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विभीषण नहीं, अन्ना हजारे का भक्त हूं : कासमी

बिजनौर। अन्ना की कोर कमेटी से निष्कासन के बाद बिजनौर लौटे मुफ्ती शमऊन कासमी ने कहा कि वह अन्ना का सम्मान करते हैं और भ्रष्टाचार के विरोधी उनकी मुहिम से जुडे़ रहेंगे। उन्हें राजनीति से भी कोई परहेज नहीं है।


जासूसी के आरोप में 22 अप्रैल को अन्ना की कोर कमेटी से निकाले गए बिजनौर निवासी मुफ्ती शमऊन कासमी का कहना है कि वह 'विभीषण' नहीं, बल्कि अन्ना के भक्त हैं। उन पर लगाए गये आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कोर कमेटी से हटने का खुद ही फैसला लिया है। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, किरन बेदी व प्रशांत भूषण ने अन्ना को कैप्चर कर रखा है। वह अन्ना का सम्मान करते हैं, लेकिन ये चारों जनता के पैसे का बंदरबांट कर रहे हैं। उनके संघ अथवा किसी भी राजनैतिक दल से संबंध नहीं हैं। एक सवाल के जवाब में कहा कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से हवाई जहाज में मुलाकात अचानक हुई थी। मेरठ में शनिवार को सपा नेता अरशद मक्की के घर प्रेस वार्ता करने पर कहा कि उनसे पुराने संबंध हैं। उन्हें भी राजनीति से कोई परहेज नहीं है। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बहुत आशाएं हैं। मुफ्ती शमऊन कासमी का कहना था कि वह एक सप्ताह तक अज्ञातवास में नहीं रहे, बल्कि इस अवधि के दौरान दिल्ली में धार्मिक नेताओं से भेंट की और भ्रष्टाचार खत्म करने में सहयोग की अपील की। वह देवबंद दारूल उलूम के वाइस चांसलर व लखनऊ में धार्मिक नेताओं से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि कोर कमेटी की बैठक से बाहर आने के बाद वह विचलित हो गये थे। इसलिए वह भूलवश कह गये कि मुस्लिम होने के कारण ही उन पर आरोप लगाये गये हैं, जबकि वह यह कहना चाहते थे कि कमेटी में किसी मुस्लिम के न होने पर विपरीत प्रभाव पडे़गा।
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