मुंबई. विपक्ष के नेता एकनाथ खडसे ने विदर्भ सिंचाई महामंडल में 3500 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। सोमवार को विधानसभा में उन्होंने कहा कि महामंडल के 3500 करोड़ रुपए भ्रष्टाचार में बर्बाद हो गए। उन्होंने इस संबंध में पेश मेडेगरी समिति की रिपोर्ट सदन में रखने की मांग भी की।
वहीं जल संसाधान मंत्री सुनील तटकरे ने माना कि लोअर वर्धा सिंचाई परियोजना में देरी हुई। प्रश्नकाल में मनसे के प्रवीण दरेकर, उत्तमराव ढिकले, हर्षवर्धन जाधव, बाला नांदगांवकर और राम कदम ने लोअर वर्धा सिंचाई परियोजना में विलंब का मुद्दा उठाया था। विपक्ष के नेता ने सदन को बताया कि 48 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना पर 1105 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
इसके बावजूद महज 350 हेक्टेयर जमीन सिंचाई क्षेत्र में आ पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह दोगुना-तीन गुना महंगा टेंडर निकालकर सरकार ने विदर्भ का अनुशेष खत्म किया है। परन्तु उसका भौतिक अनुशेष खत्म नहीं हुआ है।
दरेकर ने कहा कि सरकार ने परियोजना को वर्ष-2013 में पूरा करने की घोषणा की थी, परन्तु तय समय-सीमा में उसके पूरे होने की उम्मीद नहीं लगती। जवाब में जल संसाधन मंत्री ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी, जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास और परियोजना का दायरा बढ़ने जैसे विविध कारणों के चलते लोअर वर्धा सिंचाई परियोजना में देरी हुई।
उन्होंने सदन को बताया कि सरकार ने वर्ष-2014-15 तक परियोजना को पूरा करने की योजना तैयार की है। जल संसाधन मंत्री के अनुसार एक जनवरी,1989 को परियोजना को मंजूरी मिली थी। परियोजना की मदद से 63,335 हेक्टेयर जमीन सिंचाई क्षेत्र में लाने का लक्ष्य रखा गया। इन 30 सालों में उस पर 2365.58 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
