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दिल्‍ली में उग्र हुए प्रदर्शनकारी, पुलिस पर किया पथराव


दिल्ली। दामिनी का भले ही अंतिम संस्‍कार गुपचुप तरीके से कर दिया गया हो, लेकिन उसे इंसाफ दिलाने के लिए आम आदमी से लेकर बॉलीवुड हस्‍ती तक सड़क पर उतर आई है। दिल्‍ली में हजारों लोग शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन प्रदर्शनकारियों के एक तबके ने पुलिस पर पत्‍थरबाजी कर शांतिपूर्वक चल रहे प्रदर्शन को हिंसक करने पर तुल गए हैं। एबीवीपी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की मांग है कि गैंग रेप के दोषियों को तत्‍काल फांसी की सजा दी जाए। प्रदर्शनकारी पुलिस के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए पत्‍थरबाजी करने लगे। जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प हो गई। एक पत्‍थर वहां मौजूद हमारे संवाददाता को भी लगा। (111 तस्‍वीरों में देखें प्रदर्शन)

पुलिस ने आक्रोशित प्रदर्शनकारियों में से कुछ को पीटते हुए अपनी गाड़ी में भरकर वहां से दूर ले गई है। कुछ महिलाओं ने गाड़ी के सामने लेट कर पुलिस को रोकने का प्रयास किया तो उन्‍हें वहां से जबरन उठा दिया गया। दिल्‍ली पुलिस ऐसे प्रदर्शनकारियों को छांट छांट कर प्रदर्शन स्‍थल से दूर ले जा रहे हैं, जो अशांति पहुंचाने की कोशिश कर हैं। इसके अलावा, कुछ महिलाओं के साथ पुलिस के जवानों ने बदतमीजी भी की।वहीं, कुछ प्रदर्शनकारी वहां मौजूद अन्‍य प्रदर्शनकारियों से भीड़ गए। वहां मौजूद अधिकांश प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक प्रदर्शन के पक्ष में हैं। लेकिन एबीवीपी के कार्यकर्ता काफी उग्र हो गए हैं। पुलिस भी लगातार शांति बनाए रखने की अपील कर रही हैं।

दिल्ली पुलिस की चेतावनियों के बावजूद लोग इकट्ठा हुए हैं। दिल्‍ली के जंतर-मंतर पर सैकड़ों की तादाद में युवा सुबह से ही शातिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं। कई बार दिल्‍ली पुलिस मुर्दाबाद के नारे भी लगाए जा रहे हैं। इन सबके बीच, प्रदर्शनकारियों की सिर्फ यही मांग है कि दामिनी को जल्‍दी से जल्दी इंसाफ दिया जाए। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, कोच्चि, चंडीगढ़, भोपाल, लुधियाना, जयपुर, हर जगह लोग दुष्कर्म पीड़िता की मौत के ग़म में संकल्प ले रहे हैं। (पीड़िता की आखिरी इच्छा)

वहीं, गैंगरेप पीड़िता का पार्थिव शरीर रविवार 03:30 बजे एयर इंडिया के विशेष विमान से दिल्ली पहुंचा। एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी भी मौजूद थे। दो हजार पुलिस बल के साथ दामिनी के शव को पालम स्थित उसके घर पर पहुंचा गया। जहां दो घंटे तक उसके शव को रखा गया। इसके बाद द्वारका के सेक्‍टर 22 स्थित श्‍मशान घाट पर उसका अंतिम संस्‍कार किया गया। इस गोपनीय ढंग से किए गए अंतिम संस्कार के समय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह मौजूद थे। 13 दिनों तक जिंदगी के लिए मौत से लड़ने वाली 23 वर्षीय छात्रा की सिंगापुर में शनिवार रात 02:15 बजे मौत हो गई थी। (तस्‍वीरों में देखिए, शनिवार को हुआ प्रदर्शन)। 
जिस गुपचुप ढंग से दामिनी का अंतिम संस्‍कार किया गया है, उससे प्रदर्शनकारी काफी नाराज हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार हर काम चोरी से करती है। दामिनी का अंतिम संस्‍कार भी इसी तरह किया गया। दूसरी ओर, केंद्र सरकार को इस बात का डर था कि यदि दामिनी का अंतिम संस्‍कार को सार्वजनिक रूप से किया जाता है तो भीड़ को काबू में करना मुश्किल हो जाता। ऐसे में शांति व्‍यवस्‍था बिगड़ सकती थी। 

गौरतलब है कि सिंगापुर में दामिनी के पोस्‍टमार्टम के बाद शव को लेकर विशेष विमान शनिवार को भारतीय समयानुसार रात लगभग 10:30 बजे भारत के लिए रवाना हुआ था। पीड़िता के अंतिम संस्कार को लेकर चल रही अटकलों के बीच कांग्रेस कोर ग्रुप की कल रात हुई बैठक में फैसला किया गया था कि अंतिम संस्कार परिवार की इच्छा के मुताबिक ही किया जायेगा, जबकि राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने और 29 दिसंबर को महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ राष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने की है। 

भारत का युवा इंडिया गेट से लेकर राष्ट्रपति भवन तक प्रदर्शन कर रहा है। कानून जब बनेगा, तब बनेगा। महिलाओं के खिलाफ अपराध तब रूकेंगे जब हम उनकी दिल से इज्जत करेंगे। इस बार इसी संकल्प को करने का मौका है, हमारे महाअभियान से जुड़कर। हमारे इस महाअभियान से जुड़िए और संकल्प लीजिए कि मैं महिलाओँ का सम्मान करूंगा।


अमेरिका में चर्चा का विषय 
अमेरिका में प्रवासी भारतीय चिकित्सकों के सवाल हैं कि क्या भारत में महिलाओं के मान सम्मान का कोई अर्थ नहीं रह गया है? पड़ोसी देश पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी घटना के 24 घंटे के अंदर मलाला यूसुफजई को विशेष विमान से लंदन के क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में उपचार के लिए भेजकर दुनिया भर के लोगों को मलाला की जान की सलामती का संदेश दे सकते हैं तो फिर भारतीय हुक्मरान क्यों चूक गए? उसे सफदरजंग अस्पताल में दस दिन क्यों रखा गया। इस मरीज की हालत लाइलाज हो गई थी, तो फिर हमारे राजनीतिक आकाओं ने सिंगापुर को ही क्यों चुना? 

शार्ट बाउल सिंड्रोम का हब है अमेरिका  
यहां के चिकित्सकों का कहना है कि अमेरिका में नेब्रास्का, पिट्सबर्ग, न्यूयार्क, वाशिंगटन डीसी और अटलांटा में छोटी आंत का प्रत्यारोपण अर्थात शार्ट बाउल सिंड्रोम के उपचार के स्टेट ऑफ आर्ट अस्पताल हैं, जहां गंभीर से गंभीर मरीजों पर शोध होते रहते हैं।

नेब्रास्का स्थित शार्ट बाउल सिंड्रोम अस्पताल की विश्व में दो दशक से एक स्टेट ऑफ आर्ट अस्पताल के रूप में गणना होती है, जहां छोटी आंत प्रत्यारोपण के प्रतिवर्ष एक से डेढ़ सौ सफल ऑपरेशन होते हैं। न्यूयार्क स्थित छोटी आंत प्रत्यारोपण टीम विशेषज्ञ डा. विभा सूद अमेरिका के विभिन्न बड़े अस्पतालों में काम कर चुकी हैं। डा. सूद ने इस लड़की की मृत्यु पर गहरा अफसोस जाहिर करते हुए बताया कि इंफेक्शन के साथ शार्ट बाउल सिंड्रोम का मामला गंभीर तो है, पर ऐसा नहीं है कि अमेरिका में इसे पेंचीदा कहा जाए। 

डा.  सूद बताती हैं कि एक एडल्ट में करीब तीन मीटर से आठ मीटर तक की छोटी आंत होती है। छोटी आंत के रक्त प्रवाह के रुक जाने से छोटी आंत का गैंग्रीन हो जाता है। इस पर प्रत्यारोपण सर्जन की कोशिश रहती है कि वह रोगग्रस्त आंत से छोटा सा टुकड़ा बचा ले ताकि वह मरीज को बचाने में कामयाब हो सके। बची-खुची छोटी आंत के रिहैबिलिटेशन के लिए इंटेस्टनेल रिहैब्लिटेशन सेंटर में उपचार किया जाता है, जो सभी संसाधनों से परिपूर्ण होते हैं। डा. सूद ने दावा किया कि उनके अपने अस्पताल में जब 23 सप्ताह के प्रिमेच्योर बेबी की गैंग्रस छोटी आंत को रेहैबिलिटेट कर बचाया जा सकता है, तो फिर उस लड़की को क्यों नहीं। डा. सूद कहती हैं कि यह उनकी समझ से परे की बात है कि सामूहिक दुष्कर्म से पीड़ित लड़की को सफदरजंग अस्पताल में दस दिन तक रखकर उपचार करने का क्या औचित्य था? बेहतर यह होता कि इस रोग से संबंधित चिकित्सकों की एक टीम बनाई जाती जो अमेरिका अथवा इंग्लैंड के बड़े अस्पतालों से संपर्क रखते हुए घटना के पहले 48 घंटों में मरीज को उपचार के लिए अमेरिका रवाना कर देती। 


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