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कांग्रेस ने कबूला सच…पर कितना?


सुब्रमण्यम स्वामी के सोनिया और राहुल पर लगाये गए आरोपों के 24 घंटों के अन्दर कांग्रेस पार्टी के कई विरोधाभासी बयान आये। पहले राहुल गाँधी ने स्वामी के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा था कि स्वामी के आरोप बिलकुल निराधार हैं। वे उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करेंगे।

लेकिन शाम होते होते कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने एक प्रेस रिलीज़ के जरिये यह स्वीकार करते हुए कहा, ”कांग्रेस ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की सहायता के लिए धन दिया था। ऐसा करके हमने अपना कर्तव्य निभाया है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। कांग्रेस ने कानून के मुताबिक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की हालत सुधारने एवं समाचार पत्र प्रकाशित करने के लिए सहायता दी है। पार्टी ने बगैर किसी व्यापारिक लाभ के ब्याज रहित ऋण दिया है।”

द्विवेदी के मुताबिक ऐसा करते हुए कांग्रेस ने देश के किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरु द्वारा 1937 में स्थापित नेशनल हेराल्ड ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई है और इसकी सहायता करना पार्टी के लिए गर्व की बात है।

किन्तु द्विवेदी कि यह स्वीकारोक्ति राहुल गाँधी के उस कथन का खंडन करती है जिसमे उन्होंने कहा था कि नेशनल हेराल्ड या किसी अन्य समाचार पत्र को पुनर्जीवित करने की कांग्रेस पार्टी की कोई योजना नहीं है।

अक्तूबर महीने में पायनियर अख़बार को भेजे गए एक इ-मेल में राहुल गाँधी के कार्यालय ने यह स्पष्ट किया था कि राहुल और सोनिया द्वारा स्थापित यंग इंडियन कंपनी एक गैर लाभकारी कंपनी है जिसकी कोई व्यापारिक गतिविधियाँ नहीं हैं। साथ ही उसकी अखबार निकालने की कोई योजना नहीं है।

उल्लेखनीय है कि आज़ादी के पूर्व जनता के चंदे के पैसे से स्थापित एसोसिएटेड जर्नल्स नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करती रही है। बाद के दिनों में यह कंपनी मृतप्राय हो गयी। इसकी अचल सम्पति को मात्र 50 लाख रुपये में यंग इंडियन को बेच दी गयी। अगर स्वामी के आरोपों पर विश्वास किया जाए तो यंग इंडियन कंपनी इस संपत्ति को किराये पर लगाकर मुनाफा कमा रही है। होना यह चाहिए था कि जनता से पैसे से स्थापित एसोसिएटेड जर्नल्स जिसका उद्देश्य अखबार निकालना था, वह संपत्ति सरकार को वापस कर दी जानी चाहिए थी।

सरकार इस मुद्दे पर संभवतः कुछ नहीं करने जा रही है। किन्तु एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि राहुल गाँधी की यंग इंडियन कंपनी में हिस्सेदारी है या नहीं। ऐसे में चुनाव आयोग की जिम्मेदारी बनती है कि वह इसकी पड़ताल करे क्योंकि राहुल गाँधी ने 2009 के चुनाव शपथ पत्र में ऐसी किसी भी हिस्सेदारी की बात नहीं की थी।

अगर राहुल गाँधी पर लगा यह आरोप सही है तो यह नेहरु-गांधी परिवार पर कई सवाल खड़े करता है।

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