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भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

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नई टीम के गठन के साथ अन्ना ने भरी हुंकार


नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल के अलग होने के दो महीने बाद अन्ना हजारे एक बार फिर पुराने तेवरों में नजर आए। नई टीम बनने के बाद अब अन्ना का नारा मजबूत लोकपाल के साथ ही संपूर्ण बदलाव का भी है। अन्ना ने साफ कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम जारी रहेगी। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि दिल्ली में उनका दफ्तर खुलेगा जिसके बाद आंदोलन तेज किया जाएगा।

अन्ना ने कहा कि टीम टूटने से आंदोलन पर फर्क नहीं पड़ेगा। अन्ना के मुताबिक इस बार संपूर्ण बदलाव के लिए आंदोलन शुरू होगा। अन्ना ने कहा कि कमजोर लोकपाल किसी कीमत पर मंजूर नहीं किया जाएगा। उन्होंने 2014 तक मजबूत लोकपाल लाने की अपील की है। अन्ना ने एक बार फिर राइट टू रिजेक्ट बिल पास कराने की मांग की। अन्ना ने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार मुक्त भारत नहीं चाहती। यही नहीं अन्ना ये भी बोले कि सरकार CBI के सहारे चल रही है। अन्ना ने साफ किया कि इस बार वो पूरे देश में घूम घूमकर बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे।


आईएसी के नाम के उपयोग को लेकर जब अन्ना से सवाल किया गया तो वो साफ कह उठे कि ये नाम उनका है। उन्होंने साफ किया कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बैनरों पर उनकी फोटो लगती है इसलिए ये नाम उनका ही है। इस पर अरविंद ने भी सधा हुआ बयान जारी किया कि अन्ना उनके गुरु हैं। आईएसी नाम क्या वो जो मांगें अरविंद उनके लिए छोड़ देंगे।

आने वाले दिनों में अन्ना अपनी टीम और बड़ी करना चाहते हैं। लेकिन सूत्रों के मुताबिक पहली ही बैठक में कई मतभेद सामने आए। कोर कमेटी में वीरेंद्र खोखर को लिए जाने पर कुछ सदस्यों में नाराजगी है। वहीं आईपीएस शशिकांत ने भी प्रेस कांफ्रेंस में बैठने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। उनको कुर्सी पर बैठने से किसी ने हटा दिया था। जिसके बाद उन्होंने ई मेल करके कहा कि वो कोर कमेटी छोड़ रहे हैं लेकिन फिलहाल उनको मना लिया गया है।

बैठक में एक नया ट्रस्ट भी बनाने की बात की गई। लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हो सका। शनिवार की बैठक में अन्ना के अलावा किरण बेदी, संतोष हेगड़े, मेधा पाटकर, अखिल गोगोई, अरविंद गौड़, सुनीता गोदारा, पूर्व डीजीपी शशिकांत, पूर्व IAS अविनाश धर्माधिकारी, कर्नल वीरेंद्र खोखर, राकेश रफीक, रणसिंह आर्य, अक्षय, शिवेंद्र सिंह चौहान और बिशंभर चौधरी ने हिस्सा लिया।

अन्ना की नई टीम में फिलहाल 13 सदस्य होंगे। लेकिन इसे जल्द ही बड़ा स्वरूप दिया जाएगा। हालांकि शनिवार की बैठक के बाद एक बड़ा सवाल ये भी खड़ा हुआ कि इसमें पूर्व सेनाध्यक्ष वी के सिंह क्यों नहीं शामिल हुए। बीते दिनों दिल्ली हो या मुंबई हर जगह अन्ना के साथ वी के सिंह नजर आए थे। साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संसद को भंग करने की मांग भी की थी लेकिन इतनी अहम बैठक में वो नहीं आए। खुद अन्ना का कहना है कि उन्हें इस बैठक में शामिल होने के लिए न्योता भेजा गया था लेकिन वो नहीं आए हालांकि उनकी ये भी दलील है कि वी के सिंह अभी कोर कमेटी के सदस्य नहीं हैं।

अपने पुराने शिष्य अरविंद केजरीवाल के लगातार हो रहे खुलासे का भी अन्ना हजारे ने समर्थन किया है। अन्ना ने कहा है कि आने वाले दिनों में अगर अरविंद केजरीवाल चुनाव में खड़े होंगे तो वो उन्हें भी जिताने की कोशिश करेंगे।


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