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2G: एयरटेल, वोडाफोन के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल


नई दिल्ली : केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के समय 2जी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितताओं की जांच के बाद शुक्रवार को एक आरोप-पत्र दाखिल किया। यह मामला भारती एयरटेल, वोडाफोन सहित तीन दूसंचार कंपनियों से जुड़ा है और जांच एजेंसी ने इसमें इसमें 846 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

सीबीआई ने विशेष सीबीआई जज ओपी सैनी की अदालत में दाखिल आरोप-पत्र में अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितताओं के मामले में भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया लि. और हचिसन मैक्स एंड स्टर्लिंग सेल्युलर, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं पूर्व दूरसंचार सचिव श्यामल घोष को आरोपी बनाया है।

सीबीआई ने अदालत को बताया कि दूरसंचार विभाग के पूर्व उपमहानिदेशक (वैस प्रकोष्ठ) तथा बीएसएनएल के पूर्व निदेशक जे आर गुप्ता को गवाह बनाया गया है जबकि उनका नाम एफआईआर में आरोपी के रूप में डाला गया था। सीबीआई ने अभियोग चलाने के लिए 73 गवाहों की सूची डाली है।

जांच एजेंसी ने कहा कि पूर्व दूरसंचार मंत्री स्वर्गीय प्रमोद महाजन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और एयरटेल तथा वोडाफोन के प्रवर्तकों के विरुद्ध कोई मामला नहीं पाया गया। अदालत ने आरोप-पत्र पर विचार के लिए 14 जनवरी की तारीख तय की है।

सीबीआई ने आरोप-पत्र में कहा है कि महाजन के कार्यकाल में डीओटी (दूरसंचार विभाग) ने दूरसंचार कंपनियों के लिए लाइसेंस के साथ दिया जाने वाला न्यूनतम स्पेक्ट्रम 4.4 मेगाहट्र्ज से बढ़ाकर 6.2 मेगाहट्र्ज कर दिया।

इसके साथ ही उस दौरान कंपनियों को ग्राहक संख्या के आधार पर अतिरिक्त स्पेक्ट्रम का भी आवंटन किया गया।
इसमें आरोप लगाया गया है कि महाजन ने इन कंपनियों को स्पेक्ट्रम का आवंटन जल्दबाजी में और तत्कालीन दूरसंचार नीति के खिलाफ जा कर किया। आरोपियों पर भारतीय दंड विधान की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) तथा भ्रष्टाचार रोधक कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दायर किया गया है।

आरोप पत्र में कहा गया है,‘जांच से यह तथ्य सामने आया है कि डॉट के तत्कालीन सचिव और दूरसंचार आयोग के पूर्व चेयरमैन श्यामल घोष ने स्वर्गीय प्रमोद महाजन, आरोपी लाभ पाने वाली कंपनियों हचिसन मैक्स एंड स्टर्लिंग सेल्युलर तथा भारती एयरटेल के प्रतिनिधियों के साथ आपराधिक साजिश रची और सरकारी अधिकारी के रूप में अपने पद का दुरुपयोग किया तथा अनुचित लाभ पहुंचाया जिससे सरकार को 846.44 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा।’ 

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