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सरकार को भी नहीं पता कि महात्‍मा गांधी कैसे बने राष्‍ट्रपिता

लखनऊ। देश व प्रदेश के हर सरकारी दफ्तर में राष्‍ट्रपिता महात्मा गांधी की फोटो व प्रतिमा लगी है लेकिन सरकार को यह तक नहीं पता कि महात्मा गांधी को राष्‍ट्रपिता की उपाधि कैसे और कब दी गयी। यह खुलासा तब हुआ जब 10 साल की एक बच्ची ने सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मांगी। दस वर्षीय ऐश्वर्या ने सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मांगी कि पहली बार महात्मा गाँधी को राष्‍ट्रपिता कब कहा गया।

राष्‍ट्रपिता महात्मा गाँधी के प्रति पूरा राष्‍ट्र कृतज्ञता महसूस करता है, उनके बारे में जानने की जिज्ञासा सबके मन में रहती है। इस बच्ची ने पूछा है कि गांधी जी को पहली बार राष्‍ट्रपिता कब और किसने कहा, क्या इस बात कि जानकारी का कोई तथ्य है आपके पास? अपनी क्लास में गाँधी जी के बारे में पाठ पढ़ रही ऐश्वर्या को अचानक जिज्ञासा हुई कि महात्मा गाँधी कि राष्‍ट्रपिता पहली बार कब और किसने कहा?

पहले शिक्षिका, फिर माता पिता और उसके बाद दोस्त रिश्तेदार भी जब जवाब न दे पाए तो इन्टरनेट का सहारा लिया। पर जानकारी नहीं मिली। ऐश्वर्या ने प्रधानमंत्री कार्यालय को चिठ्ठी भेजी और यही सवाल किया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस चिठ्ठी को गृह मंत्रालय भेजा और उसके बाद गृह मंत्रालय ने सभी प्रकार के रिकार्डस रखने वाले को यह पत्र भेजा। आखिरकार ऐश्वर्या के पास जवाब आया, ऐसी कोई जानकारी दर्ज नहीं।

वैसे तो राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के बारे में ढेरो जानकारी मिलती है। उनको 1914 में पहली बार उन्हें महात्मा कहा गया। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के 1944 में रंगून में दिए गए एक स्पीच का जिक्र आता है जिसमे उन्होंने गाँधी जी को राष्ट्रपिता संबोधन किया है। इस प्रमाण पर सरकारी रिकॉर्डस कुछ नहीं कहते। यानि सवाल फिर वही रहा कि पहली बार कब और किसने कहा।

अब ऐश्वर्या चाहती है कि महानतम गाँधी को लिखित रूप में भी ये दर्जा मिले और इसके लिए वो पत्र लिखकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को आग्रह करने कि तैयारी में है। देश का इतिहास जहाँ कागजों के अलावा कही और सुनी जाने वाली तमाम बातों में भी होता है। हो सकता है कि इस सवाल का जवाब भी किसी के पास हो।
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