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क्या वाकई "आप" के कार्यकर्ताओं ने ली सुभाष की जान ?


नई दिल्‍ली। दिल्ली पुलिस में सिपाही सुभाष तोमर की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। इंडिया गेट पर बीते रविवार को हुए विरोध प्रदर्शन के चश्मदीद 30 वर्षीय ठेकेदार सलीम अल्वी ने कहा कि उसने कुछ लोगों को तोमर पर हमला करते हुए देखा था। तोमर को एक पत्थर लगा था और वे गिर पड़े थे। बुलंदशहर के रहने वाले सलीम ने दिल्‍ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने अपना बयान दर्ज कराया। सलीम का बयान योगेंद्र और पाओलिन के बयान से अलग है। अल्वी के मुताबिक लाठीचार्ज के बाद जब पुलिस वाले लौट रहे थे। तब तोमर थोड़ा पीछे थे। तभी छह-सात लोगों के समूह ने उन पर हमला किया। उस समय वहां पर कुछ लोग थे। उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) की टोपी लगा रखी थी। दूसरी तरफ 'आप' ने कहा है कि सलीम फर्जी आदमी है। उसकी बातों का यकीन नहीं किया जा सकता। 

मीडिया और सोशल मीडिया में इनदिनों एक तस्‍वीर काफी तेजी से शेयर की जा रही है। जिसमें दिल्‍ली पुलिस के कुछ जवान और दो प्रदर्शनकारी सुभाष तोमर की मदद कर रहे हैं। इन दोनों प्रदर्शनकारियों के अनुसार, तोमर पर किसी ने हमला नहीं किया था। बल्कि वह दौड़ते दौड़ते गिर गए थे। उन्‍हें तुरंत अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन उनकी जान नहीं बच पाई। 

वहीं, सलीम अल्‍वी के  पास अपनी बात साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है। उसका दावा है कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस वॉटर कैनन का इस्‍तेमाल कर रही थी। जिसके कारण उसने अपने मोबाइल फोन  को बंद कर प्‍लास्टिक की थैली में सुरक्षित रख लिया था। 

बुलंदशहर में ठेकेदारी करने वाले अल्‍वी कहते हैं कि कानून और पुलिस के कारण वह इतने दिनों तक खामोश रहे। सितंबर में ही अल्‍वी की शादी हुई है। जिसके कारण वह किसी विवाद में नहीं फंसना चाहते थे। अल्‍वी कहते हैं, 'मैं अपने परिवार को किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहता था। इसलिए खामोश रहा। लेकिन एक बेगुनाह पुलिसवाले की मौत से मैं अंदर तक हिल गया और सीधे पुलिस के पास गया।' 

हालांकि, अल्‍वी के सभी दावों को आम आदमी पार्टी ने सिरे से नकार दिया है। पार्टी ने पूरे मामले की छानबीन के लिए जांच की मांग की है और साथ में अल्‍वी की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा किया है। सूत्रों का कहना है कि बाबा रामदेव और अन्‍ना हजारे से प्रश्‍न पूछने से रोकने पर एक बार अल्‍वी ने खुद को जलाने की भी कोशिश की है। 

सिपाही की मौत मामले में योगेंद्र के बयान दर्ज 
कांस्टेबल सुभाष तोमर की मौत का राज खंगालने में जुटी दिल्ली पुलिस को मामले के चश्मदीद पत्रकारिता के छात्र योगेंद्र्र ने अपना बयान क्राइम ब्रांच के दफ्तर में गुरुवार शाम को दर्ज कराया। दूसरी गवाह पाओलिन बयान दर्ज कराने नहीं पहुंची। पुलिस को उम्मीद है कि शनिवार को वह बयान दर्ज करवा देगी। वहीं, दूसरी और राम मनोहर लोहिया अस्पताल की तरफ से पुलिस को कांस्टेबल के ट्रीटमेंट पेपर भी मुहैया नहीं कराए गए हैं। 
गैंगरेप के विरोध में इंडिया गेट पर हुए हिंसक प्रदर्शन को काबू करने के लिए सुभाष की ड्यूटी लगाई गई थी, जहां संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई थी। घटना के दोनों चश्मदीद योगेंद्र और पाओलिन ने कांस्टेबल के खुद ब खुद बेहोश हो जाने की बात कही थी, वहीं राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट टीएस सिद्धू ने भी दोनों युवाओं की बात से सहमति जताते हुए कहा था कि सुभाष को कोई चोट नहीं लगी थी। वह हार्ट अटैक के चलते अचानक बेहोश हो गए थे और बाद में इलाज के दौरान उनकी अस्पताल में मृत्यु हुई। खुद को चौतरफा घिरा हुआ पाकर दिल्ली पुलिस ने भी बुधवार को अपने बचाव में सुभाष की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का कुछ हिस्सा मीडिया में जारी किया था। जिसमें लिखा था कि गले और छाती में चोट के चलते सुभाष को दिल का दौरा पड़ा था। 
क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त एसबीएस त्यागी ने बताया कि योगेंद्र ने अपने बयान दर्ज करा दिए हैं। हालांकि यह पूछे जाने पर कि क्या जांच में कुछ न आने पर हत्या की धारा हटा दी जाएगी। उनका कहना था कि जांच अभी प्रारंभिक स्तर पर है। जांच पूरी होने पर ही इस बारे में जानकारी दी जाएगी। उक्त मामले में तिलक मार्ग थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने आठ प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया था। 
उधर, क्राइम ब्रांच के दफ्तर के बाहर मीडिया से मुखातिब होते हुए योगेंद्र ने कहा कि मुझ पर किसी तरह का दबाव नहीं है। मुझे नोटिस भेजकर बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया था। मै वही करुंगा जो मैं कह रहा हूं। 
देशभर के दुष्कर्मियों की पहचान आम होगी। सरकार ने दुष्कर्मियों का डाटाबेस तैयार करने का फैसला किया है। इसमें उनके नाम, फोटो और पता लिखा होगा, जिसे आम लोगों के लिए जारी किया जाएगा। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को डायरेक्ट्री बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही पूरी जानकारी ब्यूरो की वेबसाइट पर जारी कर दी जाएगी। राज्यों की पुलिस को भी दुष्कर्मियों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर जारी करने को कहा जाएगा। 
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस को सलाह दी है कि वह व्यस्त रूटों पर, विशेषकर जिन इलाकों में महिलाओं की आवाजाही अधिक है, तैनात पीसीआर वैन में महिला पुलिसकर्मियों की उपस्थिति बढ़ाए। मंत्रालय ने कहा है कि महिला पुलिसकर्मी को देखकर महिलाओं के बीच हिम्मत बढ़ेगी और वे जरूरत होने पर मदद के लिए उनसे संपर्क करेंगी।



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