरे पास गठजोड़ के लिए हरिद्वार आई थी। मैं उनके पास नहीं गया। रामदेव ने कहा कि देश के करोडों लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर हमने यह फैसला किया था। अब सवाल यह उठता है कि क्या अन्ना हजारे और बाबा रामदेव एकसाथ आगे चल पाएंगे?


अन्ना और बाबा के नेटवर्क व अनुयायी
इस मामले में बाबा रामदेव अन्ना से कई कदम आगे हैं। बाबा रामदेव के पास अन्ना हजारे की तुलना में बेहतर जनाधार, संगठन शक्ति, साधन और बाहरी समर्थन हासिल है। अन्ना को जनता सिर्फ एक जनसेवक या एनजीओ कार्यकर्त्ता के रूप में जानती थी, जबकि बाबा आस्था चैनल पर योग करते करते इंटरनेशनल योग गुरू बन गए।


वहीं अन्ना के पीछे सिविल सोसायटी का आधुनिक पढ़ा-लिखा वर्ग और बुद्धिजीवियों का गुट है। उन लोगों के सभी काम व्हाइट मनी से होते हैं। यही चीज वो व्यवस्था में चाहता है। दूसरी तरफ बाबा को फॉलो करने वाला वर्ग ये तो जानता है कि बाबा भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं लेकिन किस तरह के भ्रष्टाचार से, वो नहीं जानता। उसे नहीं पता, काला धन कहां से आया और कहां गया। शायद यही कारण है कि रामलीला मैदान मे जमा लाखों लोगों में काला धन मामले में रामदेव का समर्थन करने वाले कम थे और उनके योग अनुयायी ज्यादा।


सबसे खास बात अन्ना ने अनशन के लिए किसी को नहीं बुलाया, आम जनता खुद ब खुद उनके समर्थन में आई जबकि बाबा रामदेव ने रामलीला मैदान में आंदोलन के लिए देश भर मे जनसंपर्क किया फिर भी वहां केवल उनके अनुयायी आए, आम जनता नहीं।


अन्ना और बाबा के उद्देश्य
अन्ना का उद्देश्य स्पष्ट है। उनकी शैली सादगीपूर्ण है और रवैया स्पष्ट। उनका उद्देश्य फिलहाल लोकपाल बिल में जरूरी सुधार लाना है, न कि देश की व्यवस्था को बदलना। अन्ना लोकपाल बिल में क्या चाहते थे, वो स्पष्ट कर चुके हैं। शायद यही कारण है कि सरकार के पास उनकी बात काटने के लिए कोई तलवार नहीं होती। अन्ना काफी समय से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर काम करते आ रहे हैं। लेकिन वे चुनाव लड़कर संसद में आना चाहते हैं, उनकी बॉडी लेंग्वेज से ऐसा नहीं लगता।


दूसरी तरफ बाबा की शैली योग से आरंभ होकर आक्रामक सेना के सरदार सरीखी हो गई है जो किसी भी हालत में सरकार को अपने कदमों में गिराना चाहता है। बाबा चाहते थे कि काला धन वापस लाया जाए लेकिन कैसे, इसकी कोई योजना उनके पास नहीं थी। बाबा पांच सौ के नोटों का चलन बंद कराना चाहते हैं। उनका 11 सौ करोड़ रुपए का साम्राज्य केवल सफेद पैसे से खड़ा है, इसका कोई जवाब बाबा के पास नहीं है। बाबा के पास मुद्दे तो बहुत हैं लेकिन योजना नहीं है।


किसकी क्या हैं खासियतें
अन्ना की खासियत उनका सादापन और उम्र है अपना परिवार न होने के कारण उन्हें संपत्ति से कोई मोह नहीं। इससे पहले भी अन्ना समाज के लिए कई काम करते आए हैं। लोग उनके मुरीद हैं। उनकी सलाहकार समिति में भी जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं। सहयोगियों पर लगे आरोपों के बावजूद काजल की कोठरी में अन्ना अभी भी पाक-साफ हैं।


बाबा रामदेव गजब के योग गुरु हैं। उनकी दवाओं के मुरीद देश और विदेश में हैं। उन्हें अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है। योग गुरु के लाखों करोड़ों अनुयायी हैं। उनकी दवाएं कई लोगों पर असरकारी साबित हुई हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि देश के हर कोने में और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बाबा के अनुयायी हैं। कई विदेशियों ने अपनी संपत्ति तक बाबा के नाम कर दी है।


क्या हैं कमजोरियां
अन्ना की अपनी कोई खास कमजोरी तो नहीं लेकिन वो अपनी टीम की गुटबाजी से कमजोर पड़ रहे हैं। अन्ना की टीम के लगभग हर सदस्य पर कोई न कोई आरोप लग चुका है। टीम में फूट पड़ चुकी है और टीम हर मौके पर अन्ना पर हावी होना चाहती है। लोकपाल विधेयक के गठन से पहले ही ‌अन्ना की टीम सरकार के निशाने पर आ गई थी। शांति भूषण के सीडी प्रकरण को खूब उछाला गया। आरोप लगते हैं कि अन्ना की कोई अपनी सोच नहीं है, जो सोच है वो उ‍नके गुट की है। इस गुट में शांति भूषण, अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी जैसे लोग हैं। काजमी बाबा को लेकर अन्ना टीम से अलग हो चुके हैं। किरण और केजरीवाल भी अपनी छव‌ि को सुधार पाने में नाकामयाब रहे हैं।


दूसरी ओर अदूरदर्शिता और उतावलापन ही बाबा रामदेव की सबसे बड़ी कमजोरी है। बाबा अपने अनुयायियो को ही आम जनता और वोटर समझने की भूल कर बैठे थे। वो समझने लगे कि बड़े से बड़ा नेता उनसे योग सीखता है और वो नेताओं के नेता हैं। बाबा को लगा कि राजनीति योग जितनी ही आसान है। बाबा योगी से समाज सेवक और अन्त में राजनेता बनते-बनते कहीं के भी नहीं रहे। बाबा के हाहिने हाथ कहे जाने वाले बालकृष्ण पर अंधविश्वास भी बाबा की कमजोरी कही जा सकती है।
" "