सरकारी खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ रूपये का चूना लगाने वाले 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के लिए 700 करोड़ रूपये की रिश्वत दी गई थी। साढ़े तीन साल की जांच के बाद सीबीआई इस निष्कर्ष पर पहुंची है। विभिन्न एजेंसियां इस राशि में से अभी तक भारत में दी गई 200 करोड़ रूपये की रिश्वत की ही पहचान कर उसे जब्त करने में सफल हो पाई हैं। विदेश में दी गई 500 करोड़ रूपये की रिश्वत की तलाश अब भी जारी है। स्पेक्ट्रम घोटाले में दी गई रिश्वत का विवरण पेश करते हुए जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शाहिद बलवा की डीबी रीयल्टी ने 200 करोड़ रूपये की रिश्वत दी थी। यह रिश्वत तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करूणानिधि के परिवार की कंपनी कलैगनार टीवी में निवेश के रूप में दी गई थी।
डीबी रीयल्टी ने यह रकम करीम मोरानी की सिनेयुग कंपनी के मार्फत दी थी। सारे सुबूत मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यह रकम जब्त कर ली है। 2जी स्पेक्ट्रम पाने वाली यूनिटेक ने भी 240 करोड़ रूपये की रिश्वत दी थी। यह रिश्वत मॉरीशस की कंपनी प्यूरिटी इमर्जिग में निवेश की रूप में यूनिटेक ओवरसीज लिमिटेड के मार्फत दी गई थी।
अभी तक प्यूरिटी इमर्जिंग के मालिक का पता नहीं चला है। इसका पता लगाने के लिए सीबीआई यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा से नए सिरे से पूछताछ कर रही है। इस संबंध में मॉरीशस को लेटर रेगोटरी भी भेजा गया है। सीबीआई के अनुसार स्वान टेलीकॉम में रिलायंस टेलीकॉम के 9.1 फीसदी हिस्से को रिश्वत के रूप में मॉरीशस की कंपनी डेल्फी को बेचा गया था। माना जा रहा है कि स्वान को 2जी स्पेक्ट्रम का लाइसेंस मिलने से पहले उसके 9.1 फीसदी हिस्से का मूल्य भी लगभग 240 करोड़ रूपये होगा। जांच के दौरान पता चला कि डेल्फी खुद मावी इंवेस्टमेंट नामक कंपनी की सब्सिडियरी है। मावी इंवेस्टमेंट के मालिक का भी अब तक पता नहीं चल सका है। मॉरीशस गए सीबीआई अधिकारियों को पता चला कि मावी इंवेस्टमेंट भी स्विट्जरलैंड स्थित किसी कंपनी की सब्सिडियरी है। सीबीआई ने स्विट्जरलैंड को एलआर भेजकर इस कंपनी के मालिकों की जानकारी मांगी है। सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की पूरी साजिश से पर्दा उठ चुका है। इसमें दी गई रिश्वत की रकम की पहचान भी कर ली गई है। लेकिन, विदेश में लगभग 500 करोड़ रूपये की रिश्वत लेने वालों तक पहुंचना जांच अधिकारियों के लिए असली चुनौती होगी।
डीबी रीयल्टी ने यह रकम करीम मोरानी की सिनेयुग कंपनी के मार्फत दी थी। सारे सुबूत मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यह रकम जब्त कर ली है। 2जी स्पेक्ट्रम पाने वाली यूनिटेक ने भी 240 करोड़ रूपये की रिश्वत दी थी। यह रिश्वत मॉरीशस की कंपनी प्यूरिटी इमर्जिग में निवेश की रूप में यूनिटेक ओवरसीज लिमिटेड के मार्फत दी गई थी।
अभी तक प्यूरिटी इमर्जिंग के मालिक का पता नहीं चला है। इसका पता लगाने के लिए सीबीआई यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा से नए सिरे से पूछताछ कर रही है। इस संबंध में मॉरीशस को लेटर रेगोटरी भी भेजा गया है। सीबीआई के अनुसार स्वान टेलीकॉम में रिलायंस टेलीकॉम के 9.1 फीसदी हिस्से को रिश्वत के रूप में मॉरीशस की कंपनी डेल्फी को बेचा गया था। माना जा रहा है कि स्वान को 2जी स्पेक्ट्रम का लाइसेंस मिलने से पहले उसके 9.1 फीसदी हिस्से का मूल्य भी लगभग 240 करोड़ रूपये होगा। जांच के दौरान पता चला कि डेल्फी खुद मावी इंवेस्टमेंट नामक कंपनी की सब्सिडियरी है। मावी इंवेस्टमेंट के मालिक का भी अब तक पता नहीं चल सका है। मॉरीशस गए सीबीआई अधिकारियों को पता चला कि मावी इंवेस्टमेंट भी स्विट्जरलैंड स्थित किसी कंपनी की सब्सिडियरी है। सीबीआई ने स्विट्जरलैंड को एलआर भेजकर इस कंपनी के मालिकों की जानकारी मांगी है। सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की पूरी साजिश से पर्दा उठ चुका है। इसमें दी गई रिश्वत की रकम की पहचान भी कर ली गई है। लेकिन, विदेश में लगभग 500 करोड़ रूपये की रिश्वत लेने वालों तक पहुंचना जांच अधिकारियों के लिए असली चुनौती होगी।
