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नाम सार्वजनिक हो तस्वीर नहीं : शिकार बेटी का पिता


दिल्ली सामूहिक बलात्कार की शिकार लड़की के पिता ने कहा है कि अगर देश में बलात्कार रोकने के लिए कड़ा कानून उनकी बेटी के नाम पर बनता है तो उन्हें नाम सार्वजनिक किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है.

मगर साथ ही बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने ये भी कहा है कि उस लड़की की तस्वीर सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए. वैसे उन्होंने ये भी कहा कि इस बारे में वह अपने बेटे से बात करेंगे.

उस लड़की के पिता का ये बयान तब आया है जब उसकी पहचान को सार्वजनिक किए जाने की आवाज उठने लगी है.

पिता ने कहा है, "देश में बलात्कार के ख़िलाफ़ जो सख्त कानून बनाने की बात हो रही है, उसका नाम उनकी बेटी के नाम पर रखा जाए. ऐसा करना उनकी बेटी के प्रति सम्मान की बात होगी. वह एक शहीद है और उसके नाम पर क़ानून बनाने से परिवार को कोई दिक्क़त नहीं होगी."

इससे पहले केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री शशि थरूर ने उस लड़की का नाम सार्वजनिक किए जाने की माँग की थी, मगर एक वर्ग ने उनकी इस माँग पर ये कहते हुए आपत्ति भी जताई थी कि इससे उस लड़की और उसके परिवार की निजता का उल्लंघन होगा.

थरूर ने की थी मांग

"देश में बलात्कार के ख़िलाफ़ जो सख्त कानून बनाने की बात हो रही है, उसका नाम उनकी बेटी के नाम पर रखा जाए. ऐसा करना उनकी बेटी के प्रति सम्मान की बात होगी."
सामूहिक बलात्कार की पीड़िता के पिता

थरूर ने पहले ट्वीट में कहा था, "सोचता हूँ कि आख़िर दिल्ली बलात्कार पीड़ित की पहचान छिपाए रखकर क्या हासिल होगा? क्यों न उनका नाम बताकर उनका एक वास्तविक व्यक्ति की तरह सम्मान किया जाए, जिसकी अपनी पहचान है."

उन्होंने अगले ट्वीट में परिवार का ज़िक्र किया. उन्होंने लिखा, "अगर उनके माता-पिता को आपत्ति नहीं करते हैं तो उस लड़की का सम्मान किया जाना चाहिए. इसके अलावा बलात्कार के क़ानून में जो बदलाव होने हैं उसके बाद नए क़ानून का नाम उसी के नाम पर रखा जाना चाहिए."


सामूहिक बलात्कार की पीड़िता के नाम पर कानून बनाने का सुझाव.
थरूर का कहना है कि लड़की एक इंसान थीं कोई सांकेतिक चिह्न भर नहीं.

किरण बेदी-अनुपम खेर का समर्थन

पूर्व आईपीएस और अब सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे के साथ जुड़ी किरण बेदी ने भी शशि थरूर की इस माँग का समर्थन किया था. किरण बेदी ने समर्थन में ट्वीट किया, "मैं बलात्कार पर नए क़ानून का नाम उस लड़की के नाम पर रखने की शशि थरूर की माँग का समर्थन करती हूँ. अमरीका में ब्रैडी, मेगन, कार्ली या जेसिका क़ानून आदि ऐसे कई उदाहरण हैं."

इससे पहले फ़िल्म अभिनेता अनुपम खेर भी उस लड़की का नाम ज़ाहिर करने की माँग कर चुके हैं. खेर ने भी यह बात रखने के लिए ट्विटर का ही सहारा लिया था.

"अगर उनके माता-पिता को आपत्ति नहीं करते हैं तो उस लड़की का सम्मान किया जाना चाहिए. इसके अलावा बलात्कार के क़ानून में जो बदलाव होने हैं उसके बाद नए क़ानून का नाम उसी के नाम पर रखा जाना चाहिए."
ट्विटर पर शशि थरूर

उन्होंने कहा था, "मैं उसकी पहचान के बारे में जानना चाहता हूँ. वह कोई काल्पनिक पात्र नहीं है. देश को उसकी असलियत के बारे में जानने का पूरा हक़ है. अगर कई वर्षों बाद इस देश में महिलाएँ सुरक्षित होती हैं तो मैं चाहता हूँ कि दुनिया को पता चले कि इसकी शुरुआत किसने की."

वैसे कानून के तहत बलात्कार पीड़िता का नाम सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. ये भारतीय पीनल कोड की धारा 228 ए के तहत अपराध माना जाता है.

उधर इस मामले में भारतीय जनता पार्टी ने पीड़िता को अशोक चक्र देने की मांग की है.

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