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AAP पार्टी के सामने आई नई मुसीबतें


आरटीआई कार्यकर्ता से नेता बनने निकले अरविंद केजरीवाल को अपने इस सफर के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी का रजिस्ट्रेशन करने से पहले औपचारिक्ताएं पूरी करने को कहा है। इसके तहत आम आदमी को लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 29ए के तहत हिंदी और अग्रेजी के अखबारों में विज्ञापन जारी करके आपत्तियां मंगाने को कहा गया था।

चुनाव आयोग के निर्देश के बाद अखबारों में विज्ञापन जारी तो कर दिया गया लेकिन अब नियमानुसार आयोग पार्टी का रजिस्ट्रेशन करने से पहले तय समय सीमा तक आपत्तियों के लिए इंतजार करेगा। इस बारे में तय समय सीमा 30 दिन की है। इसके बाद एक उप चुनाव आयुक्त द्वारा आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रूप सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।

इस सुनवाई में आमआदमी पार्टी (आआप) के प्रतिनिधियों को चुनाव आयोग के कई सख्त सवालों का सामना करना होगा। आआप प्रतिनिधियों से पार्टी बनाने का मकसद, नीतियां, संविधान, ऑफिस बियरर्स का विवरण और पार्टी के खर्चे के प्रबंधन के बारे में सवाल किए जाएंगे। उम्मीद की जा रही है कि चुनाव आयोग की तरफ से अगले साल जनवरी के अंत तक या फरवरी के पहले सप्ताह में इस तरह की सुनवाई की जा सकती है।

अगर चुनाव आयुक्त आआप के जवाबों से संतुष्ट होते हैं तो पार्टी का रजिस्ट्रेशन कर दिया जाएगा। रजिस्ट्रेशन के बाद जब पार्टी विधानसभा या लोकसभा चुनाव लड़ती है तो चुनाव आयोग उसे चुनाव लडऩे के लिए एक चुनाव चिन्ह जारी करेगा। ये चुनाव चिन्ह एक बार के लिए ही जारी किया जाएगा और चुनाव चिन्हों की लिस्ट में से बाकी बचे चिन्हों में से ही एक होगा।

आम आदमी पार्टी की तरफ से चुनाव आयोग की दिए गए आवेदन में पार्टी का मकसद देश में ऐसी राजनीतिक व्यवस्था कायम करना बताया गया है जिसमें जनप्रतिनिधी सीधे तौर पर आम आदमी के लिए जवावदेह होंगे, और ताकत विधायिका के हाथों में नहीं बल्कि जनता के हाथों में होगी।\
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