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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

रक्षा मंत्री, सेना प्रमुख के खिलाफ साजिश टीम अन्ना

नयी दिल्ली। सेना को लेकर इन दिनों चल रहे विवादों पर निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए टीम अन्ना ने आज आरोप लगाया कि सीबीआई और आईबी की तफ्तीश से सच सामने नहीं आ पाएगा क्योंकि ये संस्थाएं सरकार के नियंत्रण में हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में अन्ना हजारे और उनके प्रमुख सहयोगियों ने हैरानी जताते हुए कहा कि हाल ही में एक अखबार में सेना की दो टुकड़ियों द्वारा असामान्य तरीके से कूच करने की खबर का मकसद रक्षा मंत्री एके एंटनी तथा सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह को हटाने का तो नहीं था।


हजारे, शांति भूषण, अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण तथा किरण बेदी के दस्तखत वाले पत्र में लिखा है, ‘‘क्या पिछले कुछ समय में हुए घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि ईमानदार सेना प्रमुख और ईमानदार रक्षा मंत्री के खिलाफ साजिश चल रही है? ’’
पत्र में आरोप लगाया गया कि जनरल सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोपों में सीबीआई की जांच तथा


प्रधानमंत्री को लिखे सेना प्रमुख के पत्र के लीक होने के मामले में आईबी की तफ्तीश से सच सामने नहीं आएगा। उन्होंने लिखा है कि ये एजेंसियां स्वतंत्र नहीं हैं और राजनीतिक आकाओं के अधीन हैं।


पत्र के अनुसार, ‘‘यदि जांच एजेंसियों पर आरोपियों, बिचौलियों तथा भ्रष्ट लोगों का निंयत्रण होगा तो सचाई सामने नहीं आ सकेगी। इस संबंध में आपकी सरकार द्वारा उठाये गये कदमों पर देश की जनता खुश नहीं है।’’


खत में यह भी आरोप है कि एक मीडिया संस्थान ने खबर दी कि अखबार द्वारा सेना के कूच के संबंध में प्रकाशित खबर के पीछे किसी केंद्रीय मंत्री का हाथ है।


इस मुद्दे से मजबूत लोकपाल की लड़ाई को जोड़ते हुए टीम अन्ना ने कहा है कि यदि मजबूत लोकपाल होता तो वह इस विषय पर ठीक से जांच कर सकता था।


उन्होंने पिछले साल 27 दिसंबर को लोकसभा में लोकपाल विधेयक पर चर्चा के दौरान सशस्त्र बलों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने के प्रस्ताव पर आपत्ति भी जताई।
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