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CAG के निशाने पर आई रिलायंस


नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ पर कड़ा रुख अपनाते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय को पत्र लिख कर कहा है कि जब तक रिलायंस कृष्णा गोदावारी (केजी) बेसिन के डी6 ब्लॉक में अपने खर्च का ऑडिट कराने नहीं देती है तब तक उसके आगे के निवेश को मंजूरी न दी जाए. कैग ने अपने पत्र में कुछ मीडिया रिपोर्टों का जिक्र किया है जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (आरआईएल) द्वारा केजी बेसिन के डी6 ब्लॉक के लिए किए जाने वाले सालाना पूंजीगत निवेश को तेल मंत्रालय द्वारा मंजूरी दिए जाने की संभावना जताई गई है.


गौरतलब है कि इससे पहले भी कैग ने तेल मंत्रालय को सुझाव देते हुए कहा था कि, "ये मंत्रालय की जानकारी में है कि किसी भी तरह का पूंजीगत निवेश सरकार के वित्तीय हितों को नुकसान पहुंचाएगा. लेकिन जब मंत्रालय ने रिलायंस के केजी बेसिन के निवेश को मंजूरी देने की बात सामने आई तो कैग ने मंत्रालय को पत्र लिखकर अपनी नाराज़गी जताते हुए आगे के निवेश रोकने को कहा है. 

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार चाहती है कि कैग रिलायंस के हिसाब-किताब की जाँच करे. लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने इस पर एतराज जताते हुए कहा था कि कैग एक संवैधानिक संस्था है और उसका कार्य सरकारी एंजेसियों का ऑडिट करना है और चूंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की सरकारी कंपनी नहीं है ऐसे में ये ठीक नहीं कि कैग उसके खातों की जाँच करे.


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