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यह है गन्ने के घटते दामों का राज़ : केजरीवाल


अपने पसीने से मिठास के दाने उगाने वाले किसानों ने गन्ने की वाज़िब क़ीमत मांगी थी, जबकि पुलिस ने गोली दाग दी। इस कातिल गोली के बाद अब सियासत के गोले दागने का सिलसिला शुरू हो गया है।

सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर अरविंद केजरीवाल लिखते हैं, महाराष्ट्र में कितनी चीनी मिलें, एनसीपी, बीजेपी और कांग्रेस के लोगों के पास हैं? कौन से मंत्री चीनी मिलों के मालिक हैं? यही डेटा बताएगा कि क्यों सरकार चीनी मिल मालिकों का पक्ष ले रही है और गन्ने के अच्छे दाम क्यों नहीं लगा रही है। उधर अन्ना कहते हैं कि सरकार किसानों का हित नहीं चाहती है। किसान, केजरीवाल और अन्ना के मैदान में उतर आने पर महाराष्ट्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों बचाव की मुद्रा में उतर आए हैं।

गौरतलब है कि सरकार ने अभी तक चालू पेराई सीजन वर्ष 2012-13 (अक्टूबर से सितंबर) के लिए गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) तय नहीं किया है जिसकी वजह से चीनी मिलों में पेराई शुरू नहीं हो पाई है। किसानों को रबी सीजन की बुवाई के लिए खेत खाली करने हैं इसलिए वे खेतों से गन्ने की कटाई करके मजबूरी में कोल्हू संचालकों को औने-पौने दाम पर बेच रहे हैं। कोल्हू संचालकों के पास गन्ने की सप्लाई बढ़ गई है, जिससे गन्ने का मूल्य घटकर 200-215 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है, जबकि अक्टूबर में भाव 240-250 रुपये प्रति क्विंटल था।

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