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मोदी सरकार अदानी की दुकान : केजरीवाल


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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस बार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की अदानी ग्रुप से साथ गहरी सांठगांठ है और उनकी सरकार ने कई मौकों पर अदानी ग्रुप को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया। आरोप लगाया गया है कि गुजरात में कांग्रेस और जूडिशरी तक मोदी के साथ मिले हुए हैं। 

फ्री में दी गईं खदानें
जिस वक्त संसद में एफडीआई पर बहस चल रही थी, उस वक्त अरविंद केजरीवाल गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर यह 'खुलासा' कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अदानी ग्रुप को फ्री में कोयला खदानें दिलवाईं। उन्होंने कहा, 'गुजरात सरकार ने कोयला खदानें तो फ्री में मुहैया करा दीं, लेकिन बदले में 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से अदानी ग्रुप से बिजली खरीदी। इस तरह से सरकार को बड़ा घाटा हुआ। यह जनता के साथ धोखा है।'


केजरीवाल ने यह भी कहा कि गुजरात सरकार ने अदानी ग्रुप को फायदा पहुंचाने के लिए महंगी जमीन को सस्ते में दे दिया। केजरीवाल ने आरोप लगाया, '1,600 करोड़ रुपये की ज़मीन को सिर्फ 1 रुपये प्रति स्क्वॉयर मीटर की दर से अदानी ग्रुप को दिया गया।' केजरीवाल ने सवाल पूछा है कि आखिर गुजरात सरकार अदानी ग्रुप पर मेहरबान कैसे हो गई?

मोदी सरकार अदानी की दुकान
केजरीवाल ने कहा कि मोदी व्यापारिक घरानों का साथ दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और बीजेपी व्यापारिक हितों को लेकर एक जैसे हैं। केजरीवाल ने कहा, 'अगर कांग्रेस अंबानी की दुकान है, तो गुजरात सरकार अदानी की दुकान है।'

क्यों चुप रही कांग्रेस?
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि गांधीनगर के पास विधायकों और सांसदों के लिए सस्ती दरों पर जमीन खरीदी गई थी, लेकिन जिन सांसदों और विधायकों यह जमीन मिली, उन्होंने इसे ऊंचे दामों में बेच दिया। केजरीवाल का आरोप है कि इस तरह से कांग्रेस के सांसदों और विधायकों ने भी फायदा उठाया, इसलिए वे चुप रहे।

जूडिशरी पर भी सवाल
केजरीवाल ने कहा कि गुजरात हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए प्लॉटों की बिक्री पर रोक लगा दी थी, लेकिन मोदी सरकार ने मौजूदा जजों और रिटायर्ड जजों को भी प्लॉट अलॉट कर दिए। कुछ जजों को छोड़कर बाकी सभी ने इस ऑफर को स्वीकार कर लिया। आरोप है कि उसके बाद आज तक इस मामले पर सुनवाई नहीं हुई और विधायक-सांसद अपने प्लॉटों को स्टे ऑर्डर के बावजूद बेच रहे हैं।

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