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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

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तो हम शीला दीक्षित के घर की बिजली काट देंगे : अरविंद केजरीवाल


अरविंद केजरीवाल ने मंच से पार्टी के अगले कार्यक्रम का ऐलान करते हुए कहा कि हम हम दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अगर बढ़े हुए बिजली बिल माफ नहीं किए गए तो हम दिल्ली के 62 विधानसभा चुनावों क्षेत्रों में इकट्ठा होकर फिर बिजली बिल जलाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर बिजली बिल न भरने की वजह से लोगों की बिजली काटी जाती है तो 4 नवंबर में जनता मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घर इकट्ठा होकर उनकी बिजली काट देगी।

दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में अरविंद केजरीवाल की नई पार्टी कैसी होगी, इसकी रूपरेखा जारी कर दी गई है। पार्टी के नाम का ऐलान फिलहाल नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि इसकी घोषणा 26 नवंबर को होगी। इस बीच, केजरीवाल के सहयोगी और टीम अन्ना के सदस्य रहे कुमार विश्वास ने कहा कि वह पार्टी का हिस्सा नहीं होंगे। दिल्ली के कंस्टिट्यूशनल क्लब में चल रहे इंडिया अंगेस्ट करप्शन के कार्यक्रम में टीम केजरीवाल के प्रशांत भूषण, शांति भूषण, मनीष सिसोदिया, योगेंद्र यादव व कई अन्य समर्थक की मौजूदगी में पार्टी के विजन डॉक्युमेंट, उम्मीदवारों को चुनने की प्रक्रिया आदि के बारे में बताया गया।


पार्टी के नाम की घोषणा 26 नवंबर को
मनीष सिसोदिया ने कहा है कि उनकी पार्टी के नाम का ऐलान अगले महीने किया जाएगा। सिसोदिया ने कहा, पार्टी के नाम की घोषणा के लिए 26 नवंबर की तारीख चुनी गई है क्योंकि 1949 में इसी तारीख को संविधान सभा ने देश के संविधान को स्वीकार किया था।

कुमार विश्वास पार्टी में नहीं
केजरीवाल के सहयोगी कुमार विश्वास ने कहा है कि वह पार्टी में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा, 'वह बाहर रहकर पार्टी का समर्थन करेंगे। कपिल सिब्बल के खिलाफ केजरीवाल के चुनाव लड़ने संबंधी अन्ना हजारे के बयान पर कुमार विश्वास ने कहा कि सिब्बल को कोई भी हरा देगा और इसके लिए केजरीवाल की जरूरत नहीं है।

दरअसल, कल अन्ना ने कहा था कि अगर चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र से सिब्बल के खिलाफ केजरीवाल चुनाव लड़ते हैं तो वह उनके पक्ष में प्रचार करेंगे। कभी टीम अन्ना के सदस्य रहे कुमार विश्वास ने कहा, 'मक्खी मारने के लिए बोफोर्स क्यों निकाली जाए। सिब्बल को कोई भी हरा देगा। इसके लिए केजरीवाल की जरूरत नहीं है।'

पार्टी के ड्राफ्ट में क्या? 
पार्टी के नाम की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन पार्टी के ड्राफ्ट को जारी कर दिया गया है। पार्टी का अगला कदम जनलोकपाल आंदोलन को राजनीतिक क्रांति में बदलना है। ड्राफ्ट में पार्टी कैसी होगी इसके बारे में मोटे तौर पर बताया गया है। ड्राफ्ट में कहा गया है कि पार्टी दूसरी पार्टियों से अलग होगी। ड्राफ्ट में मुख्य बातें हैं-

जनलोकपाल आंदोलन का अगला कदम राजनीतिक क्रांति है। ड्राफ्ट में बताया गया है कि पार्टी क्या-क्या करेगी। जैसे इसमें कहा गया है कि इसमें सीधे जनता का राज होगा और इसका नियंत्रण सीधे जनता के हाथों में होगा। पार्टी का काम भष्टाचार दूर करना और महंगाई दूर करना है। ड्राफ्ट के अनुसार चीजों के दाम जनता तय करेगी। ड्राफ्ट में इसके अलावा राइट टु रिजेक्ट, राइट टु रिकॉल को भी शामिल किया गया है।

यह दूसरी पार्टियों से कैसे अलग होगी इसके बारे में भी ड्राफ्ट में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि पार्टी का कोई भी सांसद/विधायक लाल बत्ती वाली गाड़ी से नहीं चलेगा। जीतने के बाद किसी भी तरह की सुरक्षा नहीं लेगा और कोई भी सासंद/विधायक बड़े बंगले में नहीं रहेगा।

'मेरी नहीं, जनता की पार्टी'
इससे पहले सुबह अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी जनता की पार्टी होगी। उन्होंने कहा कि जनता देश में बदलाव चाहती है। जनता को राजनीतिक विकल्प देने के लिए ही वह पार्टी बना रहे हैं। अन्ना हजारे पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी और अन्ना हजारे की मंजिल एक है।

अब 'मैं हूं आम आदमी' टोपी
पार्टी के ऐलान से पहले इंडिया अगेंस्ट करप्शन के वर्कर्स एक बार फिर नई टोपी में नजर आए। इस बार उनकी टोपी पर 'मैं हूं आम आदमी' लिखा नजर आया। गौरतलब है कि जब अन्ना और अरविंद केजरीवाल मिलकर जनलोकपाल आंदोलन चला रहे थे, तब टोपी में 'मैं हू अन्ना' लिखा नजर आता थ। अन्ना से अलग होने के बाद टोपी पर 'मैं हूं केजरीवाल' लिखा नजर आने लगा। इसकी खूब आलोचना हुई थी।

गांधी जयंती पर महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को शत शत नमन

महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री

गांधी जयंती पर महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को शत शत नमन 


आज  2 अक्टूबर, गांधी जयंती है । इसी दिन हमारे पूर्वप्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का भी जन्मदिन है । गांधी जयंती हम दशकों से मनाते आ रहे हैं, और अब तो ‘अंताराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ (International Nonviolence Day) के तौर पर उसे विश्व स्तर के दिवस का दर्जा भी मिल चुका है । औपचारिकता के नाते ही सही, गांधी को याद करने वाले कम नहीं हैं । उस दिन की सरकारी छुट्टी प्रायः हर किसी को गांधी की याद तो दिला ही जाती है । लेकिन शास्त्रीजी का भी यही जन्मदिन है यह बात शायद कम ही लोगों के ध्यान में आती होगी । उनके संक्षिप्त प्रधानमंत्रित्व काल और तासकंद में उनकी ‘रहस्यमय’ मृत्यु का कुछ स्मरण तो बुढ़ा रही मेरी पीढ़ी के लोगों को होगा ही ।

उन दोनों दिवंगत जननेताओं – एक तो महात्मा ही माने जाते हैं – को मैं श्रद्धांजलि पेश करता हूं । इसके अतिरिक्त मैं कर भी क्या सकता हूं भला ! उनकी जो बातें मुझे ठीक लगती हैं उन्हें अपनाने की भरसक कोशिश करते ही आ रहा हूं । यह भी बता दूं कि उनकी हर बात, खासकर गांधीजी की, हर बात मुझे सही नहीं लगती है । शास्त्रीजी के बारे में बहुत कुछ कहने को नहीं है । उन्हें एक ईमानदार राजनेता एवं प्रधानमंत्री के तौर पर जाना जाता है । बस इतना ही काफी है । किंतु गांधीजी के बारे में बहुत कुछ कहा जा सकता है । वे विवादों से पूरी तरह परे रहे हों और सभी उन्हें समान रूप से सम्मान देते आए हों ऐसा नहीं हैं ।

श्रद्धा का आधार

अस्तु इस अवसर पर गांधीजी को लेकर एक टिप्पणी प्रस्तुत करने का मन है मेरा । गांधीजी को सारे विश्व में अहिंसा के पुजारी के तौर पर जाना जाता है । किंतु लोग यह भूल जाते हैं कि अहिंसा उनके विचारों या जीवन दर्शन का मात्र एक पहलू था । क्या और कुछ भी ऐसा नहीं रहा है जिसके लिए उन्हें याद किया जाए ? दूसरे शब्दों में क्या कुछ ऐसी बातें गांधी-दर्शन में नहीं रही हैं जो अहिंसा के भी ऊपर हों ? क्या कारण है कि उन्हें केवल अहिंसा के लिए इतना याद किया जाता है ? (देखें पहले कभी लिखा आलेख)

गांधीजी उन गिने-चुने महान् व्यक्तियों में से एक हैं जिनको मैं विशेष श्रद्धा के साथ याद करता हूं । बमुश्किल आठ-दश लोग होंगे, बस । दुर्भाग्य से वर्तमान समय में एक भी नहीं जिसे मैं श्रद्धेय पाता हूं । फिर भी मैं गांधीजी की हर बात को सही नहीं मानता, उनका हर विचार या व्यवहार मेरे लिये स्वीकार्य नहीं है । उन बातों को लेकर मैं उनकी आलोचना करने से नहीं हिचकता । मैं उन्हें श्रद्धेय इसलिए मानता हूं कि वे संकल्प के धनी थे, उनकी करनी और कथनी में पर्याप्त संगति रहती थी, जो आज के अतिसम्मानित माने जाने वाले किसी चर्चित व्यक्ति में नहीं दिखाई देती है । वे समाजहित के प्रति संवेदनशील थे । उनके इरादे नेक थे । उनमें अनेकों ऐसी बातें थीं जो बिरले लोगों में ही देखने को मिलती हैं । फिर भी मेरी दृष्टि में अहिंसा उनके विचारों का सर्वाधिक कमजोर पक्ष था । इस माने में मैं गांधीजी को एक भ्रमित व्यक्ति मानता हूं । कैसे यही मैं स्पष्ट करना चाहता हूं ।

अहिंसा की बात

हिंसा प्राणीमात्र की एक कमजोरी है, ठीक वैसे ही जैसे भूख-प्यास, भय, क्रोध, काम (यौनेच्छा), छल, वर्चस्व, प्रेम, करुणा, आदि । अविकसित जीवधारियों में ये बहुत स्पष्ट तौर पर नहीं दिखाई देते हैं, किंतु विकसित में कमोबेश नजर आ ही जाते हैं । और मनुष्यों में तो इससे आगे बहुत कुछ और भी देखने को मिलता है, जैसे धन-संपदा संग्रह करने की लालसा, दूसरे को अपनी हैसियत दिखाने की प्रवृत्ति, निंदा-प्रशंसा करना, एवं उनसे प्रभावित होना, बदले की भावना, और अहंकार, इत्यादि । शायद ही कोई व्यक्ति हो जो इनसे मुक्त हो । लेकिन इन सबके ऊपर विवेक है जो मनुष्य को अन्य जीवधारियों से भिन्न बनाता है । यही विवेक उसे अपनी तमाम कमजोरियों का ‘दमन’ अथवा ‘शमन’ करने को प्रेरित करता है, उसी के बल पर वह स्थिति को नियंत्रण में रखता है । विवेक के कारण ही प्राचीन मनीषियों ने मानव योनि को कर्मयोनि एवं अन्यों को भोगयोनि कहा है ।

किंतु विवेक की तीव्रता तथा उसकी प्रभाविता सबमें समान रूप से विद्यमान नहीं रहती हैं । अनुभव बताता है कि जहां एक ओर लोग दूसरों के कष्ट से स्वयं दुःखी होते हैं, तो वहीं अन्य दूसरों को कष्ट में देख या उन्हें कष्ट देकर आनंदित भी होते हैं । आप राक्षसी वृत्ति कहकर इस प्रवृत्ति की निंदा कर सकते हैं, लेकिन इसके अस्तित्व को मानने से इनकार नहीं कर सकते हैं और न ही उसे मिटा सकते हैं । जो है सो है ही, हमें अच्छा और स्वीकार्य लगे या बुरा तथा अवांछित, कोई माने नहीं रखता है । मनुष्यों में अवगुण क्यों होते हैं, वे कहां से आते हैं, उनसे मुक्ति कैसे मिल सकती है, जैसे प्रश्नों के बारे में तमाम तरह के मत हो सकते हैं । मैं उनकी चर्चा में नहीं पड़ता, मैं तो इस बात पर जोर डालना चाहता हूं कि लोगों में गुण-अवगुण कमोबेश होते ही हैं, किसी में बेहद कम तो किसी में बेहद अधिक भी । और यही तथ्य व्यवहार में माने रहता है ।

अवगुणों से आप मानव समुदाय को मुक्त नहीं कर सकते हैं । संभव है कि आप किसी एक को या कुछएक को प्रेरित कर लें, उन्हें अवगुणों से मुक्त कर लें, किंतु सब पर प्रभाव नहीं डाल सकते हैं । इतिहास साक्षी है कि कभी भी ऐसा कोई महापुरुष पैदा नहीं हुआ है जो पूरे समाज को ‘रास्ते’ में ला सका हो, यहां तक कि उन लोगों को भी नहीं जो उसके अनुयायी होने का दम्भ भरते हों । अगर ऐसा होता तो बुद्ध, महावीर या ईसा के ‘तथाकथित’ अनुयायी अहिंसक होते । यह भरोसा करना भी मूर्खता होगी कि वारंवार के अनुनय-विनय से कोई व्यक्ति मान ही जाएगा और उस रास्ते पर चल पड़ेगा जिसे श्रेयस्कर बताया गया हो ।

प्रभावी है क्या अहिंसा का मार्ग?

मेरी दृष्टि में अहिंसा के रास्ते को ही एकमात्र एवं उचित रास्ता बताना गांधीजी की कमजोरी थी । वे यह मानते थे, जितना मैं समझ पाया हूं, कि अहिंसक विरोध या असहयोग के माध्यम से आप दूसरों को अपने पक्ष में कर सकते हैं । किंतु ऐसा मानना आम सामाजिक अनुभव को नकारना है । यह संभव है कि जिस व्यक्ति में संवेदनशीलता तथा उदारता का पर्याप्त अंश हो वह आपके निरंतर चल रहे विरोध से पसीज जाए और आपकी बात मान ले । लेकिन ऐसा सभी के साथ नहीं हो सकता है । ऐसे लोग भी इस धरती पर मिलेंगे, जो आपके विरोध पर और अधिक उग्र एवं कठोर हो जाएंगे । आपका विरोध यदि किसी के अहंभाव को ठेस पहुंचावे तो वह शायद ही आपकी बात माने । जैसे आप अपनी बात पर अड़े रहें, यह दावा करते हुए कि आप सही हैं, वैसे ही वह भी अपनी जिद नहीं छोड़ने वाला । तब आपका अहिंसक विरोध निष्फल होना ही है ।

असल तथ्य यह है कि हिंसक आंदोलन अधिक प्रभावी होता है । ऐसा सुनना बृहत्तर जनसमुदाय को अच्छा नहीं लगेगा । परंतु यह समाज की एक वास्तविकता है, ऐसा मेरा मानना है । इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि कोई भी जीवधारी भय की सहज वृत्ति से मुक्त नहीं होता है, मनुष्य भी नहीं । अवश्य ही कुछएक मनुष्य सिद्धांतों के प्रति इतने समर्पित हो सकते है कि भय की भावना कमजोर पड़ जाए । किंतु ऐसा अपवाद-स्वरूप कभी-कभार होता है न कि सामान्यतः । ऐसे अपवादों को छोड़ दें तो अधिसंख्य लोग भय के वश में रहते हैं । हिंसा की संभावना इस भय की जननी होती है । इसलिए अहिंसा की तुलना में हिंसा कहीं अधिक प्रभावी होती है, भले ही हम अहिंसा की बात जोरशोर से करें ।

सामाजिक व्यवस्थाएं हिंसा पर आधारित होती हैं - ऐसी हिंसा जिसे वैधानिक मान्यता मिली रहती है । राष्ट्रों के बीच शांति एवं समझौता सैनिक-हिंसा के भय पर ही आधारित रहती है । राष्ट्र के भीतर भी व्यवस्था हिंसक बल-प्रयोग से ही संभव हो पाती है । आज तो स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि अहिंसक आंदोलनों को सरकारें एवं संस्थाएं नजरअंदाज कर देती हैं । संवाद-प्रक्रिया भी तभी स्थापित हो पाती है जब आप हिंसक आंदोलन पर उतरते हैं या उसका भय विरोधी पक्ष को दिखाते हैं ।

मानव समाज में आदर्श मूल्य कभी भी पूर्णरूपेण स्थापित रहे होंगे यह मैं नहीं मान सकता, तथाकथित सत्ययुग में भी, फिर भी हालात इतने बुरे शायद नहीं रहे होंगे । आज मूल्यों में काफी गिरावट आ चुकी है, और लक्ष्य-प्राप्ति में हिंसा एक प्रभावी हथियार बन चुका है । मुझे लगता है कि गांधीजी के अहिंसा-सिद्धांत की व्यावहारिक प्रभाविता अब बाकी नहीं बची है ।


दमन (suppression) – सहज कमजोर प्रवृत्ति को नियंत्रण में रखना, ताकि वह व्यवहार में प्रतिबिंबित न होने पावे और व्यक्ति किसी प्रकार के अनिष्ट करने/कराने से बचा रहे । लेकिन तत्संबधित भाव मनुष्य में विद्यमान रहता है ।

शमन (subsidence) – कमजोर प्रवृत्ति को शांत कर लेना । तब आप वस्तुतः उससे मुक्त हो जाते हैं, इसलिए तज्जनित परिणामों की संभावना नहीं रह जाती है । शमन गंभीर आत्मचिंतन, आत्मपरिष्करण एवं मानसिक तप से प्राप्य स्थिति को दर्शाता है ।

उदाहरणार्थ जब कोई आपकी निंदा करे तो आप गुस्से से आगबबूला हो सकते हैं और मारपीट-गालीगलौज पर उतर सकते हैं । किंतु कतिपय व्यावहारिक कारणों के चलते आप वक्ता से उलझने के बजाय चुपचाप दूर हट सकते हैं । किंतु “मेरी निंदा की गयी” इस बात का कष्ट आपको बना रहेगा और उसका उल्लेख अपने मित्रों से करके आप हल्का भी हो लेंगे । शमन की अवस्था में आप उस निंदा से अप्रभावित रहेंगे, आपके मन में कोई प्रतिक्रिया ही नहीं होगी । निंदा से विचलित होने और प्रशंसा से प्रसन्न होने के ‘मनोविकारों’ से आप ऊपर उठ चुके होंगे ।

मेरी नहीं जनता की होगी पार्टीः केजरीवाल


अपनी राजनीतिक पार्टी के एलान से पहले टीम अन्ना से अलग हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये पार्टी उनकी नहीं बल्कि जनता की पार्टी होगी. केजरीवाल ने साथ ही कहा कि देश की जनता अब भ्रष्टाचार से त्रस्त हो चुकी है.

अरविंद लड़े चुनाव तो अन्ना करेंगे समर्थन

केजरीवाल ने पार्टी के एलान से पहले कहा, 'हम विजन डाक्यूमेंट व कार्यक्रम जारी करेंगे. साथ ही उम्मीदवारी की चयन प्रक्रिया का भी एलान किया जाएगा.'

केजरीवाल अन्ना से भले ही अलग हो गए हों लेकिन उन्होंने कहा कि उनकी और अन्ना हजारे की मंजिल एक ही है. केजरीवाल ने कहा कि पार्टी के नाम की घोषणा बाद में की जाएगी.

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जनता भ्रष्टाचार से त्रस्त है और बदलाव चाहती है.

Anna Hazare backs Arvind Kejriwal once again

Social activist Anna Hazari once again said that Arvind Kejriwal is good person. But he did not explained if he is good then what will be his stand for him.


अन्ना को मना नहीं पाए केजरीवाल


 जनलोकपाल के लिए अभियान चलाने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे आज अपनी नई टीम की घोषणा कर सकते हैं। करप्शन के खिलाफ अपने अभियान को तेज करने के लिए अन्ना दिल्ली में अपने समर्थकों के साथ बैठक कर रहे हैं। किरन बेदी भी अन्ना से मिलने आई हैं।

इस बीच अन्ना से अलग हो चुके इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसौदिया ने सोमवार सुबह अचानक अन्ना हजारे से मुलाकात की। दोनों की मुलाकात से यह चर्चा भी छिड़ी कि क्या केजरीवाल अन्ना को मनाने आए थे? गौरतलब है कि केजरीवाल की अन्ना से मतभेद के बाद यह पहली मुलाकात है।

केजरीवाल अन्ना से मुलाकात के बाद इस बारे में कुछ नहीं बोले, हालांकि उन्होंने कहा कि वह अन्ना के साथ हैं। केजरीवाल ने कहा कि उनके और अन्ना के बीच कोई झगड़ा नहीं है। उन्होंने कहा कि अन्ना जो भी आंदोलन चलाएंगे, वह समर्थन देंगे। अन्ना से अलग हुए उनके निजी सचिव सुरेश पठारे के बारे में केजरीवाल ने कहा कि पठारे उनसे जुड़ना चाहें, तो उनका स्वागत है। गौरतलब है कि केजरीवाल 2 अक्टूबर को नई पार्टी की घोषणा करने वाले हैं।

कौन होगा अन्ना का नया 'सारथी'?
अन्ना हजारे की राहें केजरीवाल से अलग होने के बाद अब अगले स्टेज की तैयारी दोनों खेमों में शुरू हो चुकी है। अन्ना जहां एक ओर अपनी नई टीम की रणनीति बनाने में जुटे हैं, वहीं केजरीवाल अपनी पार्टी की घोषणा की तैयारी भी पूरी कर चुके हैं। केजरीवाल और उनके सहयोगियों के अलग होने के बाद अन्ना हजारे को दिल्ली की गतिविधियों को संभालने के लिए किसी ऐसे शख्स की जरूरत है, जो उनकी कमी को पूरा कर सकें।

दिल्ली में किसी कद्दावर कोऑर्डिनेटर की जरूरत को अन्ना नकार नहीं सकते। अभी अन्ना अपनी नई टीम के लिए जिन नामों पर गंभीरता से सोच रहे हैं, उनमें संभावित हैं।

मेधा पाटकर- नर्मदा बचाओ आंदोलन से चर्चा में रहने वाली मेधा पाटकर अन्ना के आंदोलन का शुरू से ही हिस्सा रही हैं। शुरुआती दौर में वह मंच पर भी देखी गईं। जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ा उन्होंने इसे बस नैतिक समर्थन दिया और सक्रिय भूमिका से खुद को अलग कर लिया। सूत्रों की माने तो इसके पीछे केजरीवाल का पूरे आंदोलन को लेकर मनमाना रवैया रहा है। अब केजरीवाल के अलग होने के बाद इस बात की संभावना जताई जा रही है कि वह अन्ना के साथ फिर नजर आएंगी।

राजेंद्र सिंह-वाटर हार्वेस्टिंग के लिए दुनिया भर में पहचान बना चुके और रैमन मैग्सेसे पुरस्कार पाने वाले राजेंद्र सिंह भी पहले अन्ना की कोर कमिटी का हिस्सा रहे हैं। जैसे जैसे आंदोलन आगे बढ़ा राजेंद्र सिंह ने भी इससे किनारा कर लिया। आंदोलन के कई मुद्दों से उन्होंने अपने को अलग पाया और कोर कमिटी से इस्तीफा दे दिया। अब अन्ना के साथ फिर उनके वापस आने की संभावना भी जताई जा रही है।

मौलाना काजमी -टीम अन्ना का अल्पसंख्यक चेहरा रहे मौलाना काजमी को मीटिंग के दौरान जासूसी करने के आरोप में बाहर का रास्ता दिखाया गया था। उन पर आरोप लगा था कि वह मीटिंग की मोबाइल पर विडियो रिकॉर्डिंग बना रहे थे। उन्होंने इस बात पर भारी गुस्सा जताया था और इसके पीछे केजरीवाल की मनमानी बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि अरविंद ने पूरे आंदोलन को हाई जैक कर लिया है। केजरीवाल के अलग होने के बाद वह भी अन्ना के करीब आ सकते हैं।

जनरल वीके सिंह -अन्ना ने दिल्ली आने के बाद सेना और सिविल दोनों के ही रिटायर्ड अधिकारियों से मुलाकात की है। इस बात से यह तो तय है कि वह अपने आंदोलन में इन्हें शामिल करने का मन भी बना रहे हैं। जनरल वीके सिंह ने पिछले आंदोलन में मंच पर आकर यह जता दिया था कि वह करप्शन के खिलाफ लड़ाई के लिए कमर कस चुके हैं। अगर वह भी अन्ना के साथ नजर आएं तो कोई हैरानी की बात नहीं है।

जागरूक और निर्भय बने पुलिस हमारी सेवक हे !

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