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उजागर हो रही है दिल्ली पुलिस की साजिश



दिल्ली गैंगरेप की घटना में दिल्ली पुलिस का झूठ एक बार फिर सामने आ गया है. एक बार फिर साबित हो गया है कि दिल्ली पुलिस राजनीतिक साजिश के तहत आम आदमी पार्टी को बदनाम करने में लगी है. 

जिन आठ लोगों को दिल्ली पुलिस ने कांस्टेबल सुभाष तोमर की मृत्यु के लिए जिम्मेदार ठहराकर फंसाने की कोशिश कर रही थी उसमें से दो व्यक्ति दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहे थे. यह बात दिल्ली मेट्रो से मिले विडीयो फुटेज से साबित हो गई. यह विडीयो फुटेज दिल्ली पुलिस के उस षडयंत्र की कलई खोलता है जो जनता की आवाज को दबाने के लिए रचा गया.

पुलिस ने जिन आठ लोगों को सुभाष तोमर की मृत्यु का जिम्मेदार ठहराया था उन आठों व्यक्तियों को पुलिस ने अलग-अलग समय पर और अलग-अलग स्थान से हिरासत में लिया था. यह बात पुलिस ने कोर्ट में भी मानी थी. अदालत ने दिल्ली पुलिस के दावे पर सवाल खड़े करते हुए पूछा भी था कि अलग-अलग जगहों और समय से हिरासत में लिए गए आठ लोगों में से सुभाष तोमर पर हमला करने वाले व्यक्ति को क्या पुलिस पहचानती है? 

पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था. होता भी कैसे? सुभाष तोमर की मृत्यु किसी चोट के कारण नहीं, बल्कि तबीयत खराब होने के कारण हुई थी. 

दिल्ली पुलिस ने गैंगरेप की घटना से आक्रोशित जनता की आवाज कुचलने के लिए एक खतरनाक साजिश रची थी जिसका भंडाफोड़ हो रहा है. दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने आठ निर्दोष लोगों को एक कांस्टेबल की मृत्यु के लिए दोषी साबित करने की घिनौनी चाल चली थी. उन्होंने इसकी परवाह भी नहीं कि उनके एक झूठ से इन आठों निर्दोषों का जीवन तबाह हो जाएगा. आम आदमी पार्टी ऐसे गैर-जिम्मेदार पुलिस कमिश्नर को तत्काल हटाए जाने और आठों निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लेने की मांग करती है.

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