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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

टीम अन्ना को तोड़ने की साजिश: अन्ना

समाजसेवी अन्ना हजारे ने आरोप लगाया है कि टीम अन्ना को तोड़ने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किय़े जा रहे हैं.


अन्ना का बयान तब आया है जब राज्यसभा से लोकपाल बिल को सेलेक्ट कमेटी भेज दिया गया है.


खबर थी कि अन्ना ने केजरीवाल से ट्रस्ट की पाई-पाई का हिसाब रखने को कहा था. जब इस पर अन्ना से सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसके पीछे सरकार की साजिश बता दी.


अन्ना का बयान तब आया है जब लोकपाल बिल को राज्यसभा से सेलेक्ट कमेटी में भेज दिया गया है.


यानी अगले तीन महीने तक लोकपाल बिल पर कोई फैसला नहीं होने जा रहा है. इसी के कारण टीम अन्ना ने जुलाई में अनशन करने का फैसला किया है.


अन्ना इससे पहले भी सरकार पर टीम को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगा चुके हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स में अन्ना के दिए इंटरव्यू से ये बात सामने आई थी कि टीम अन्ना में मतभेद हैं तब भी अन्ना ने आरोप लगाया था कि टीम अन्ना में फूट डालने के लिए सरकार ऐसी खबरें छपवा रही हैं.


टीम अन्ना 25 जुलाई से दिल्ली के जंतर मंतर पर अनशन करेगी, इस बार अन्ना हजारे खराब सेहत को देखते हुए खुद अनशन नहीं करेंगे लेकिन वो मंच पर मौजूद रहेंगे.

अन्ना हजारे के नाम से केजरीवाल को फर्जी चिट्ठी

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की टीम के सदस्य अरविंद केजरीवाल को उनकी ओर से लिखी गई एक फर्जी चिट्ठी मिली है। चिट्ठी 3 मई को लिखी गई है लेकिन यह किसने लिखी इसका पता नहीं चल सका है।


चिट्ठी फर्जी है यह बात खुद अन्ना हजारे ने कही है। अन्ना ने कहा, 'मैंने अरविंद केजरीवाल को कोई पत्र नहीं लिखा है।' टीम अन्ना का कहना है कि यह चिट्ठी टीम अन्ना के खिलाफ प्रचार करने और कथित रूप से टीम में फूट डालने के उद्देश्य से लिखी गई है।


गौरतलब है कि पत्र कुछ इस तरह से लिखा गया है, जिससे यह लगता है कि अन्ना संगठन के कामकाज से नाराज़ हैं और उन्होंने अपने साथ हो रहे व्यवहार पर भी आपत्ति जताई है। चिट्ठी के मुताबिक अन्ना, केजरीवाल से इंडिया अंगेस्ट करप्शन आंदोलन के लिए इकट्ठे हुए पैसे का हिसाब मांग रहे हैं और यह भी कह रहे हैं कि इस पैसे का जिस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है वह गलत है।

भ्रष्ट किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे: सोनिया

नई दिल्ली: यूपीए सरकार के तीन साल पूरे होने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज कांग्रेस कोर कमेटी की आपात बैठक बुलाई। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पदाधिकारियों और मंत्रियों को साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


सोनिया गांधी ने कांग्रेस सांसदों को संबोधित करते हुए कहा यह पार्टी की जिम्मेदारी है कि जो भ्रष्टाचार को पार्टी या सरकार में बढावा दे तो उसे सजा दी जाए। सोनिया ने कहा कि पार्टी को आगामी 2014 के आम चुनावों के लिए एकजुट हो जाना चाहिए।


गौरतलब है कि कांग्रेस के तीन साल के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, जिससे लोगों के दिल में कांग्रेस की साख पहले के मुकाबले काफी कम हुई है। पार्टी की घटती साख पर सोनिया गांधी काफी चितिंत हैं और वह पार्टी को इससे उबारना चाहती हैं।

बेईमान और बिकाऊ हैं मनमोहन सिंह: रामदेव

कालेधन पर केंद्र सरकार के श्वेत पत्र से नाराज योगगुरू बाबा रामदेव ने प्रधानमंत्री मनमोहन स‌िंह पर सीधा न‌िशाना साधा है। मनमोहन सिंह की ईमानदारी पर सवाल खड़ा करते हुए रामदेव ने कहा है कि जिस देश के प्रधानमंत्री की नाक के नीचे 200 लाख करोड़ रुपये का घोटाला हो जाए वो प्रधानमंत्री ईमानदार है कि बेईमान, आप खुद समझ सकते है।


भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ अलख जगाने यात्रा पर निकले योग गुरु बाबा रामदेव ने राजस्थान के झूनझूनू में आयोजित एक सभा में प्रधानमंत्री मनमोहन स‌िंह को बेईमान और सरकार को लाचार करार दिया है।


मनमोहन सिंह पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसके हाथों में बिकता है? प्रधानमंत्री अमेरिका के हाथों में बिकता है। प्रधानमंत्री विदेशी कंपनियों के हाथों में बिकता है। प्रधानमंत्री पूंजीपतियों के हाथों में बिकता है, जो उनको दस-दस, पचास-पचास, सौ-सौ, पांच-पांच हजार करोड़ नहीं बल्कि दस हजार करोड़ रुपये देते हैं।


बाबा रामदेव ने कहा कि विदेशों में जमा कालाधन वापस लाने की मांग पर केवल श्वेत पत्र जारी कर केंद्र सरकार ने अपनी नीयत में खोट और कमजोर इच्छा शक्ति को साबित कर दिया है।

फिर लटका लोकपाल बिल, अन्ना नाराज

लोकपाल बिल एक बार फिर लटक गया है। अब इसे राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया है। इसके पहले लोकपाल बिल कार्मिक राज्य मंत्री वी नारायणस्वामी ने राज्य सभा में पेश किया। लेकिन विपक्षी दलों का कहना था कि इसे हड़बड़ी में पास नहीं कराया जाना चाहिए।

अब 15 सदस्यों वाली सेलेक्ट कमेटी इस बिल पर मॉनसून सत्र के शुरू में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। सरकार का कहना था कि इस बिल को लेकर मतभेद घट गए हैं। हालांकि समाजसेवी अन्ना हजारे का कहना था कि सांसद खुद इसे लटका रहे हैं।

संसद में फंसी सरकार; सेलेक्ट कमेटी को भेजा लोकपाल बिल

नई दिल्‍ली : राज्‍यसभा में लोकपाल विधेयक एक बार फिर लटक गया है। सोमवार को राज्‍यसभा में लोकपाल बिल पर हुई चर्चा के दौरान सरकार ने इस बिल को सेलेक्‍ट कमेटी में भेजने का प्रस्‍ताव दिया है। यह प्रस्‍ताव नारायणसामी की ओर से दिया गया। उन्‍होंने कहा कि मानसून सत्र में सेलेक्‍ट कमेटी इस बिल पर रिपोर्ट दे।

भाजपा ने जहां सरकार पर इस बिल को लटकाने में जान-बूझकर देरी करने का आरोप लगाया। समाजवादी पार्टी ने इस बिल को सेलेक्‍ट कमेटी में भेजने की मांग की है। वहीं बहुजन समाज पार्टी ने सरकार के प्रस्‍ताव का समर्थन किया है। मायावती ने कहा कि बिल के हर मुद्दे पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। लोकपाल बिल जल्‍दबाजी में पास नहीं होना चाहिए।

भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा कि सवाल यह है कि लोकपाल बिल लाना है या नहीं। पिछले 42 साल से लोकपाल लटका है। लोकपाल लाने में इतने लंबे समय की देरी से सवाल खड़े हुए हैं। उन्‍होंने कहा कि संसद की विश्‍वसनीयता दांव पर है। सरकार जानबूझकर लोकपाल बिल को लाने में देरी कर रही है।

भाजपा ने इस बिल को सिलेक्‍ट कमेटी को भेजने का विरोध किया है। यदि सरकार इसे सिलेक्‍ट कमेटी को भेजना चाहती है तो खुद प्रस्‍ताव लाए। लोकपाल बिल के चार मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद है। वहीं, लेफ्ट ने भी लोकपाल बिल पर बहस की मांग की है। माकपा नेता ने कहा कि संसद में हर संशोधन पर बहस होना चाहिए।

25 जुलाई से टीम अन्ना जंतर मंतर पर करेगी अनशन

राज्य सभा में आज लोकपाल बिल पेश किए जाने के कुछ ही पलों बाद पर जमकर हंगामा शुरू हो गया। सरकार की ओर से बिल को सिलेक्ट कमिटी को भेजे जाने का प्रस्ताव रखा गया जिस पर बीजेपी, लेफ्ट, बीएसपी समेत अन्य पार्टियों ने कड़ी आपत्ति जताई। वहीं, टीम अन्ना ने ऐलान कर दिया कि वह 25 जुलाई से अनशन करेगी। हालांकि अन्ना अनशन नहीं करेंगे।

लोकपाल बिल का भविष्य एक बार फिर से बहस के बीच फंसता नजर आ रहा है लेकिन टीम अन्ना इस पर ढील देने के मूड में नहीं दिख रही है। आज सदन में सरकार की ओर से जैसे ही बिल टेबल करते हुए इसे सिलेक्ट समिति को भेजे जाने का प्रस्ताव रखा गया, अन्य पार्टियों ने पुरजोर तरीके से इसका विरोध किया।

बीजेपी नेता अरुण जेटली ने लोकपाल को सिलेक्ट समिति को भेजे जाने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। बीजेपी ने तर्क दिया कि बिल सिलेक्ट समिति को भेजा जाना है या नहीं, यह फैसला सांसद नहीं ले सकते और यह फैसला केवल मिनिस्टर द्वारा ही लिया जा सकता है।

इस मामले पर बीएसपी नेता मायावती ने भी बीजेपी के सुर में सुर मिलाते हुए सिलेक्ट समिति के हवाले लोकपाल बिल भेजे जाने की मांग को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बार-बार खुद ही इस विधेयक को टाल रही है हालांकि हम भी नहीं चाहते हैं कि विधेयक हड़बड़ी में पास हो।

जहां एक ओर बीजेपी ने कहा कि सरकार बिल पास करने में जान बूझ कर देरी कर रही है, वहीं दूसरी ओर पार्टी की ओर से कहा गया कि देश की लोकपाल की जरूरत नहीं है। एसपी के राज्य सभा में सांसद नरेश अग्रवाल ने बिल को कमिटी के पास भेजे जाने का प्रस्ताव रखा था।
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