" "

भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

भ्रष्टाचार देश के लिए सबसे बड़ा खतरा : ओमपुरी


कुरुक्षेत्र, जागरण संवाद केंद्र : बॉलीवुड अभिनेता ओमपुरी दिल्ली में अन्ना के आंदोलन में सांसदों के खिलाफ बयानबाजी के बाद चाहे माफी मांग चुके हों, लेकिन आज भी भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके मन में आम आदमी तरह उठने वाली टीस बरकरार है। वे अब भी भ्रष्टाचार को समाप्त करने की इस मुहिम में अन्ना के साथ खड़े दिखे।

शुक्रवार को कुरुक्षेत्र में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने अन्ना का नाम न लेकर युवाओं को भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने तक का आह्वान किया। वे कुवि में आयोजित मीडिया फिल्म उत्सव में शिरकत करने आए।

उन्होंने कहा कि आज देश में सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार की है। जिसके कारण देश का हजारों करोड़ रुपया गलत हाथों में पहुंच गया है। देश को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ समाज में भ्रष्टाचारियों को भी इससे प्रेरणा मिल रही है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि देश में पहले हुई आतंकवादी घटनाओं में अशिक्षित लोग लिप्त पाए जाते थे लेकिन अब प्रोफेसर, इजीनियर व प्रबुद्ध लोग कहीं न कहीं ऐसी गतिविधियों में लिप्त पाए जा रहे है। वे सिनेमा में कॉर्पोरेट के बढ़ते प्रभाव पर भी बेबाकी से कहा कि यह सिनेमा के खतरनाक साबित हो रहा है। एक दौर था जब सिनेमा में थियेटर व साहित्य से लोग आते थे। इसी के कारण उस दौर का सिनेमा लोगों के जीवन के लिए अर्थपूर्ण था लेकिन अब कॉरपोरेट सिनेमाई संस्कृति का हिस्सा हो गया है जिसके कारण रचनात्मक फिल्में बनना कम हो गई है जो भारतीय सिनेमा उद्योग के लिए चिंता का विषय है। फिल्म व टेलीविजन ऐसे माध्यम है जो लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित करते है। इसलिए इन माध्यमों की विषय वस्तु पर लेखकों, फिल्म निर्माताओं, अभिनेताओं को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि आज फिल्मों में साहित्य के लोग नहीं बल्कि व्यापारियों का जमावड़ा है। उन्होंने कहा है कि छोटे-छोटे शहरों में फिल्म समारोहों के आयोजनों से ही देश में फिल्म संस्कृति का विकास होगा जो भारतीय सिनेमा को भविष्य में एक नई दिशा दे सकता है।

उन्होंने कहा कि सिनेमा किसी भी देश की संस्कृति व सभ्यता का परिचायक होता है। ऐसे में उन्होंने सरकार से मांग की है कि सामाजिक सरोकार रखने वाली शिक्षाप्रद फिल्मों को स्कूल व कॉलेजों में विद्यार्थियों को दिखाना चाहिए ताकि किसी लेखक व निर्माता की वह रचनात्मक कृति जाया न हो। उन्होंने कहा कि उतर व पूर्वी भारत में क्षेत्रीय सिनेमा दम तोड़ता जा रहा है। जबकि दक्षिण भारत की स्थिति बेहतर है क्योंकि दक्षिण भारत में बनने वाली क्षेत्रीय फिल्मों का अनुवाद करके उसे देश के विभिन्न राज्यों में दिखाया जा रहा है। आज कॉमेडी फिल्मों का दौर है और फिल्मों में घटिया मजाक इस्तेमाल किया जाता है।
" "