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अन्ना हां करें, मुस्लिम बहुल सीट से पहुंचा देंगे संसद

अन्ना हजारे यूं तो राजनीति में जाने के पक्ष में नहीं दिख रहे फिर भी राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने अन्ना को अपनी पार्टी की तरह से लोकसभा चुनाव लड़ने का न्यौता दिया है। ये वही उलेमा काउंसिल है जो दिल्ली में 2008 में बटला हाउस एनकाउंटर के बाद आस्तित्व में आई थी। उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने कहा कि अन्ना को जनता का आंदोलन बाहर बैठकर लड़ने की बजाय संसद में जाकर लड़ना होगा। इसके लिए अन्ना चाहें तो उलेमा का‌उंसिल के टिकट से लोकसभा चुनाव लड़े।




अन्ना खुद उतरे चुनाव मैदान में
रशादी ने कहा कि अन्ना को लोकतंत्र के बदलाव समझने होंगे। उन्हें यह समझना होगा अगर परिवर्तन लाना है तो बाहर बैठने से कुछ नहीं होगा। खुद व्यवस्था में शामिल होकर बदलाव लाने होंगे।


आजमगढ़ और बहराइच से जिताने का वादा
रशादी ने दावा किया कि अगर अन्ना हां कर दें तो काउंसिल उन्हें आजमगढ़ और बहराइच कहीं से भी यकीनन जिता कर लोकसभा भेज सकती है। ये दोनों ही मुस्लिम बहल सीटें है और उलेमा काउंसिल का यहां पर काफी प्रभाव माना जाता है। उन्होंने ये भी कहा कि अन्ना चाहें तो किसी और भी मुस्लिम बहुल सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।


अन्ना बेदाग पर टीम दागदार
रशादी ने कहा कि अन्ना हजारे तो बेदाग हैं लेकिन उनकी टीम के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता। अन्ना खुद को अच्छे इंसान हैं लेकिन उनकी टीम के सभी लोग सही नहीं है। रशादी ने बिना नाम लिए कहा कि उनकी टीम के कई लोग दागदार हैं।


सवाल - क्या आपको लगता है कि अन्ना हजारे को भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए लोकसभा चुनाव लड़ना चाहिए?
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