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क्या आम आदमी कि मदद को आगे आएंगे राहुल गाँधी?


जिस समय राहुल गांधी शीला दीक्षित के बगल मैं बैठकर कांग्रेस के दरवाजे आम आदमी के लिए खोलने की बात वाले भाषण की स्क्रिप्ट लिख रहे थे, ठीक उसी समय शीला दीक्षित द्वारा भेजे गए बुलडोजर छतरपुर पहाड़ी इलाके में रहने वाले कुछ परिवारों के घर तोड़ने पहुंचे थे. करीब चार दशक पहले बने उन घरों में तीसरी पीढ़ी बड़ी हो रही थी. कांग्रेस की सरकारों ने ही उन्हें बिजली के कनेक्शन दिए थे. उस पते पर वोटर आईकार्ड बनवाए थे. उनके कच्चे पक्के घरों को मान्यता दी थी, हाउस टैक्स भी वसूला था.

लेकिन चंद मिनटों के भीतर उनका आशियाना उजाड़ दिया गया. जल्द ही उस जमीन पर कोई होटल या मॉल खड़ा होने लगे. क्या राहुल गांधी आम आदमी के सर से छत उजाड़ने वाली अपनी पार्टी की सरकार के निर्णय का विरोध करते आम आदमी के दर्द में शरीक होंगे या विरोध की उठती आवाज़ को खामोश करने के लिए पुलिस को आगे कर देंगे.

खैर राहुल गांधी आम आदमी के दर्द में शरीक होने आएं न आएं, आम आदमियों की आवाज़ उठाने वाले आईएसी के कार्यकर्ता सूचना मिलते ही मनीष सिसोदिया की अगुवाई में मौके पर पहुंचे. उन परिवारों के समर्थन में खड़े हुए. नाराज सरकार ने आईएसी कार्यकर्ताओं को थाने की हवा खिला दी. दर्जनभर आईएसी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने कई घंटे तक महरौली थाने में बंद कर रखा.

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