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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

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"जागृत मतदार यही लोकशाही का आधार " : अन्ना


                       "जागृत मतदार यही लोकशाही का आधार " 

आज़ादी के बाद देश और देश की जनता की अधोगति के कही कारण है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण कारण हे  उनमे ....



देशके कही मतदार  जागृत नहीं हुये यह स्पष्ट दिखाई देता है। शराब की बोतल लेकर आपना अमूल्य मत देता है। पैसा अथवा कुछ रिश्वत लेकर अपना मत देता है। अपनी जाती-पाती को देखकर मत देता है। धर्म को देखकर मत देता है। रिश्ते देखकर मत देता है। दुसरोंके  कहने पर मत देता है। ,इस कारन गुंडा ,भ्रष्टाचारी ,व्यभिचारी,लुटारू उम्मीदवार संसद और विधानसभा जैसे हमारे लोकशाही के पवित्र मंदिरमें जाते है, ऐसे लोग जनता के उज्वल भविष्य के लिए नहीं सोचते है। आज़ादी के 65 साल के बाद जनता को अपने वोट की कींमत समज में नहीं आई, यह दुर्भाग्य की  बात है। मतदाताओं के एक मत में संसदमें , देशमे बदलाव लाने की शक्ति है ।

   
भ्रष्टाचार मुक्त भारत की निर्मिती करनी है , तो देश के हर नागरिक को यह तय करना है और प्रतिज्ञा  करनी है कि मै भ्रष्टाचार नहीं करने दूंगा ।अपना वोट देने के लिये रिश्वत लेना यह भ्रष्टाचार ही है।मतदार  खुद ही रिश्वत लेकर भ्रष्टाचार करता है, तो ऐसे लोगोंने भ्रष्टाचार मुक्त भारत की अपेक्षा करना  ठिक नहीं है।


इसीलिये देश, गाँव, तहसिल ,जिल्हा स्तर  के सभी मतदारों को  जगाना होगा कि, समाज और देश के उज्वल भविष्य के लिए  किसी  पक्ष , पार्टी को न देखते हुए जाती -पाती को न देखते हुये सिर्फ चरित्र्यशिल व्यक्ति को ही मेरा मत दूंगा। मतदार जागृती अभियान चलाने के लिये गाँव स्तर तहशील स्तर, जिला स्तर पर सेवाभावी सामाजिक , राष्ट्रीय दृष्टिकोन है और देश प्रेम की भावना है ऐसे लाखो युवकोने स्वयंसेवक बनकर (वोलंटियर ) इस  काम  को देश सेवा समजकर आगे आने की जरुरत है ।

  जब तक संसद मे चरित्र्यशील उम्मीदवार नहीं जायेंगे तब तक भ्रष्टाचार को रोकनेवाले कानून नहीं बन पाएंगे। भ्रष्टाचार को कुछ हद तक रोकने के लिये जनलोकपाल  के साथ साथ देश मे राईट टू रिजेक्ट ,ग्रामसभा को  पूरा अधिकार, दप्तर दिरंगाई, एक टेबल का पेपर दुसरे टेबलपर सात (7) दिनमे जाना, जनता को दप्तर में बार बार चक्कर लगाना और रिश्वत न देना पड़े , जनता की सनद, हर दफ्तर में जनता का काम कितने दिनों मे करना, समय पर नहीं किया तो उस अधिकारी को दंडात्मक कारवाई हो, मंत्रालय की सत्ता विकेन्द्रित होकर ग्रामसभाको जादा अधिकार देना, संसद अथवा विधानसभा को गाँव की जल, जंगल, जमींन जैसी कोई भी चीज लेनी है तो ग्रामसभा की  अनुमती लेना अनिवार्य करना है। संसद मै ऐसे कानून बन गये तो नब्बे प्रतिशत  (90%) भ्रष्टाचार को रोक थम लग सकेगा।  अपने काम के लिए रिश्वत नहीं देनी पड़ेगी और गरीब आदमी को न्याय मिलेगा।  इस लिए मतदाताओंको  चरित्रशिल  उम्मीदवार को अपना मत देना है ।


    भ्रष्टाचार रोकने के साथ देशमे किसानोका प्रश्न हातमे  लेना होगा, कृषि प्रधान भारत देश में किसानो की समस्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। इसीलिए  आज़ादी के 65 सालके बाद भी  किसान आत्महत्या कर रहे है। ,26 जनवरी 1950 में हमने पहला प्रजासत्ताक  दिन मनाया, उस दिन से देश में प्रजा की सत्ता आ गयी है। प्रजा इस देश की मालिक  बन गई है, सरकारी तिजोरि में जमा होनेवाला  पैसा जनता का है। देश की जल, जंगल, जमीन  जैसी प्राकृतिक सम्पदा यह जनता की है ।सरकारी तिजोरी के पैसेका सही नियोजन और प्राकृतिक संसाधनों का नियोजन करने के लिये जनता ने सविधान के मुताबिक राज्य के लिये एम्एलए  और केंद्र के लिए एमपी  अपने सेवक के नाते भेजे है, मालिक जनता है ।



    राष्ट्रपतिजीने   आएएस ,आयपीएस  जैसे  सनदी अधिकारियोंके (गवर्नमेंट सर्वेन्ट) जनता के सेवक के नाते चयन किया है। सभी  जन प्रतिनिधी  और अधिकारी जनता के सेवक है। दोनो की मिलकर बनी है सरकार। सरकार का काम जनता की सेवा करना  है। संविधान के मुताबिक किसान और गरीब आदमी की विकास की निती बनाने के बजाय विदेशी कंपनियों को यहा बुलाकर उन कंपनियो के  विकास की निती बनवा रही है, सरकार को किसान, मजदुर, गरीब आदमी की चिंता नहीं है  जीतनी विदेशी कंपनीयोंकी है।

  
सरकार  विदेशी कंपनीयों को यंहा  बुलाकर कंपनीयो को देने के लिये किसानो की जमीन जबरदस्ती से ले रही है। किसनोने जमींन नहीं दी तो किसानो पर डंडे चलाये जाते है, डंडो से  किसान बाज  नहीं आये तो किसानों पर गोलीया चलायी जाती है और जबरन किसानो की जमीन विदेशी कंपनीयो को दी जाती है ।
   
   ऐसे  कृती से  स्पष्ट  होता है कि अंग्रोजो की हुकुमशाही और आज की सरकार मे क्या फरक है ?पानी का निजीकरण, जमींन का निजीकरण, जंगलो का निजीकरण, नदियोंका निजीकरण करके सरकार जनता की  प्राकृतिक  सम्पदा विदेशी कंपनी योको बिक्री कर रही है। यह हमारे देशके  लिए बहुत बड़ा खतरा निर्माण हो गया है। वास्तव यह है कि जनता इस देश कि मालिक है। सभी जन प्रतिनिधी और अधिकारी जनता के सेवक है। जनता (मालीक ) कि  प्राकृतिक धनसंपदा सेवकोको (सरकार ) अपने मनमर्जी से बिक्री करने का कोई अधिकार नहीं है। सरकारने जो भी निर्णय लेने है वह जनता की राय लेकर निर्णय लेने है, इससे स्पष्ट होता है की सरकार चलानेवाले सभी सेवक होते हुये मालिक बनकर जनता की संपत्ती को लुट रहे है। क्या इसी को हम जनतंत्र कहेंगे? यही है हमारी लोकशाही ?

  जो  सरकार  संविधान के मुताबिक गरिब, किसानो  की  नहीं सोचती ऐसे  सरकार  को सत्तामे  बैठने का कोई अधिकार नहीं है। वह संविधान के विपरीत है, जो सरकार संविधान का पालन नहीं करती ऐसे सरकार को सत्ता मे बैठने का कोई  अधिकार नहीं है, यह बात स्पष्ट हो रही है, संविधान  का पालन न करने वाली संसद को जनता ने ही भंग करने का समय आ  गया है। कारन संसद जनताने  ही बनाई है। अब पक्ष  और पार्टियों से देश के लिये उज्वल भविष्य नहीं दिखाई दे रहा है, हर पक्ष और पार्टी सत्तासे पैसा  और  पैसा से सत्ता की  होड़में लगी है, आज़ादी के लिये लाखों शहीदोंके बलिदान की याद नहीं रही। समाज और देशके उज्वल भविष्य की सोच नहीं रही। सभी पक्ष और पार्टियोंने सर्व संमतिसे ऐसा कानून बनवाया है की हमारी  पार्टी के  चुनाव के खर्चा के लिये जनतासे जो पैसा (डोनेशन ) मदत मिलेगा उस पैसे से बिस (20) हज़ार  रूपया का डोनेशन का हिसाब नहीं देना है और बड़े बड़े उद्योगपतियोंसे ऐसे करोडो रुपयों का डोनेशन कही पार्टिया लेती है। उनके  बीस (20) हज़ार रुपयोके तुकडे करती है और उन टुकड़ो को बोगस  व्यक्तियौका नाम देती है और  कालाधन यही से सफ़ेद होना शुरू हो जाता है। इसको रोकना है तो सभी पक्ष और पार्टी का डोनेशन का पैसा जप्त  करके सरकारने चुनाव का खर्चा करना है। तब पक्ष और पार्टी का दुर्व्यवहार कम होगा ।


जीन  पक्ष और पार्टियों की  शुरवातही भ्रष्टाचार से होती है  ऐसी  पार्टी देश का उज्वल भविष्य कैसे बना सकती है? इस लिए  जनता ने  पक्ष और पार्टी का सोच न करते हुये जनताने ही चारित्र्यशिल  उमेदवार चुनकर ऐसे उमीदवार को अपना मतदान करना है। संसदमे चारित्र्यशिल लोग भेजनेसे देशमे परिवर्तन आ सकेगा। साथ साथ देश में गाँव, तहसिल, जिला  और राज्यस्तर पर जन आंदोलन करनेवाले करोडो लोगो का संघटन  करना होगा। आज़ादी का अर्थ स्वैराचार लगाकर चलनेवाली  सरकार पर जनशक्ती  का दबाव निर्माण करके, सरकार चाहे किसी भी पक्ष या पार्टीकी  हो सरकार गिराने की शक्ती जनसंघटनमे आ गई तो जनता कहेगी  वह सरकार को करना पड़ेगा अन्यथा सत्ता छोड़कर सरकारको जाना पड़ेगा ।





देश के युवा शक्तीने जनता  को जगाकर संघटित  करने का समय आ गया है। गाव, तहसील, जिला, राज्य स्तर पर बहुत बड़ा संघटन खड़ा करना है। मै  जनवरी से  देड साल देशभर दौरा करके हर राज्य में जाकर जनता को जगाने का प्रयास करूँगा। साथ साथ युवाको ने इस काम के लिये  आगे आना है। ऐसे युवको को अवाहन करूँगा। आज़ादी की दूसरी लड़ाई समजकर राष्र्टीय स्तर पर संघटन खड़ा करने का प्रयास देश की जनता ने सब मिलकर करना है ।


इस  अन्दोलन से जुड़ने वाले कर्यकरतोओने निचे लिखे  पते पर सम्पर्क  करना है ।



(कि .बा. उपनाम अन्ना हजारे  )


दिनांक :-21 नवम्बर 2012


पत्ता                                                                                  दिल्ली  कार्यालय 
भ्रष्टाचार विरोधी जन आन्दोलन                                     इंडिया अगेंन्स करप्शन ,
मु.पो. रालेगन सिद्धी, तहशील - पारनेर,                         बी -18,सर्वोदय एनक्लयु,नियर  मदर स्कूल 
जिल्हा -अहमदनगर, पिन -414302                                हुज  खास रोड ,बारखम्बा रोड ,
पिन -414302                                                                    नई  दिल्ल्ली -110017
फ़ोन नंबर -02488 -240401,240010                                 ईमेल -annahazareofficedelhi@gmail.com
ईमेल -joinbvja@gmail.com
वेब साईट -joinannahazare.org.in



आन्दोलन  को आर्थिक सहयता करने के लिए  निचे दिए हुए -- Bank Details:-


Name :- India Against Corruption
Bank Name :- Bank Of India
Branch Name :- Hauz Khas C&P Banking
Address :-G-1, Hauz Khas Enclave,Mehrauli Road, New Delhi
A/C No-  600520110000486
IFSC Code :- BKID0006005
MICR Code :-110013010

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