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दागी व्यक्ति राष्ट्रपति नहीं हो सकता: केजरीवाल

नई दिल्ली।। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति बनाने के लिए जितनी प्रबल कोशिशें हो रही हैं, उतनी ही तेज कोशिशें उन्हें इस पद तक न पहुंचने देने की भी हो रही हैं। प्रणव पर हालिया हमला टीम अन्ना ने किया है और कहा है कि राष्ट्रपति के चुनाव के लिए होने वाली वोटिंग से पहले प्रणव पर लगे रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच हो जानी चाहिए।

टीम अन्ना के सबसे बेबाक सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि दागी व्यक्ति राष्ट्रपति नहीं हो सकता। उन्होंने कहा है कि मुखर्जी के खिलाफ स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और यह देश के सर्वोच्च पद (राष्ट्रपति पद) के लिए होने वाले इलेक्शन से पहले हो जाना चाहिए।

केजरीवाल ने कहा है कि वोटिंग से पहले प्रणव के खिलाफ लगे आरोपों की जांच पूरी हो जानी चाहिए, क्योंकि एक बार प्रेजिडेंट बनने के बाद उन पर 'हाथ डालना' आसान नहीं होगा। राष्ट्रपति बन जाने के बाद वह देश के प्रथम नागरिक हो जाएंगे और उन्हें 'इम्युनिटी' हासिल हो जाएगी, जिसके चलते उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच मुश्किल होगी।

जोधपुर में रविवार को हुए जन जागरण अभिज्ञान के दौरान केजरीवाल ने कहा, 'सीबीआई नहीं, कोई और स्वतंत्र एजेंसी प्रणव पर लगे आरोपों की जांच करे। प्रेजिडेंट पद सबसे गौरवशाली पद है और इस पर बैठने वाले की इमेज साफ-सुथरी होनी चाहिए। उनके खिलाफ जो भी आरोप हैं, उनकी जांच होनी चाहिए।'

चावल घोटाला
2007 के चावल घोटाले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,'यह 2000 से 2500 करोड़ का स्कैम था। 20 लाख टन चावल किसी तीसरे ही देश को सप्लाई कर दिए गए, जबकि कहा यह गया कि यह अफ्रीकन देशों को भेजे जा रहे हैं ताकि वहां भूखों को अन्न मिल सके। घाना ने प्रणव मुखर्जी और कमलनाथ के खिलाफ जांच की सिफारिश की थी लेकिन कुछ हुआ नहीं।'

स्कॉर्पीन डील स्कैम
टीम अन्ना का आरोप है कि 2005 में डिफेंस मिनिस्टर रहते हुए उन्होंने स्कॉर्पीन डील की जांच के आदेश नहीं दिए। 18,798 करोड़ की भारत और फ्रांस के बीच हुई स्कॉर्पीन सबमरीन डील के लिए 4 प्रतिशन कमिशन पे किए जाने के आरोप हैं।

नेवी वॉर रूम लीक स्कैम
टीम अन्ना का आरोप है कि 2005 में ही हुए नेवी वॉर रूम लीक घोटाले में तीन प्रमुख आरोपियों को बचाया गया और उनकी जगह पर तीन नेवी कमांडर्स की बलि चढ़ा दी गई। इस मामले में नौसेना के दस्तावेज लीक होने के मामले की जांच के आदेश तो दे दिए गए लेकिन इस बात की जांच नहीं करवाई गई कि उन दस्तावेजों में आखिर क्या था।
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