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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

मैं फिट हूं, मुहिम जारी रहेगीः अन्ना

लोकपाल मुद्दे पर महाराष्ट्र के दौरे के दौरान तबीयत खराब होने पर नासिक पहुंचे अन्ना हजारे को थकान और कमजोरी की शिकायत हुई जिसके बाद दो अस्पतालों में विभिन्न जांच करायी गयी. जांच के बाद डॉक्टरों ने हजारे की हालत सामान्य बतायी है. हजारे का इलाज करने वाले हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सिनकर ने पत्रकारों से कहा कि गांधीवादी नेता दोपहर के वक्त जांच कराने के लिए उनके अस्पताल आए थे.
सिनकर ने बताया, ‘हमने उनकी छाती का एक्स-रे, ईसीजी, सीटी स्कैन कराया जिनकी रिपोर्ट सामान्य आयी है. उनका स्वास्थ्य अच्छा है. हमने अन्ना को एक दिन आराम करने के लिए कहा है.’

जब सिनकर से यह सवाल किया गया कि हजारे तीन जून को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित अनशन में हिस्सा लेने के लिए फिट हो जाएंगे, इस पर उन्होंने कहा कि वायरल संक्रमण की वजह से उन्हें बुखार था और यदि वह अनशन में हिस्सा लेते हैं तो शरीर में पानी की कमी की समस्या पैदा हो सकती है. हालांकि सिनकर ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह हजारे को इस मामले में कोई सलाह नहीं देंगे.

बाद में हजारे ने खुद ही पत्रकारों से कहा, ‘मैं पूरी तरह फिट हूं और मेरे कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं हुआ है. मैं कमजोरी महसूस कर रहा था और मैंने जांच करायी है.’ इससे पहले, अन्ना के सहयोगियों ने बताया था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले 74 वर्षीय समाज सेवी की स्थिति स्थिर है तथा वह शहर के सर्किट हाउस में विश्राम कर रहे हैं.

हजारे बुधवार की सुबह धुले शहर से पहुंचे और इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. लोकायुक्त विधेयक के मुद्दे पर हजारे एक मई से महीने भर के राज्य के दौरे पर हैं. उन्हें पहले साईंबाबा हार्ट इंस्टीट्यूट एवं रिसर्च सेंटर ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उनकी जांच की.

अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि साईंबाबा हार्ट इंस्टीट्यूट के चिकित्सकों ने हजारे का रक्तचाप नापा तथा उनकी दो अन्य चिकित्सा जांच की। इकोकार्डियोग्राम जांच भी की गयी. उन्हें सीटी स्केन के लिए बाद में विनचुरकर अस्पताल में ले जाया गया.

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की नासिक इकाई के अध्यक्ष पी बी करंजकर ने बताया कि हजारे यहां सर्किट हाउस में विश्राम कर रहे हैं.

जनवरी में हजारे को एक हफ्ते के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसी के चलते उन्हें विधानसभा चुनाव वाले पांच राज्यों का अपना दौरा बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा था. करंजकर ने बताया कि हजारे को गुरुवार की शाम यहां एक जनसभा को संबोधित करना है.

रूपये की गिरावट का सच जानिये

1..रूपये की गिरावट सरकार हमेशा विश्व बैंक और विश्व मुद्रा कोष के इशारे पर करती है ताकि सरकार को बाहरी कर्ज मिल सकें


2. क्या सिर्फ सयोंग है की मार्च 2012 में विश्व बैंक और विश्व मुद्रा कोष के मुखियाओं ने भारत की यात्रा की उसके बाद से रूपये में 15 % की भारी गिरावट आई है


3..क्या ये महज संयोग है की मार्च में ही सरकार ने 12 वी पंचवर्षीय योजना पर काम करना शुरू किया है .ये वही योजना है जिसके बहाने से सरकार कर्ज लेती है


4. आप आजादी के बाद के रूपये के अवमूल्यन का इतिहास देखिये जब जब पंचवर्षीय योजना शुरू की गयी तब तब विशव बैंक के कहने पर रूपये में सरकार ने भारी गिरावट की


5.इस बार सरकार ने रूपये में गिरावट पेट्रोल की कीमत बढ़ाने के लिए भी की .क्योंकी सरकार पेट्रोल पर 8 से 10 रूपये बढ़ाना चाहती है अब वो गिरावट का बहाना लेकर
कीमत बढाएगी जबकी गिरावट से नुक्सान सिर्फ 2 रूपये / ली है


6. कभी कभी रूपये में गिरावट ,सॉफ्टवेर ,कपड़ा उद्योग ,शेयर बाज़ार निर्यात करने वाली विदेशी कंपनियां को फायदा पहुंचाने के लिए भी किया जाता है इसके बदले में राजनेताओ को मोटी दलाली मिलती है


7.आजादी के समय रूपये की कीमत डालर के मुकाबले 1 रूपये थे अव वो 56 रूपये हो गयी है कही भारत बर्बाद तो नहीं हो चूका है सोचिये जरा !
हा एक और बात आम आदमी न तो सॉफ्टवेर बनाता है ,ना ही धागा बनता है ,ना ही निर्यात करता है ना है शेयर मार्केट में पैसा लगाता है वो तो पुरे दिन भर दो वक्त की रोटी खाने के लिए मेहनत करता है अब वो रोटी भी महँगी हो जायेगी .इसको ही तो अन्याय कहते हैं

पेट्रोल की ये है असली सच्चाई, जो सरकार ने अब तक थी छुपाई

पेट्रोल की कीमतों के बढ़ने के पीछे सरकार जरूर बाजार के हालात की दुहाई दे रही है, लेकिन इसकी असली सच्चाई तो कुछ और ही है। कीमतों में इजाफा तो खुद सरकार द्वारा लगाए जा रहे टैक्स के चलते हो रहा है। हालांकि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी इस बात को नहीं मानते हैं।


उन्होंने हाल ही में संसद में कहा था कि केंद्र सरकार तेल पर टैक्स नहीं वसूलती है, बल्कि राज्य इस पर फैसला लेता है। जबकि जानकार केंद्र सरकार को भी बतौर टैक्स इससे फायदा होने की बात कर रहे हैं। अगर ये सारे टैक्स पूरी तरह से खत्म कर दिए जाएं, तो आज से ही आप केवल 35 रुपये में पेट्रोल खरीद सकेंगे।


अगर केंद्र और राज्य सरकार पेट्रोल पर से पूरी तरह से टैक्स हटा दे, तो इसकी कीमतों में 35 रुपये से ज्यादा की कमी आ जाएगी। दरअसल, जिस दाम पर हम पेट्रोल खरीदते हैं, उसका करीब 48 फीसदी हिस्सा ही आधार मूल्य होता है। इसके अलावा बाकी का पैसा सरकार की जेब में टैक्स के रूप में जाता है। वहीं पेट्रोल पर करीब 35 फीसदी एक्साइज ड्यूटी, 15 फीसदी सेल्स टैक्स, 2 फीसदी कस्टम ड्यूटी लगा होता है। बिक्री कर को कई राज्यों में वैट के रूप में भी वसूला जाता है।



अगर हम दिल्ली में पेट्रोल की वर्तमान कीमत 73.14 रुपये को उदाहरण के तौर पर माने, तो टैक्स न लगने पर इसकी बेस प्राइस यानि असली कीमत केवल 35 रुपये ही रह जाएगी। अभी बाकी के 38 रुपये सीधे सरकार की जेब में जा रहे हैं।


तेल के बेस प्राइस में कच्चे तेल की कीमत, प्रॉसेसिंग चार्ज और कच्चे तेल को शोधित करने वाली रिफाइनरियों का चार्ज शामिल होता है। एक्साइज ड्यूटी कच्चे तेल को अलग-अलग पदार्थों जैसे पेट्रोल, डीज़ल और किरोसिन आदि में तय करने के लिए लिया जाता है। वहीं, सेल्स टैक्स यानी बिक्री कर संबंधित राज्य सरकार द्वारा लिया जाता है।

अन्ना हजारे का स्वास्थ्य खराब, अस्पताल में भर्ती

नासिक: अन्ना हजारे को थकान और कमजोरी की शिकायत के बाद आज यहां के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के सूत्रों ने कहा कि मजबूत लोकायुक्त के लिए पूरे राज्य के दौरे पर निकले हजारे आज सुबह यहां धुले शहर से पहुंचे। उन्हें साईंबाबा हार्ट इंस्टीट्यूट एवं रिसर्च सेंटर ले जाया गया जहां चिकित्सक उनकी जांच कर रहे हैं।


भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नासिक इकाई के अध्यक्ष पी. बी. करंजकर ने कहा, ‘‘थकान और कमजोरी के कारण हजारे ने नंदरबार जिले का दौरा रद्द कर दिया ।’’बहरहाल उन्होंने कहा कि हजारे के स्वास्थ्य के बारे में कोई गंभीर बात नहीं है और कहा कि गांधीवादी नेता कल शाम यहां एक आम सभा को संबोधित करेगे।


लोकायुक्त विधेयक के मुद्दे पर हजारे एक मई से महीने भर के राज्य के दौरे पर हैं। हजारे को जनवरी में एक हफ्ते के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था जिस कारण उन्हें उन पांच राज्यों का दौरा रद्द करना पड़ा था जहां चुनाव होने थे।

CAG का खुलासा : दिल्ली एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण में 2G जैसा घोटाला....

नई दिल्ली। कैग की रिपोर्ट में दिल्ली एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण के नाम पर करोड़ों रुपए की हेराफेरी का मामला सामने आया है। रिपोर्ट की मानें तो यह टेलीकॉम घोटाले जैसा ही बड़ा है। कैग रिपोर्ट के मुताबिक एयरपोर्ट घोटाला 1 लाख 63 हजार करोड़ रुपए का है जबकि टेलीकॉम घोटाला करीब 1 लाख 76 हजार करोड़ का था।


कैग की रिपोर्ट में एयरपोर्ट घोटाले के लिए दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी यानी डायल की खिंचाई की गई है। डायल एक निजी कंपनी है और उसने 1813 करोड़ रुपए निवेश कर दिल्ली एयरपोर्ट के संचालन का ठेका 60 सालों के लिए हासिल किया है।


कैग रिपोर्ट के मुताबिक एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और डायल के बीच हुए ऑपरेशन, मैनेजमेंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के मुताबिक एयरपोर्ट की पांच फीसदी जमीन पर डायल विकास का काम कर सकती है। ये हिस्सा करीब 240 एकड़ बनता है।


रिपोर्ट के मुताबिक इस जमीन से डायल को 58 सालों में करीब 1 लाख 63 हजार करोड़ रुपए की कमाई होने का अनुमान है। इस जमीन को डायल को महज 100 रुपए सालाना के लीज रेंट पर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक विकास शुल्क के नाम पर डायल को होने वाली कमाई कॉन्ट्रेक्ट की शर्तों से अलग है। इतना ही नहीं यात्रियों से टैक्स के नाम पर 3,415 करोड़ रुपए वसूले जा रहे हैं जो डायल की अतिरिक्त कमाई है।
कैग की रिपोर्ट डायल को कॉन्ट्रैक्ट देने जैसे बिंदुओ पर लिए गए फैसलों की ओर इशारा कर रही है। रिपोर्ट बता रही है कि गलत फैसलों की वजह से ही यह ऐसा हुआ। उधर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कैग को बताया है कि एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण का फैसला कैबिनेट का था।

कर्ज के भंवर में डूबा देश

31 दिसंबर 2011 तक भारत सरकार पर 33 लाख 82 हजार करोड़ रुपए का ऋण था। यह तो गनिमत है कि इस भारी भरकम कर्ज में विदेशी हिस्सा महज 3 लाख 40 हजार करोड़ का ही है। यदि पिछले दो सालों का ब्योरा देखें तो हर साल एक लाख करोड़ का ऋण भार भारत पर चढ़ा है। अगली केंद्र सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो उसके मत्थे 10 लाख करोड़ के ऋण की अदायगी अभी से तय है। कर्ज का बढ़ता बोझ यह साबित करता है कि सरकार की आमदनी तो घटी ही है साथ ही आमदनी की पूर्ति के लिए उसने आवश्यक कदम नहीं उठाए। यह हालात तब हैं जब देश में अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री, वरिष्ठ और अनुभवी वित्तमंत्री के रूप में प्रणब मुखर्जी और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ मोंटेक सिंह अहलुवालिया योजना आयोग के उपाध्यक्ष हैं। देश के आर्थिक सेहत का दारोमदार मुख्यत: इन्ही तीन स्तंभों पर टिका होता है। क्या यह माना जाए कि पिछले दो सालों में विश्व व्यापी मंदी, देश में बेतहाशा बढ़ी महंगाई और आर्थिक अनुशासनहीनता ने देश को कर्ज के भंवर में फंसा दिया है? बावजूद इसके यह कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी कि भारत भी मंदी के चपेट में रहा। अन्यथा क्या कारण है कि विगत दो वर्षों में देश पर दो लाख करोड़ का ऋण भार बढ़ गया। ऐसा लगता है देश के आर्थिक रणनीतिकारों से स्थितियों को भांपने में गड़बड़ी हुई है। लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया में जब सत्ता पर काबिज रहना राजनीतिक दलों का ध्येय बन जाता है तब सियासी लाभ-हानि के मद्देनजर लुभावने वायदों की पूर्ति की जाती है। जनहित सरकार का धर्म है, चुनावी वायदों को निभाना फर्ज है। संप्रग सरकार की पहली पारी में किसानों का करोड़ों रुपए का ऋण माफ किया गया, अभी दो माह पूर्व बुनकरों के लिए विशेष पैकेज पर अमल शुरू हुआ, अन्य सबसिडी पर भी खजाने से भारी भरकम राशि जा रही है। यह सब हो रहा है कर्ज के पैसों से। अनेक योजनाओं पर काम चल रहा है। खजाना खाली है पर काम होते रहना है। मूलधन तो अपनी जगह है ब्याज अदा करने में भी सरकार को पसीने छूट रहे हैं। सरकार के लिए राहत की बात यही है कि आगामी वर्षों में जो बड़े ऋणों का चुकारा होना है वह भारतीय बैंकों को ही करना है जो प्रतिभूतियों की शक्ल में हैं। व्यक्तिगत ऋण और सरकारी ऋण की अदायगी में बड़ा फर्क यह है कि व्यक्ति से वसूली आसान है जबकि सरकार से वसूली कठिन है। सरकारी प्रबंधकों को इस बात की फिक्र नहीं होती कि उसे समय पर कर्ज चुकाना है। कर्ज अदा करने का सरकार के पास राजस्व वसूली सबसे बड़ा साधन है। जाहिर है वसूली अपेक्षित नहीं है। वसूली का एक हिस्सा कर्ज और ब्याज चुकाने में किया जाना चाहिए, संभवत: सरकारी प्रबंधक उसमें भी चूक गए हैं। आमदनी बढ़ाए बिना कर्ज अदायगी सरल नहीं होती। यह तभी होता जब सरकार वसूली में सख्त और पाबंद हो। चाहे प्रश्न आम लोगों का हो या किसानों-बुनकरों का हो अथवा बड़े औद्योगिक घरानों से टैक्स वसूली का हो सरकार को सचेत रहना होगा। संप्रग सरकार अगले आम चुनाव से पूर्व खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने की जिद ठान बैठी है। देश की 75 प्रतिशत आबादी को रियायती अनाज देने उत्पादन पर्याप्त नहीं है, जाहिर है विदेशों से खाद्यान्न आयात करना होगा, उसके लिए सरकार कहां से रकम जुटाएगी? हालिया दिनों में डालर के मुकाबले रुपया बेहद कमजोर स्तर पर आ गया, इससे आयात पर बोझ बढ़ा। यह सुनिश्चित करने का प्रयास होना चाहिए कि आयात-निर्यात में समुचित संतुलन रहे। अभी आयकर विभाग 22 सौ ऐसे सौदों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है जिन पर दो हजार करोड़ के अवैध लेन-देन का शक है। सरकार को न सिर्फ मितव्ययता की ओर कदम उठाना होगा वरन् 'ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत, यावत् जीवेत् सुखम जीवेत्Ó की भावना का त्याग भी करना है। काश देश को भी घर समझ कर चलाया जाता।

अन्ना ने नितिन राउत को याद दिलाई बीवी की मार

मुंबई।। जलसंरक्षण मंत्री नितिन राउत एवं अन्ना हजारे के बीच हफ्ते भर से चल रहे वाकयुद्ध में एक और चैप्टर जुड़ गया है। यह स्तरहीन बयानबाजी की मिसाल हो सकता है।


अन्ना को 'हिटलर' कहने वाले मंत्री राउत की औकात पर सवाल उठाते हुए अन्ना ने कहा 'जो बीवी से पिट चुका हो, वह और क्या कहेगा? उससे क्या उम्मीद कर सकते हैं?'


उल्लेखनीय है कि साल भर पहले यह बात फैली थी कि आमदार निवास में किसी गैर महिला के साथ पाए गए राउत की उनकी बीबी ने पिटाई की। इस खबर को दबाया गया था, इसलिए उसकी पुष्टि नहीं हुई थी, पर मंत्रालय में महीने भर तक इसी घटना की चर्चा थी।


गत गुरुवार को नागपुर में राउत समर्थकों ने एक सभा में अन्ना पर हमला किया। राउत ने इस हमले का जोरदार समर्थन किया था। तब से दोनों में आरोप प्रत्यारोप का दौर चला है। मंत्री ने अन्ना पर कांग्रेस को बदनाम करने और उनका आंदोलन खोखला होने का आरोप लगाया है।


इस पर बौखलाए अन्ना ने जलगांव में पत्रकारों से बातचीत में मंत्री पर पलटवार किया। बीबी द्वारा उनकी कथित पिटाई का जिक्र कर पुराने किस्से को दोहराया। दिलचस्प यह है कि मंत्री ने इस बारे में कोई सफाई नहीं दी थी और मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने चुप्पी साध ली थी।


इस बीच राऊत ने पत्रकारों को बताया कि अन्ना द्वारा उन पर लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों को वे कानूनी चुनौती देंगे। इस बारे में वे वकीलों से मशविरा कर रहे हैं।
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