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महिलाओं के बारे में त्याग दीजिये गलत धारणा: राष्ट्रपति


दिल्ली में एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार घटना को लेकर व्यापक स्तर पर नाराजगी जताए जाने के बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ ‘नकारात्मक धारणाएं’खत्म होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा एवं सौहार्दपूर्ण माहौल दिया जाना चाहिए ताकि उनकी प्रतिभा पनप सके।
मुखर्जी ने कहा एक समाज के रूप में हमें महिलाओं के बारे में नकारात्मक धाराओं को बदलने के लिए काम करना चाहिए। महिलाओं के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए तथा उन्हें सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण माहौल उपलब्ध कराया जाना चाहिए जिसमें उनकी प्रतिभा पनप सके तथा अपने देश के निर्माण में वे पूरी भागीदारी निभा सकें। 

उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय की 150वीं जयंती पर वर्ष भर चले आयोजनों के समापन अवसर पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में आयोजित विशेष दीक्षांत समारोह में यह बात कही। नेपाल के राष्ट्रपति रामबरन यादव को दीक्षांत समारोह में विशेष डाक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। 

समारोह में केन्द्रीय संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमारी कटोच, केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री नमो नारायण मीणा, उत्तरप्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी तथा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कर्णसिंह भी मौजूद थे। मुखर्जी ने महामना पंडित मदनमोहन मालवीय को एक कुशल राजनेता, विद्वान, शिक्षाविद, पत्रकार, समाज सुधारक एवं कानून निर्माता करार देते हुए कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में उनका बहुमुखी और असीम योगदान है। 

राष्ट्रपति ने कहा मालवीयजी ने अपना पूरा जीवन देशसेवा में लगा दिया। वह महिला शिक्षा के प्रबल पक्षधर थे। महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण पर उन्होंने जिस तरह बल दिया उससे हमें प्रेरणा लेते हुए इस संबंध में दोगुने प्रयास करने चाहिए। उन्होंने अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र तथा मानव मूल्य एवं अध्ययन केन्द्र की आधारशिला रखी।

मुखर्जी ने इस अवसर पर महामना पर आधारित एक वेबसाइट भी शुरू की। उन्होंने कहा, ‘यह हम सभी के लिए प्रसन्नता का क्षण है कि हम विश्वविद्यालय की सर्वोच्च डिग्री नेपाल के सम्मानित राष्ट्रपति को प्रदान कर इस कार्यक्रम को स्मरणीय बना रहे हैं। नेपाल के साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक संबंध एवं ऐतिहासिक रिश्ते हैं।’
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